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वैश्विक स्वास्थ्य केंद्र के रूप में स्थापित हुआ भारत: नड्डा

केन्‍द्रीय स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने मंगलवार को कहा कि भारत आज एक वैश्विक स्वास्थ्य केंद्र के रूप में स्थापित हो चुका है। उन्होंने मंगलवार को यहां वैश्विक निवेशकों एवं उद्यमियों के समागम ‘उत्तर प्रदेश दवा सम्मेलन-एक’ को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा, ‘भारत आज एक वैश्विक स्वास्थ्य केंद्र के रूप में स्थापित हो चुका है और देश दुनिया की लगभग 30 प्रतिशत जेनरिक दवाएं और लगभग 60 प्रतिशत तक वैश्विक वैक्सीन मांग की आपूर्ति करता है। हमारे दवा उत्पाद 200 से अधिक देशों में निर्यात होते हैं।

नड्डा ने कहा, ‘आज इस दवा सम्मेलन में उपस्थित होना मेरे लिए सम्मान की बात है। यह आयोजन ऐसे समय में हो रहा है जब भारत अपने विकास यात्रा के एक महत्वपूर्ण और निर्णायक चरण पर खड़ा है।उन्होंने कहा, ”पिछले एक दशक में प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत ने उपभोग आधारित अर्थव्यवस्था से आगे बढ़कर उत्पादन और नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था की ओर मजबूत कदम बढ़ाया है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मजबूत डिजिटल आधारभूत ढांचा और व्यापक शासन के सुधारों के कारण भारत आज एक भरोसेमंद और जिम्मेदार वैश्विक साझेदारी के रूप में पहचान बना रहा है। नड्डा ने कहा, जी-20 की अध्यक्षता और वैक्सीन कूटनीति में भारत की भूमिका ने हमारी वैश्विक जिम्मेदारी और क्षमता को स्पष्ट रूप से दर्शाया है। इस परिवर्तन की सबसे स्पष्ट झलक और स्वास्थ्य और दवा क्षेत्र में देखने को मिलती है।

नड्डा ने कहा कि आयुष्‍मान भारत, प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत आज 62 करोड़ से अधिक लाभार्थी स्‍वास्‍थ्‍य सुरक्षा के दायरे में हैं। अब तक 10 करोड़ से अधिक उपचार इस योजना के माध्‍यम से संभव हुए हैं और एक लाख 30 हजार करोड़ रुपये से अधिक स्वास्थ्य व्यय सरकार द्वारा वहन किया गया है। उन्होंने कहा कि देश भर में एक लाख 80 हजार से अधिक आरोग्य मंदिर स्थापित किये गये। इन केंद्रों के माध्यम से स्‍वास्‍थ्‍य सेवाएं केवल इलाज तक ही सीमित न रहकर प्राथमिक देखभाल, रोकथाम, गैर संचारी रोगों पर नियंत्रण और बुजुर्गों की देखभाल तक विस्तार ले चुकी हैं। नड्डा ने कहा कि आयुष्‍मान भारत डिजिटल मिशन के तहत अब तक लगभग 84 करोड़ 70 लाख आभा आईडी कार्ड बनाए जा चुके हैं। बड़ी संख्या में डिजिटल स्‍वास्‍थ्‍य रिकार्ड तैयार किया गया है। इससे स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं में पारदर्शिता आई है। उन्होंने कहा कि दवा और स्वास्थ्य देखभाल क्षेत्र आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और वैश्विक नेतृत्‍व के महत्वपूर्ण स्तंभ होंगे।

व्यापार समझौते में प्रधानमंत्री ने अमेरिका के सामने समर्पण किया: कांग्रेस

कांग्रेस ने अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौतों को लेकर मंगलवार को आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अमेरिका के सामने समर्पण कर दिया है। मुख्य विपक्षी दल ने सरकार से यह भी स्पष्ट करने की मांग की कि क्या वह भारत के कृषि क्षेत्र को अमेरिका के लिए पूरी तरह खोलने जा रही है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि सरकार को संसद को विश्वास में लेना चाहिए और दोनों सदनों के पटल पर इनके पूरे मसौदे रखे जाएं तथा इन पर व्यापक चर्चा होनी चाहिए। रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, एक साल पहले, प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रपति ट्रंप के दोबारा चुने जाने पर उन्हें बधाई देने के लिए व्हाइट हाउस पहुंचे थे। वहां उन्होंने अपनी मशहूर झप्पी कूटनीति का पूरा प्रदर्शन किया।

भारत-अमेरिका संबंध इससे पहले कभी इतने संभावनाओं से भरे नहीं लगे थे। उन्होंने कहा, इसके तुरंत बाद एक ट्रेड डील के लिए बातचीत शुरू हुई। लेकिन 10 मई, 2025 की शाम को राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा ऑपरेशन सिंदूर को रोकने की पहली घोषणा किए जाने के बाद से हालात बिगड़ने लगे। इसके बाद, राष्ट्रपति ट्रंप ने पाकिस्तान के साथ निकटता दिखाते हुए फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की गर्मजोशी से मेजबानी की, जिससे प्रधानमंत्री मोदी की खोखली झप्पी कूटनीति की पोल खुल गई।रमेश ने कहा, राष्ट्रपति ट्रंप ने भारतीय समयानुसार सोमवार देर रात व्यापार समझौते की घोषणा की।

राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा दी गई जानकारी से यह पूरी तरह स्पष्ट है कि प्रधानमंत्री मोदी ने, जैसा कि उन्होंने 10 मई 2025 को किया था, पूरी तरह समर्पण कर दिया है। उन्होंने निश्चित रूप से राष्ट्रपति ट्रंप को खुश करने की नीति अपनाई है। उन्होंने दावा किया कि इस दुर्भाग्यपूर्ण घटनाक्रम से भारत की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है। कांग्रेस नेता ने कहा, संसद का सत्र जारी है। यूरोपीय संघ और अमेरिका, दोनों के साथ हुए व्यापार समझौतों का मसौदा संसद के दोनों सदनों के पटल पर रखा जाना चाहिए और उन पर चर्चा होनी चाहिए, खासकर इसलिए क्योंकि अमेरिकी कृषि मंत्री ब्रूक रोलिन्स ने यह दावा करते हुए एक बयान जारी किया है कि भारत ने अमेरिका से कृषि आयात को उदार बनाया है।

प्रियंका गांधी ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, अमेरिका की ओर से कहा गया है, अमेरिकी कृषि उत्पाद अब भारतीय बाजार में बिकेंगे जिससे ग्रामीण अमेरिका में पैसा आएगा। इस डील से ट्रंप ने अमेरिकी किसानों के लिए फायदा सुनिश्चित किया है। उनका कहना था, भारत के करोड़ों किसान जानना चाहते हैं कि इस व्यापार समझौते की शर्तें क्या हैं? क्या मोदी सरकार भारतीय कृषि क्षेत्र को पूरी तरह अमेरिका के लिए खोलने जा रही है? क्या सरकार भारतीय किसानों को अमेरिकी कंपनियों के साथ सीधी प्रतिस्पर्धा में झोंकेगी? क्या हमारे किसानों के हितों से समझौता किया गया है? प्रियंका गांधी ने कहा कि जनता के सामने तत्काल स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए। कांग्रेस महासचिव रणदीप सुरजेवाला ने दावा किया कि अमेरिका के साथ व्यापार समझौते में देश के किसानों के साथ घातक विश्वासघात किया गया है और किसान को दौराहे पर ला खड़ा किया, जहां रोज़ी रोटी छीनने की बात है और आजीविका पर सीधे हमला है। उन्होंने आरोप लगाया, भारत की संप्रभुता से भी खिलवाड़ किया गया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से बातचीत के बाद कहा कि भारत और अमेरिका के बीच एक व्यापार समझौते पर सहमति बन गई है, जिसके तहत अमेरिका भारतीय वस्तुओं पर लगने वाला जवाबी शुल्क मौजूदा 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करेगा। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उन्हें इस बात की खुशी है कि अब ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों पर कम शुल्क लगेगा।

प्रधानमंत्री ‘कंप्रोमाइज्ड’ हैं, इसलिए दबाव में व्यापार समझौता किया: राहुल

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को ‘क्रप्रोमाइज्ड’ (दबाव में) किया जा चुका है, इसलिए उन्होंने अमेरिका के साथ व्यापार समझौता किया है। उन्होंने संसद परिसर में संवाददाताओं से बातचीत में यह दावा भी किया कि प्रधानमंत्री ने इस समझौते के माध्यम से देश को ‘बेच दिया है’ तथा इस बात से डरे हुए हैं कि उनकी ‘छवि का गुब्बारा’ कहीं फूट न जाए। राहुल गांधी ने कहा, किसी न किसी कारण नरेन्द्र मोदी जी ने उस समझौते पर हस्ताक्षर कर दिया…मोदी जी पर भयंकर दबाव है। मोदी जी को इस बात का डर है कि उनकी छवि का गुब्बारा फूट सकता है जो हजारों करोड़ रुपये खर्च करके बनाया गया।

उन्होंने दावा किया, मुख्य बात यह है कि प्रधानमंत्री को ‘कंप्रोमाइज्ड’ किया गया है। किसने किया है, कैसे किया है यह हिंदुस्तान की जनता को सोचना है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने कहा, हिंदुस्तान के किसानों को यह समझना चाहिए कि इस समझौते में आपकी मेहनत और खून-पसीने को नरेन्द्र मोदी जी ने बेच दिया है क्योंकि वह कंप्रोमाइज्ड हैं। उन्होंने सिर्फ आपको नहीं, देश को बेच दिया है। राहुल गांधी ने दावा किया कि उन्हें लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर लाए गए धन्यवाद प्रस्ताव पर बोलने नहीं दिया जा रहा है।

दिल्ली हाईकोर्ट का मेट्रो केबल चोरी के आरोपी ‘गिग वर्कर’ को जमानत देने से इनकार

दिल्ली उच्च न्यायालय ने मेट्रो लाइन से 32 मीटर तांबे का तार चुराने के आरोपी एक ‘गिग वर्कर’ को जमानत देने से इनकार कर दिया है। न्यायालय ने टिप्पणी की कि उसने जनता के जीवन से खिलवाड़ किया और सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाया। न्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी ने कहा कि आरोपी ने केवल कुछ मूर्खतापूर्ण हरकतें” ही नहीं कीं, बल्कि उसके कार्यों ने जनता के जीवन और संपत्ति को पूरी तरह से खतरे में डाल दिया।जमानत याचिका खारिज करते हुए न्यायाधीश ने कहा कि आरोपी आदतन अपराधी है। न्यायालय ने 31 जनवरी को दिए आदेश में कहा, जमानत देते समय इस न्यायालय को सार्वजनिक हित और निजी हित के बीच संतुलन बनाए रखना होगा। याचिकाकर्ता आम जनता के जीवन से खिलवाड़ करने का दोषी है।

न्यायालय ने कहा, इस मामले में आवेदक द्वारा कथित रूप से किए गए अपराध का समाज पर व्यापक प्रभाव पड़ता है, खासकर इसलिए क्योंकि आवेदक ने सभी के जीवन को गंभीर खतरे में डाल दिया है। इसने कहा, आवेदक किसी मूर्खतापूर्ण हरकत का दोषी मात्र नहीं है, बल्कि उसने निस्संदेह सार्वजनिक खजाने को भारी नुकसान पहुंचाया है। उपर्युक्त सभी तथ्यों की अनदेखी नहीं की जा सकती। तथ्यात्मक और कानूनी रूप से उपर्युक्त सभी कारक अपने-आप में ही आवेदक को जमानत न देने के लिए पर्याप्त हैं।

दिल्ली पुलिस ने बताया कि आरोपी एक ‘फूड डिलीवरी ऐप’ के लिए डिलीवरी बॉय (कंपनी का प्रतिनिधि) का काम करता है। उसने बताया कि आरोपी को 29 और 30 जून 2025 की दरमियानी रात को 2:51 बजे ‘ट्रैक्शन पावर कंट्रोल’ द्वारा चोरी का मामला दर्ज कराए जाने के बाद पंजाबी बाग से तांबे के केबल के साथ पकड़ा गया। जुलाई 2025 में गिरफ्तारी के बाद से उसे न्यायिक हिरासत में रखा गया है। दिल्ली पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की थी। दिल्ली पुलिस ने जमानत याचिका का विरोध किया और अदालत को सूचित किया कि आरोपी एक आदतन अपराधी है जिसका आपराधिक इतिहास काफी गंभीर है।

धर्मांतरण रोधी कानूनों के खिलाफ दाखिल जनहित याचिका पर केंद्र और 12 राज्यों को नोटिस

उच्चतम न्यायालय ने धर्मांतरण रोधी कानूनों की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली ‘नेशनल काउंसिल ऑफ चर्चेज इन इंडिया’ (एनसीसीआई) की नयी याचिका पर सोमवार को केंद्र के साथ-साथ राजस्थान और अरुणाचल प्रदेश सहित 12 राज्यों को नोटिस जारी किया। एनसीसीआई द्वारा वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा के जरिये दाखिल इस जनहित याचिका में धर्मांतरण रोधी कानूनों के क्रियान्वयन पर तत्काल रोक लगाने का अनुरोध किया गया है। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने एनसीसीआई की दलीलों पर संज्ञान लेते हुए केंद्र तथा 12 राज्य सरकारों से चार सप्ताह के भीतर जवाब तलब किया।

प्रधान न्यायाधीश ने नयी जनहित याचिका को इसी मामले में दाखिल अन्य याचिकाओं के साथ संबद्ध करने का निर्देश देते हुए कहा कि तीन न्यायाधीशों की पीठ इन सभी पर एक साथ सुनवाई करेगी। केंद्र सरकार का पक्ष रखने के लिए पीठ के समक्ष उपस्थित हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि राज्य के कानूनों को चुनौती देने वाली इसी तरह की याचिकाएं लंबित हैं। उन्होंने कहा, ”हमारा जवाब तैयार है और जल्द ही दाखिल किया जाएगा। अरोड़ा ने दलील दी कि ओडिशा और राजस्थान ने भी अपने अलग-अलग कानून बनाए हैं जिन्हें पूर्व में दाखिल याचिकाओं में चुनौती नहीं दी गई है। उन्होंने कहा, ”अन्य अधिनियमों में भी संशोधन किया गया है जिन्हें चुनौती नहीं दी गई है। मैं सभी स्थायी अधिवक्ताओं को नोटिस देना चाहती हूं। पीठ ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा, ”नोटिस जारी करें।

प्रत्येक नोटिस की एक प्रति राज्यों के महाधिवक्ताओं को भी भेजी जाए। केंद्र और 12 राज्यों की ओर से चार सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल किया जाए। प्रतिवादी एक संयुक्त जवाबी हलफनामा दाखिल करें। मामले के महत्व के मद्देनजर इसे तीन न्यायाधीशों की पीठ के समक्ष प्रस्तुत किया जाए।”ईसाई निकाय का पक्ष रखने के लिए पेश हुईं अरोड़ा ने दलील दी कि कुछ राज्य कानून ऐसे हैं जो तथाकथित धर्मांतरण के खिलाफ ”सतर्कता समूहों को शिकायत करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं”, और इसलिए कई शिकायतें दर्ज की जा रही हैं। सॉलिसिटर जनरल ने इन दलीलों का विरोध करते हुए कहा कि ये कानून उच्चतम न्यायालय की पांच न्यायाधीशों की पीठ के फैसले के दायरे में आते हैं। केंद्र के अलावा, पीठ ने राजस्थान, उत्तर प्रदेश, ओडिशा, छत्तीसगढ़, अरुणाचल प्रदेश, गुजरात, झारखंड, उत्तराखंड, हरियाणा, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश को भी नोटिस जारी किए।

शीर्ष अदालत ने 16 सितंबर, 2025 को कई राज्यों द्वारा पारित धर्मांतरण रोधी कानूनों पर रोक लगाने का अनुरोध करने वाली याचिकाओं पर संबंधित राज्यों से जवाब तलब किया था। पीठ ने स्पष्ट किया था वह ऐसे कानूनों के संचालन पर रोक लगाने की प्रार्थना पर जवाब मिलने के बाद विचार करेगी।शीर्ष अदालत कई राज्यों द्वारा पारित धर्मांतरण रोधी कानूनों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। मामले में संवाद को सुव्यवस्थित करने के लिए शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता सृष्टि को और प्रतिवादी राज्यों की ओर से अधिवक्ता रुचिरा को नोडल अधिवक्ता नियुक्त किया है। इससे पहले, केंद्र ने अंतरधार्मिक विवाहों के कारण धर्मांतरण को विनियमित करने वाले विवादास्पद राज्य कानूनों को चुनौती देने में कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ के गैर सरकारी संगठन ‘सिटीजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस’ की ओर से याचिका दाखिल करने पर सवाल उठाया था।

राहुल पूर्व सेना प्रमुख के संस्मरण का हवाला देकर चीन का विषय उठाने पर अड़े, लोकसभा में गतिरोध

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोमवार को सदन में एक पूर्व सेना प्रमुख के संस्मरण के मसौदे के कुछ अंश का हवाला देकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पर निशाना साधने का प्रयास किया और इस पर सत्तापक्ष ने विरोध जताया, जिसके कारण सदन की कार्यवाही एक बार के स्थगन के बाद शाम चार बजे तक स्थगित कर दी गई। इस विषय पर सदन में सत्तापक्ष और कांग्रेस के सदस्यों के बीच तीखी नोकझोंक एवं हंगामा देखने को मिला।रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आरोप लगाया कि नेता प्रतिपक्ष की बातें पूरी तरह से काल्पनिक हैं और वह सदन को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं। सदन में गतिरोध बने रहने पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने पहले अपराह्न दो बजकर नौ मिनट पर सभा की बैठक अपराह्न तीन बजे तक के लिए स्थगित कर दी और फिर तीन बजकर आठ मिनट पर शाम चार बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस का कहना है कि नेता प्रतिपक्ष सदन में पूर्व सेना प्रमुख एम एम नरवणे की पुस्तक ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ के मसौदे के उस अंश को पढ़ना चाहते थे जिसमें 31 अगस्त, 2020 की एक घटना का उल्लेख है। यह संस्मरण अभी प्रकाशित नहीं हुआ है।लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कांग्रेस नेता से कई बार यह अपील की कि वह पुस्तक या किसी पत्रिका को सदन में उद्धृत नहीं कर सकते, हालांकि राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख का हवाला देते हुए चीन के साथ भारत के सैन्य तनाव का विषय उठाने का प्रयास किया और दावा किया कि पूर्व सेना प्रमुख ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के चरित्र के बारे में भी बताया है। राजनाथ सिंह ने राहुल गांधी पर सदन को गुमराह करने का प्रयास करने का आरोप लगाया। इस विषय पर कार्यवाही पहली बार स्थगित होने से पहले जब लोकसभा में गतिरोध जारी था तब प्रधानमंत्री मोदी भी सदन में मौजूद थे।

राहुल गांधी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर लाए गए धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में भाग लेते हुए अपने भाषण की शुरुआत में ही भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या के वक्तव्य का उल्लेख करते हुए पलटवार करने का प्रयास किया। उनका कहना था कि सूर्या ने कांग्रेस की देशभक्ति और चरित्र पर सवाल खड़े किए हैं, इसलिए वह एक पूर्व सेना प्रमुख के उस संस्मरण के अंश को पढ़ना चाहते हैं जो एक पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।उन्होंने जैसे ही इसे पढ़ने का प्रयास किया तो राजनाथ सिंह ने सवाल उठाया कि नेता प्रतिपक्ष को बताना चाहिए कि वह जिस पुस्तक का उल्लेख कर रहे हैं, वो प्रकाशित हुई है या नहीं। गृह मंत्री अमित शाह ने भी कहा कि सदन में पुस्तक और पत्रिका में प्रकाशित बातों को नहीं रखा जा सकता और नेता प्रतिपक्ष को व्यवस्था का पालन करना चाहिए।

बिरला ने राहुल गांधी से कई बार कहा कि वह राष्ट्रपति के अभिभाषण पर अपनी बात रखें।जब राहुल गांधी इस संस्मरण के कुछ अंश सदन के पटल पर रखने पर अड़े रहे तो बिरला ने कहा, ”आप लगातार आसन की अवमानना कर रहे हैं…। राहुल गांधी ने कहा कि वह आसन को चुनौती नहीं दे रहे हैं, बल्कि चीन के साथ भारत के रिश्ते के बारे में बात रखना चाहते हैं। सदन में लगातार गतिरोध बने रहने पर बिरला ने लोकसभा की बैठक अपराह्न दो बजकर नौ मिनट पर अपराह्न तीन बजे तक के लिए स्थगित कर दी। लोकसभा की बैठक पुन: शुरू होने पर नेता प्रतिपक्ष ने एक बार फिर इसी मुद्दे को रखने का प्रयास किया और कहा कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा विषय है।

कांग्रेस नेता की बातों का विरोध करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा, ”ये पूरी तरह काल्पनिक बातें हैं, नेता प्रतिपक्ष सदन को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं, उन्हें इस विषय पर बोले जाने से रोका जाए। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने कहा, आप (राहुल) देश को नीचा दिखाकर क्या कहना चाहते हैं…आप एक ऐसी बात कर रहे हैं जिसका कोई स्रोत नहीं है…आप ऐसी कोई बात मत बोलिए, जिससे सेना का मनोबल गिरे। बिरला ने राहुल गांधी से कहा, आप आसन की व्यवस्था की लगातार अवमानना कर रहे हैं, आपसे विनम्र आग्रह है कि व्यवस्था बनाए रखें…अगर हम सेना और सेना की कार्रवाइयों की आलोचना करेंगे तो यह उचित नहीं है। राहुल गांधी ने कहा कि जो हुआ है, उसके बारे में सेना के हर जवान को पता है, लेकिन सरकार इस बात को जनता से छिपाना चाहती है। सदन में गतिरोध जारी रहने पर लोकसभा अध्यक्ष ने तीन बजकर आठ मिनट पर सभा की कार्यवाही शाम चार बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

मनरेगा परिवर्तनकारी कानून था, जी राम जी अधिनियम खामियों से भरा है : कांग्रेस

कांग्रेस ने सोमवार को दावा किया कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) एक परिवर्तनकारी कानून था, जबकि मोदी सरकार द्वारा लाया गया ‘विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम’ खामियों से भरा हुआ है।पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पुरानी तस्वीर साझा कर दोनों कानूनों की तुलना की। यह तस्वीर आंध्र प्रदेश की एक महिला लाभार्थी को सबसे पहले मनरेगा जॉब कॉर्ड प्रदान किए जाने से संबंधित है।रमेश ने एक्स पर पोस्ट किया, “आज से ठीक 20 साल पहले, मनरेगा को आंध्र प्रदेश के अनंतपुर ज़िले के बदनापल्ली गांव में शुरू किया गया था। इन 20 वर्षों के दौरान, मनरेगा ने ग्रामीण परिवारों (विशेष रूप से महिलाओं) को 180 करोड़ कार्य-दिवस प्रदान किए, अनुमानित 10 करोड़ सामुदायिक परिसंपत्तियां तैयार कीं, पलायन को काफ़ी हद तक कम किया, ग्राम पंचायतों को सशक्त बनाया और ग्रामीण गरीबों की ज़्यादा मज़दूरी के लिए मोलभाव करने की शक्ति को निर्णायक रूप से बढ़ाया है।

उनका कहना है कि मनरेगा ने इसकी मज़दूरी को सीधे बैंक और डाकघर खातों में जमा करने के लिए प्रत्यक्ष अंतरण पहल की भी शुरुआत की।पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री ने कहा, “मनरेगा एक मांग-आधारित कानूनी गारंटी अधिनियम था, सिर्फ़ एक प्रशासनिक वादा नहीं था। यह संविधान के अनुच्छेद 41 से मिला हुआ एक अधिकार था। नागरिकों द्वारा मांग किए जाने पर काम आवंटित किया जाता था और ग्रामीण भारत में कहीं भी उपलब्ध कराया जाता था। परियोजनाओं का निर्णय स्थानीय ग्राम पंचायत करती थी, और कुल लागत का केवल 10 प्रतिशत वहन करने के कारण राज्य सरकार को बिना बड़े वित्तीय बोझ के काम उपलब्ध कराने के लिए प्रोत्साहन मिलता था।

“उन्होंने दावा किया कि मोदी सरकार का नया क़ानून केवल नई दिल्ली में केंद्रीकरण की गारंटी देता है।रमेश ने कहा, “अब काम कुछ चुनिंदा ज़िलों में मोदी सरकार द्वारा अधिसूचित किया जाएगा। काम नागरिकों की मांग के बजाय सरकार द्वारा आवंटित बजट के आधार पर दिया जाएगा। यह योजना हर साल दो महीनों के लिए यानी कृषि गतिविधियों के दौरान पूरी तरह बंद रहेगी जो श्रमिकों की मोलभाव करने की शक्ति के लिए एक बड़ा झटका है, क्योंकि वे कृषि कार्य के वास्ते बेहतर वेतन के लिए मोलभाव नहीं कर पाएंगे। पंचायत को हाशिए पर डाल दिया गया है और परियोजनाएं मोदी सरकार अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार तय करेगी। कांग्रेस नेता ने कहा, “अब राज्यों को लागत का 40 प्रतिशत वहन करना होगा, उनकी वित्तीय तंगी को देखते हुए वे ऐसा नहीं कर पाएंगे और काम देना ही बंद कर देंगे।”रमेश का कहना है कि मनरेगा एक परिवर्तनकारी क़ानून था, जबकि मोदी सरकार की नई योजना खामियों से भरी हुई है।

बजट में घोषित विश्वविद्यालय टाउनशिप में नरेला शिक्षा केंद्र को शामिल कराने की कोशिश करेंगे: सीएम गुप्ता

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि उनकी सरकार प्रस्तावित नरेला शिक्षा केंद्र को इस वर्ष के केंद्रीय बजट में घोषित पांच नयी विश्वविद्यालय टाउनशिप में शामिल कराने की कोशिश करेगी। गुप्ता ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि बजट ”संतुलित” है और इसने देश की महिलाओं तथा युवाओं सहित हर वर्ग एवं श्रेणी को अवसर प्रदान किए हैं। दिल्ली की मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले बजट में दिल्ली, पुडुचेरी के लिए पूंजीगत हस्तांतरण के वास्ते राज्यों को दी जाने वाली विशेष सहायता 6,275 करोड़ रुपये थी, जो 2026-27 के बजट में बढ़कर 15,380 करोड़ रुपये कर दी गई। उन्होंने कहा कि दिल्ली बजट प्रावधानों का अधिकतम लाभ उठाने की कोशिश करेगी।

उन्होंने कहा कि 2025-26 में केंद्र प्रायोजित योजनाओं के तहत 12,483 करोड़ रुपये के मुकाबले इस बार 13,611 करोड़ रुपये का आवंटन होने से दिल्ली को लाभ होगा।मुख्यमंत्री ने बजट में घोषित विभिन्न योजनाओं का भी उल्लेख किया, जिनमें हर जिले में बालिकाओं के लिए छात्रावास, स्वच्छ ऊर्जा प्रोत्साहन और दिल्ली में केंद्र सरकार के अस्पतालों के लिए बढ़ाई गई धनराशि शामिल है। उन्होंने कहा कि इससे शहर के लाखों लोगों को सीधे लाभ होगा। गुप्ता ने कहा कि दिल्ली-वाराणसी उच्च गति रेल गलियारे की घोषणा से राष्ट्रीय राजधानी में परिवहन बुनियादी ढांचे को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि दिल्ली बजट घोषणा का अधिकतम लाभ उठाने की कोशिश करेगी ताकि परिसरों में ‘कंटेंट क्रिएटर’ प्रयोगशालाएं खोली जा सकें और ‘एनिमेशन’, ‘विजुअल इफेक्ट्स’, ‘गेमिंग’ और ‘कॉमिक्स’ (एवीजीसी) क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए विद्यालयों और महाविद्यालयों को जोड़ा जा सके।

सीतारमण ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 53.47 लाख करोड़ रुपये का पेश किया बजट

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को 2026-27 के लिए 53.47 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया। यह 31 मार्च को समाप्त हुए चालू वित्त वर्ष 2025-26 की तुलना में 7.7 प्रतिशत अधिक है। संशोधित अनुमान के अनुसार, चालू वित्त वर्ष का बजट 49.64 लाख करोड़ रुपये है जो फरवरी, 2025 में अनुमानित 50.65 लाख करोड़ रुपये से कम है।वित्त वर्ष 2024-25 का बजट 46.52 लाख करोड़ रुपये का था। सरकार ने आगामी वित्त वर्ष में कुल व्यय 53.47 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया है। वित्त वर्ष 2026-27 में, गैर-ऋण प्राप्तियां और कुल व्यय क्रमशः 36.5 लाख करोड़ रुपये और 53.5 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है।

केंद्र सरकार की शुद्ध कर प्राप्तियां 28.7 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है।सीतारमण ने कहा, राजकोषीय घाटे के वित्तपोषण के लिए, दिनांकित प्रतिभूतियों से शुद्ध बाजार कर्ज 11.7 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है। शेष वित्तपोषण लघु बचत एवं अन्य स्रोतों से आने की उम्मीद है। सकल बाजार उधार 17.2 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है। उन्होंने बताया कि सरकार चालू वित्त वर्ष के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 4.4 प्रतिशत के राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को पूरा करेगी जैसा कि 2025-26 के बजट में अनुमान लगाया गया था। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में राजकोषीय घाटा (सकल घरेलू उत्पाद) जीडीपी का 4.3 प्रतिशत या 16.95 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है।

2026-27 के राजकोषीय घाटे को पूरा करने के लिए, दिनांकित प्रतिभूतियों से शुद्ध बाजार कर्ज लगभग 11.7 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है।शेष वित्तपोषण लघु बचत एवं अन्य स्रोतों से आने की उम्मीद है। कुल बाजार उधार लगभग 17.2 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है। बजट दस्तावेजों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 के लिए जीडीपी का अनुमान 393,00,393 करोड़ रुपये है जो एनएसओ (राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय) द्वारा जारी वित्त वर्ष 2025-26 के अग्रिम अनुमान 357,13,886 करोड़ रुपये से 10 प्रतिशत अधिक है। सीतारमण ने कहा कि सरकार सामाजिक आवश्यकताओं से समझौता किए बिना लगातार राजकोषीय प्रतिबद्धताओं को पूरा कर रही है। राजकोषीय प्रबंधन के स्वीकृत मानकों की ओर बढ़ने के लिए उन्होंने बजट 2025-26 में संकेत दिया था कि केंद्र सरकार 2030-31 तक ऋण-से-जीडीपी अनुपात को 50 (एक प्रतिशत ऊपर या नीचे) प्रतिशत तक लाने का लक्ष्य रखेगी। इस बीच, 2025-26 के लिए संशोधित अनुमान के अनुसार गैर-ऋण प्राप्तियां 34 लाख करोड़ रुपये आंकी गई हैं, जिसमें से केंद्र की शुद्ध कर प्राप्तियां 26.7 लाख करोड़ रुपये हैं। कुल व्यय का संशोधित अनुमान 49.6 लाख करोड़ रुपये है जिसमें से चालू वित्त वर्ष के दौरान पूंजीगत व्यय लगभग 11 लाख करोड़ रुपये है।

एमएसएमई को ”चैंपियन” बनाने के लिए 10,000 करोड़ रुपये के कोष, अन्य उपायों की बजट घोषणा

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को कहा कि सरकार सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) को ‘चैंपियन’ बनाने के लिए तीन-आयामी रणनीति अपना रही है जिसमें 10,000 करोड़ रुपये का एक समर्पित कोष भी शामिल है।सीतारमण ने संसद में वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश करते हुए कहा कि मोदी सरकार ने रोजगार सृजन, उत्पादकता बढ़ाने और आर्थिक वृद्धि तेज करने के लिए व्यापक सुधार किए हैं। उन्होंने कहा कि बजट की रीति-नीति तीन कर्तव्यों पर आधारित है जिसमें आर्थिक वृद्धि को तेज और स्थायी बनाना, आकांक्षाओं को पूरा करना और क्षमता निर्माण तथा सबका साथ, सबका विकास। एमएसएमई को सशक्त बनाने के लिए वित्त मंत्री ने इक्विटी समर्थन, नगदी समर्थन और पेशेवर समर्थन पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि इक्विटी समर्थन के तहत 10,000 करोड़ रुपये के एसएमई विकास कोष के माध्यम से चुनिंदा मानदंडों के आधार पर उद्यमों को प्रोत्साहित किया जाएगा।उन्होंने कहा कि एमएसएमई को तरलता समर्थन के लिए ट्रेड्स मंच की पूरी क्षमता का इस्तेमाल किया जाएगा। इसमें केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों (सीपीएसई) द्वारा सभी एमएसएमई खरीदारी का लेनदेन ट्रेड्स मंच पर करना, सीजीटीएमएसई के माध्यम से ऋण गारंटी प्रदान करना और जीईएम को कारोबार के साथ जोड़कर वित्तपोषण को तेज और सस्ता बनाना शामिल है। इसके साथ ही सीतारमण ने 2021 में गठित ‘आत्मनिर्भर भारत कोष’ में 2,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि डालने की घोषणा की ताकि सूक्ष्म उद्यमों को जोखिम पूंजी उपलब्ध रहे।पेशेवर समर्थन के तहत आईसीएआई, आईसीएसआई और आईसीएमएआई जैसी पेशेवर संस्थाओं को संक्षिप्त मॉड्यूलर पाठ्यक्रम तैयार करने और दूसरे एवं तीसरे दर्जे के शहरों में ‘कॉरपोरेट मित्र’ का एक कैडर तैयार करने के लिए व्यावहारिक साधन विकसित किए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि इस पेशेवर समर्थन से एमएसएमई को किफायती दरों पर अनुपालन शर्तों पर खरा उतरने में मदद मिलेगी। सीतारमण ने कहा कि इन पहलों के जरिये एमएसएमई की विकास क्षमता बढ़ाई जाएगी और उन्हें भविष्य के ‘चैंपियन’ बनने का अवसर मिलेगा। वित्त मंत्रालय की तरफ से जारी एक दस्तावेज के मुताबिक, संशोधित एवं अद्यतन आयकर रिटर्न दाखिल करने की समय-सीमा बढ़ाए जाने से एमएसएमई को किसी दंडात्मक कार्रवाई के डर के बगैर अपनी त्रुटियां सुधारने का अवसर मिलेगा। वहीं, श्रम-बहुल एमएसएमई को लाभ पहुंचाने के लिए जनशक्ति आपूर्ति से जुड़े टीडीएस (स्रोत पर कर कटौती) प्रावधानों को भी सरल बनाया जाएगा। इसके अलावा, प्रक्रियागत चूकों पर दंड के स्थान पर शुल्क लगाने का प्रावधान करने से विवादपरक मुकदमेबाजी में कमी आएगी और भरोसे पर आधारित अनुपालन व्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।