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कांग्रेस, आप को अंकिता भंडारी हत्याकांड से दुष्यंत गौतम को जोड़ने वाले पोस्ट हटाने का हाईकोर्ट का निर्देश

दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को कांग्रेस और आम आदमी पार्टी को भाजपा नेता दुष्यंत कुमार गौतम को 2022 के अंकिता भंडारी हत्याकांड मामले से जोड़ने वाले सोशल मीडिया पोस्ट को 24 घंटे के भीतर हटाने का निर्देश दिया। न्यायमूर्ति मिनी पुष्करणा ने गौतम द्वारा दायर मानहानि के मामले पर अंतरिम आदेश देते हुए दोनों राजनीतिक दलों को हत्या के मामले में भाजपा के राष्ट्रीय सचिव को कथित ”वीआईपी” के तौर पर दर्शाने वाली कोई भी सामग्री पोस्ट करने पर भी रोक लगाई। अदालत ने उर्मिला सनावर और उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी सहित अन्य व्यक्तियों और संस्थाओं के खिलाफ भी अंतरिम आदेश पारित किया।

न्यायमूर्ति पुष्करणा ने कहा कि यदि “मानहानिकारक” सामग्री पर रोक लगाने का अंतरिम आदेश पारित नहीं किया गया तो गौतम को अपूरणीय क्षति होगी। न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि यदि 24 घंटे के भीतर सामग्री को नहीं हटाया गया, तो सोशल मीडिया मंच नियमों के अनुसार उसे हटा देगा। पौड़ी जिले के वनंतरा रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में कार्यरत 19 वर्षीय भंडारी की 2022 में हत्या कर दी गई थी। रिसॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य और दो कर्मचारियों, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को बाद में गिरफ्तार किया गया और सत्र अदालत ने उन्हें इस अपराध के लिए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। हाल ही में अभिनेत्री उर्मिला सनावर ने एक ऑडियो क्लिप जारी किया जिसमें कथित तौर पर एक ‘वीआईपी’ का जिक्र किया गया है, जिसका इस मामले से संबंध है। सनावर पूर्व विधायक सुरेश राठौर की पत्नी होने का दावा करती हैं।

वन अधिनियम में हुए संशोधनों ने वन प्रबंधन के निजीकरण के लिए रास्ते खोल दिए: कांग्रेस

कांग्रेस ने बुधवार को आरोप लगाया कि वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 में नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा किए गए संशोधनों ने वन प्रबंधन के निजीकरण के लिए रास्ते खोल दिए। पार्टी महासचिव और पूर्व पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के एक परिपत्र का हवाला देते हुए ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, अगस्त 2023 में मोदी सरकार ने संसद के माध्यम से वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 में संशोधन किया था।

इस कानून का नाम बदलकर वन (संरक्षण एवं संवर्धन) अधिनियम, 1980 करने के अलावा, इन संशोधनों ने देश में वनों के प्रशासन के लिए कानूनी व्यवस्था में दूरगामी बदलाव किए थे। उन्होंने कहा, उसी समय यह कहा गया था कि संशोधनों ने वन प्रबंधन के निजीकरण का द्वार खोल दिया है। रमेश के अनुसार, बिल्कुल यही हुआ है जैसा कि 2 जनवरी, 2026 को केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा जारी परिपत्र से पता चलता है। उन्होंने कहा, यह तो एक शुरूआत है।

दिल्ली सरकार ने पेयजल में प्रदूषण को रोकने के लिए सख्त निगरानी के दिए आदेश

राष्ट्रीय राजधानी में पेयजल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राज्य के जल मंत्री प्रवेश वर्मा ने दल्लिी जल बोर्ड (डीजेबी) को शहर की जलापूर्ति प्रणाली के निरीक्षण और निगरानी को तेज करने के सख्त निर्देश जारी किए हैं। आधिकारिक निर्देश के अनुसार, डीजेबी को प्रदूषण की किसी भी संभावना को रोकने के लिए तत्काल और निरंतर उपाय करने का निर्देश दिया गया है, विशेष रूप से उन संवेदनशील क्षेत्रों में जहां पानी की पाइपलाइनें, सीवर लाइनों के करीब हैं। आदेश में कहा गया है, दिल्ली जल बोर्ड स्थापित मानदंडों के अनुसार जल आपूर्ति पाइपलाइनों का नियमित निरीक्षण कर रहा है और जल गुणवत्ता की निगरानी कर रहा है। इस मुद्दे की गंभीरता पर जोर देते हुए हालांकि मंत्री ने अधिकारियों को जन स्वास्थ्य की सुरक्षा के प्रयासों को बढ़ाने का निर्देश दिया।

प्रमुख निर्देशों में से एक यह है कि दिल्ली जल बोर्ड को सभी जल आपूर्ति पाइपलाइनों का नियमित निरीक्षण तेज करना होगा, विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जहां पेयजल लाइनें सीवर लाइनों के पास बिछी हैं, ताकि किसी भी रिसाव, क्षति या पानी दूषित के संभावित बिंदुओं का तुरंत पता लगाकर उनकी मरम्मत की जा सके। मंत्री ने उपचार संयंत्रों से लेकर वितरण क्षेत्रों और उपभोक्ता केंद्रों तक, सभी स्तरों पर निर्धारित मानकों के अनुसार बार-बार नमूने लेकर और परीक्षण करके जल गुणवत्ता निगरानी को मजबूत करने का भी आदेश दिया है। जनता की शिकायतों का शीघ्र निपटान अनिवार्य कर दिया गया है। निर्देश के अनुसार, बोर्ड के अधिकारियों को जल गुणवत्ता, गंध, स्वाद या रंग परिवर्तन से संबंधित जनता की शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी, जिसमें मौके पर जाकर सत्यापन और सुधारात्मक कार्रवाई जल्द से जल्द करना शामिल है।

इसके अतिरिक्त, पाइपलाइन नेटवर्क के कमजोर या पुराने हिस्सों की पहचान करने के लिए आवधिक बुनियादी ढांचा ऑडिट का आदेश दिया गया है, ताकि पीने योग्य पानी की आपूर्ति में अनुपचारित या बाहरी दूषित पदार्थों के मिश्रण को रोकने के लिए प्राथमिकता के आधार पर मरम्मत या प्रतिस्थापन किया जा सके। आदेश में उच्च घनत्व वाले और संवेदनशील क्षेत्रों में 24 घंटे निगरानी और रखरखाव के लिए समर्पित टीमों की तैनाती का भी आह्वान किया गया है। उन्होंने निर्देश दिया, इन कार्रवाइयों को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाना चाहिए और इनकी कड़ी निगरानी की जानी चाहिए। इसमें यह भी जोड़ा गया है कि दिल्ली जल बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी स्वयं निरीक्षण, शिकायत निवारण और जल गुणवत्ता परीक्षण परिणामों की समीक्षा करेंगे। यह कदम शहर के कई हिस्सों में जल गुणवत्ता को लेकर बढ़ती सार्वजनिक चिंताओं के बीच उठाया गया है।

भगवान सोमनाथ से सबसे अधिक नफरत पंडित नेहरू को थी: भाजपा

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बुधवार को कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सोमनाथ मंदिर को अतीत में महमूद गजनी और अलाउद्दीन खिलजी ने लूटा था, लेकिन स्वतंत्र भारत में देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को भगवान सोमनाथ से सबसे अधिक नफरत थी। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने ‘एक्स’ पर सिलसिलेवार पोस्ट कर आरोप लगाया कि नेहरू अपनी तुष्टीकरण की अंधी राजनीति के कारण स्वतंत्रता के बाद सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण नहीं चाहते थे, जिसके अनुसरण में उन्होंने मुगल आक्रांताओं का महिमामंडन करने से भी परहेज नहीं किया।

भाजपा के राज्यसभा सदस्य ने प्रथम प्रधानमंत्री के पत्रों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि नेहरू ने पाकिस्तानी दुष्प्रचार का सामना करने या भारत की सभ्यतागत स्मृति का बचाव करने के बजाय, हिंदू धर्म के ऐतिहासिक प्रतीकों को कम महत्व देकर पाकिस्तान को ”खुश” करने का विकल्प चुना और ”आंतरिक आत्मविश्वास के बजाय बाहरी तुष्टीकरण” को प्राथमिकता दी। त्रिवेदी ने कहा, ”अतीत में सोमनाथ को महमूद गजनी और खिलजी ने लूटा था, लेकिन आजाद भारत में पंडित नेहरू को भगवान सोमनाथ से सबसे अधिक नफरत थी।” उन्होंने कहा कि इसका सबसे ”उल्लेखनीय उदाहरण” पंडित नेहरू द्वारा 21 अप्रैल, 1951 को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री लियाकत अली खान को लिखा गया पत्र है।

भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि नेहरू ने खान को ”प्रिय नवाबजादा” कहकर संबोधित किया और सोमनाथ मंदिर के दरवाजों की कहानी को ”पूरी तरह से झूठा” बताया। उन्होंने कहा, ”पंडित नेहरू ने एक तरह से लियाकत अली खान के सामने आत्मसमर्पण करते हुए लिखा कि सोमनाथ मंदिर के निर्माण जैसा कुछ भी नहीं हो रहा।” त्रिवेदी ने पूछा, ”आखिर पंडित नेहरू को लियाकत अली खान से ऐसा क्या डर था कि उन्हें सोमनाथ मंदिर के बारे में पत्र लिखना पड़ा? यह तुष्टीकरण की अंधी राजनीति और मुगल आक्रांताओं का महिमामंडन करने के अलावा और क्या था?

दिल्ली में अतिक्रमण हटाओ अभियान के बाद तुर्कमान गेट पर दुकानें बंद, सड़कों पर तनाव

दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके के पास बुधवार को संकरी गलियों में दुकानें बंद, गिरे हुए स्कूटर, टूटी टाइलें और पत्थर बिखरे पड़े दिखाई दिये। अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान हुई हिंसा के बाद इलाके में तनाव का माहौल और भारी सुरक्षा बल तैनात है। फैज-ए-इलाही मस्जिद और पास के कब्रिस्तान से सटी जमीन पर अतिक्रमण हटाने के अभियान के दौरान कुछ लोगों ने पुलिस पर कथित रूप से पथराव किया और कांच की बोतलें फेंकीं, जिसमें कम से कम पांच पुलिसकर्मी घायल हो गए। छतों से और लोहे के बंद दरवाजों के पीछे से लोग इलाके भर में तैनात सुरक्षाकर्मियों पर चिल्लाते हुए देखे गए। बच्चे भी बालकनियों व दरवाजों के पीछे से चीखते और रुमाल लहराते हुए नीचे का दृश्य देख रहे थे लेकिन पुलिस की भारी मौजूदगी के कारण अधिकांश निवासी अपने घरों के अंदर ही रहे।

सड़क किनारे से बच्चे टूटी हुई छड़ें व ढीले तार उठाते हुए और अभियान के बाद बचे मलबे को सावधानीपूर्वक हटाते हुए भी देखे गए। सड़कें लगभग खाली थीं लेकिन उन पर हिंसा के निशान स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे थे, जिनमें कई जगहों पर क्षतिग्रस्त टाइलें, टूटे हुए कांच और पत्थर बिखरे पड़े थे। मस्जिद से सटी गलियों में दिल्ली पुलिस के अतिरिक्त बल तैनात किए गए हैं और किसी भी प्रकार की झड़प को रोकने के लिए कई स्थानों पर कर्मियों को तैनात किया गया था। प्रमुख प्रवेश द्वारों पर अवरोधक लगाए गए हैं और सभी नागरिकों की आवाजाही प्रतिबंधित कर दी गई है। केवल पुलिस और दिल्ली नगर निगम के वाहनों को ही क्षेत्र से गुजरने की अनुमति है। सुरक्षाकर्मी लगातार गलियों में गश्त कर रहे हैं और इलाके को खाली करा रहे हैं। वहीं कई लोगों को पुलिस की गाड़ियों में बिठाकर इलाके से ले जाते हुए भी देखा गया।

इलाके की अधिकांश दुकानें बंद रहीं, जिससे कड़ी सुरक्षा व्यवस्था वाले इस क्षेत्र में सन्नाटा पसरा हुआ था। एक स्थानीय दुकानदार ने बताया कि उसने एहतियात के तौर पर अपनी दुकान बंद रखी। उसने सड़क पर बिखरे मलबे की ओर इशारा करते हुए कहा, “हमने सब कुछ बंद कर दिया और अंदर ही रहे।” एक अन्य स्थानीय निवासी ने बताया कि वह इस इलाके में 50-60 वर्षों से रह रहा है और उसने मस्जिद से सटी जमीन को कब्रिस्तान जैसा बताया। उसने कहा, “यह जगह और कुछ नहीं है। मैंने वर्षों से यहां लोगों को दफनाते देखा है।” निवासी ने बताया कि कई लोग इस दृश्य को देखकर निराश थे। उसने कहा,“कब्रिस्तान के साथ जो हुआ उससे लोग नाराज हैं।” एक स्थानीय ऑटो चालक ने बताया कि मंगलवार को यह अफवाह फैल गई थी कि मस्जिद को गिराया जा रहा है।

उन्होंने कहा, “वास्तव में, केवल दुकानें और अन्य ढांचे जैसी अवैध इमारतें ही हटाई गईं।” ऑटो चालक ने कहा कि गलत सूचना के कारण अचानक अफरा-तफरी मच गई। उन्होंने कहा, “कल (मंगलवार को) हालात बहुत बिगड़ गए थे लेकिन अब स्थिति थोड़ी शांत है।” एक अधिकारी ने बताया कि बुधवार को अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गयी और दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्देशों पर चलाए जा रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान हुई हिंसा के संबंध में कई लोगों को हिरासत में लिया गया। लगभग 30 बुलडोजर और 50 डंपर तैनात किए गए, साथ ही 300 से अधिक नगर निगम कर्मचारी और अधिकारी अदालत द्वारा अवैध घोषित अतिक्रमणों को हटाने में लगे हुए हैं।

अभियान शुरू होने से पहले ही लगभग 100 . 150 लोग घटनास्थल पर जमा हो गए और पुलिस से भिड़ गए। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया और बताया कि प्रदर्शनकारियों पर हल्का बल प्रयोग किया। पुलिस के मुताबिक, पथराव की घटना में शामिल लोगों की पहचान करने की प्रक्रिया जारी है और इस बात की जांच की जा रही है कि हिंसा अचानक हुई थी या पूर्व नियोजित थी। वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज और सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो का विश्लेषण किया जा रहा है। साथ ही जांच के तहत गवाहों और हिरासत में लिए गए व्यक्तियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।

नष्ट करने के प्रयासों के बावजूद भारतीय भाषाएँ समय की कसौटी पर खरी उतरीं : धर्मेंद्र प्रधान

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मंगलवार को कहा कि भारतीय भाषाएं एकता की शक्ति हैं और नष्ट किए जाने के प्रयासों के बावजूद ये समय की कसौटी पर खरी उतरी हैं। प्रधान ने यह बात भारतीय शास्त्रीय भाषाओं में 55 पुस्तकों का विमोचन करते हुए कही, जिनमें सांकेतिक भाषा में तिरुक्कुरल की व्याख्या भी शामिल है। उन्होंने कहा, ”हमारी भाषाएँ एकता की शक्ति हैं। भारतीय भाषाएँ समय की कसौटी पर खरी उतरी हैं, भले ही उन्हें नष्ट करने के प्रयास किए गए हों। भारत लोकतंत्र की जननी है और साथ ही भाषाई विविधता से समृद्ध देश भी है। यह हमारा दायित्व है कि हम अपनी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक संपदा का संरक्षण करें और आने वाली पीढ़ियों को इसके बारे में जागरूक करें।” मंत्री ने उल्लेख किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस बात पर जोर दिया है कि सभी भारतीय भाषाएं राष्ट्रीय भाषाएं हैं।

प्रधान ने शास्त्रीय भाषाओं-कन्नड़, तेलुगु, मलयालम और ओडिया के उत्कृष्टता केंद्रों द्वारा विकसित 41 साहित्यिक कृतियों का विमोचन किया। मंत्री ने केंद्रीय शास्त्रीय तमिल संस्थान (सीआईसीटी) की 13 पुस्तकों के साथ-साथ तिरुक्कुरल की सांकेतिक भाषा में व्याख्या करने वाली 45 कड़ियों की एक श्रृंखला का भी विमोचन किया। उन्होंने कहा, ”कन्नड़, तेलुगु, मलयालम, ओडिया, तमिल और सांकेतिक भाषा में ये साहित्यिक कृतियाँ भारत की भाषाई विरासत को शिक्षा, अनुसंधान और सांस्कृतिक गौरव के केंद्र में रखने के हमारे व्यापक राष्ट्रीय प्रयास का एक हिस्सा हैं।” प्रधान ने कहा, ”अनुसूचित भाषाओं की सूची में और अधिक भाषाओं को शामिल करने से लेकर भारतीय भाषाओं में शास्त्रीय ग्रंथों के अनुवाद और भारतीय भाषाओं में शिक्षा को प्रोत्साहित करने तक, हमारी सरकार ने सभी भारतीय भाषाओं को मजबूत करने और बढ़ावा देने के लिए व्यापक रूप से कार्य किया है।

सोनिया गांधी सर गंगा राम अस्पताल में भर्ती

कांग्रेस नेता सोनिया गांधी को यहां सर गंगा राम अस्पताल में भर्ती कराया गया है। सूत्रों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। सूत्रों के अनुसार, उनकी हालत ठीक है और उन्हें छाती रोग विशेषज्ञ की निगरानी में रखा गया है। अस्पताल के एक सूत्र ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि नियमित जांच के तहत उन्हें भर्ती कराया गया है। उन्होंने बताया कि कांग्रेस नेता को काफी समय से खांसी की समस्या है और वह समय-समय पर, खासकर शहर में प्रदूषण के कारण जांच के लिए आती रहती हैं। सूत्र ने बताया कि सोनिया गांधी को सोमवार शाम अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सोनिया गांधी ने दिसंबर 2025 में ही अपना 79वां जन्मदिन मनाया था।

केजरीवाल के ‘कुत्तों की गिनती’ वाले दावे पर शिक्षा मंत्री ने साधा निशाना, माफी की मांग की

दिल्ली के शिक्षा मंत्री ने मंगलवार को पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर आवारा कुत्तों की गणना के लिए सरकारी स्कूल के शिक्षकों की तैनाती के संबंध में “गलत और भ्रामक बयान” देने का आरोप लगाया और उनसे सार्वजनिक रूप से माफी की मांग की। केजरीवाल को लिखे एक पत्र में मंत्री आशीष सूद ने कहा, “आपने सार्वजनिक रूप से आरोप लगाया है कि शिक्षकों को आवारा कुत्तों की गिनती से संबंधित ड्यूटी सौंपी जा रही है। ये दावे न केवल गलत हैं, बल्कि तथ्यों को गंभीर रूप से तोड़-मरोड़ कर पेश करने के समान हैं।” उन्होंने कहा कि इस संबंध में शासकीय परिपत्र पहले से ही सार्वजनिक है। इस मामले पर आम आदमी पार्टी (आप) की ओर से फिलहाल कोई तत्काल प्रतिक्रिया नहीं आई है।

केजरीवाल के प्रशासनिक अनुभव का हवाला देते हुए मंत्री ने कहा, “प्रशासन में आपकी पृष्ठभूमि और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री होने के नाते, आपके बयानों को केवल गलतफहमी नहीं माना जा सकता।” परिपत्र में कहा गया है कि इसके बजाय ये टिप्पणियां “इस महत्वपूर्ण सुरक्षा पहल के सुचारू कार्यान्वयन को पटरी से उतारने के लिए जानबूझकर किए गए प्रयास का हिस्सा” प्रतीत होती हैं। शिक्षा मंत्री ने ‘आप’ को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि वे ‘आरोप लगाओ और भाग जाओ’ वाली राजनीति कर रहे हैं, जहां बिना किसी आधार के सनसनी फैलाई जाती है और फिर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया जाता है।” मंत्री ने कहा, “राजनीति की यह शैली अनावश्यक उथल-पुथल पैदा करती है, जनता के विश्वास को कम करती है और शासन में बाधा डालती है।” जवाबदेही की मांग करते हुए मंत्री ने केजरीवाल से “गलत सूचना फैलाने के लिए दिल्ली की जनता से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने” का आग्रह किया।

दिल्ली हाईकोर्ट ने आईआरसीटीसी घोटाला मामले में तेजस्वी की याचिका पर सीबीआई से जवाब मांगा

दिल्ली उच्च न्यायालय ने आईआरसीटीसी कथित घोटाला मामले में आरोप तय किए जाने के आदेश के खिलाफ दायर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी यादव की याचिका पर मंगलवार को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जवाब मांगा। न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने तेजस्वी की याचिका और मुकदमे पर रोक के आवेदन पर जवाब दाखिल करने के लिए सीबीआई को नोटिस जारी किया और मामले की अगली सुनवाई के लिए 14 जनवरी की तारीख तय की। इसी दिन उनके पिता लालू प्रसाद यादव की ऐसी ही याचिका पर भी सुनवाई की जाएगी।

निचली अदालत ने 13 अक्टूबर, 2025 को आरोपी व्यक्तियों – लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी यादव और 11 अन्य के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के तहत और आपराधिक साजिश के साथ साथ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धाराओं में आरोप तय किए थे। तेजस्वी और पूर्व रेल मंत्री लालू ने इस मामले में निचली अदालत के आदेश को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय का रुख किया है। यह मामला भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) के दो होटलों के परिचालन अनुबंध एक निजी कंपनी को देने में कथित अनियमितताओं से संबंधित है।

लालू यादव के अलावा, अदालत ने प्रदीप कुमार गोयल, राकेश सक्सेना, भूपेंद्र कुमार अग्रवाल, राकेश कुमार गोगिया और विनोद कुमार अस्थाना के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(2) के साथ धारा 13(1)(डी)(दो) और (तीन) के तहत आरोप तय किए थे। धारा 13 (2) किसी लोक सेवक द्वारा आपराधिक कदाचार के लिए दंड से संबंधित है, तथा धारा 13 (1) (डी) (दो) और (तीन) किसी लोक सेवक द्वारा पक्षपात के लिए पद का दुरुपयोग करने से संबंधित है। अदालत ने लालू प्रसाद, राबड़ी देवी, तेजस्वी, मेसर्स लारा प्रोजेक्ट्स एलएलपी, विजय कोचर, विनय कोचर, सरला गुप्ता और प्रेम चंद गुप्ता के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 420 (धोखाधड़ी) के तहत आरोप तय करने का निर्देश दिया था। अदालत ने कहा था, “सभी (14) आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 120बी (आपराधिक षड्यंत्र) और आईपीसी की धारा 420 तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(2) और धारा 13(1)(डी)(दो) और (तीन) के तहत एक समान आरोप तय करने का निर्देश दिया जाता है।” भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत अधिकतम सजा 10 साल है, जबकि धोखाधड़ी के मामले में सात साल तक की सजा हो सकती है।

दिल्ली को दंगों की आग में झोंकने वालों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए: रेखा गुप्ता

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 2020 के दिल्ली दंगों की साजिश के मामले में कार्यकर्ताओं– उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार करने के उच्चतम न्यायालय के फैसले का सोमवार को स्वागत करते हुए कहा कि शहर को दंगों की आग में धकेलने के लिए जिम्मेदार लोगों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। उच्चतम न्यायालय ने 2020 के दिल्ली दंगों की साजिश से जुड़े मामले के आरोपियों– उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से सोमवार को इनकार कर दिया लेकिन ”भागीदारी के स्तर” का हवाला देते हुए पांच अन्य को जमानत दे दी ।

न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति एन. वी. अंजारिया की पीठ ने कहा कि खालिद और इमाम के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत प्रथम दृष्टया मामला बनता है। गुप्ता ने यहां ‘पीटीआई-वीडियो’ से कहा, ”हम अदालत के फैसले का स्वागत करते हैं। अदालत ने दिल्ली दंगों के मामले में आरोपियों– शरजील इमाम और उमर खालिद की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। दिल्ली को दंगों की आग में झोंकने वालों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।” उन्होंने कहा कि दंगों में शामिल लोगों का समर्थन करने वाली राजनीतिक पार्टियों के लिए कड़ा संदेश जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वे ”अपराध में भागीदार” थीं।

दिल्ली के कानून मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के फैसले ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि दंगे एक ”सुनियोजित साजिश” का नतीजा थे। उन्होंने कहा, ”दिल्ली की जनता के खिलाफ जानबूझकर साजिश रची गई थी। आज के फैसले ने एक बार फिर इसे साबित कर दिया है।” उन्होंने कहा कि इस फैसले से स्पष्ट संदेश मिलता है कि ऐसी साजिशों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दिल्ली के गृह मंत्री आशीष सूद ने कहा कि अदालत का यह आदेश देश के खिलाफ काम करने वालों के लिए एक मिसाल बनेगा। सूद ने कहा,“सरकार का विरोध करना गलत नहीं है, लेकिन देश का विरोध करना अलग बात है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कुछ लोग देश के खिलाफ काम करने के आरोपियों के प्रति सहानुभूति दिखाते हैं।” दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि दंगाइयों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने कड़ा संदेश देने के लिए उच्चतम न्यायालय का आभार व्यक्त किया। फरवरी 2020 में उत्तरपूर्वी दिल्ली में हुए दंगों में 53 लोग मारे गए थे और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे।