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इस साल रामलीला आयोजन अधिक भव्य और बेहतर होगा: रेखा गुप्ता

नई दिल्ली। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने रविवार को कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में इस साल रामलीला आयोजन अधिक भव्य और बेहतर होगा। लव कुश रामलीला समिति के भूमि पूजन समारोह में शामिल हुईं मुख्यमंत्री ने कहा कि इस साल समारोह पिछले वर्षों की तुलना में अधिक भव्य और बेहतर होंगे। उन्होंने कहा, ”रामलीला समितियों ने हमसे अपनी समस्याएं साझा की थीं और मैं आपको भरोसा दिलाती हूं कि इस साल ये समस्याएं नहीं आएंगी। हमने सभी तरह की अनुमतियों के लिए एकल खिड़की मंजूरी व्यवस्था लागू की है।

वाहन का उपयोग ‘सार्वजनिक स्थान’ पर ना होने पर मोटर वाहन कर नहीं लगाया जाना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि मोटर वाहन कर की प्रकृति प्रतिपूरक है और अगर किसी वाहन का उपयोग नहीं किया जाता है या ‘सार्वजनिक स्थान’ पर इसका इस्तेमाल नहीं हो रहा है, तो उसके मालिक पर मोटर वाहन कर का बोझ नहीं डाला जाना चाहिए। न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के दिसंबर 2024 के फैसले को चुनौती देने वाली अपील पर अपना फैसला सुनाया। न्यायालय ने कहा, ”मोटर वाहन कर की प्रकृति प्रतिपूरक है। इसका उपयोग से सीधा संबंध है। मोटर वाहन कर लगाने का तर्क यह है कि जो व्यक्ति सार्वजनिक अवसंरचना, जैसे सड़क, राजमार्ग आदि का उपयोग कर रहा है, उसे ऐसे उपयोग के लिए भुगतान करना होगा।” आंध्र प्रदेश मोटर वाहन कराधान अधिनियम, 1963 की धारा 3 का हवाला देते हुए पीठ ने कहा कि विधायिका ने इस प्रावधान में जानबूझकर ‘सार्वजनिक स्थान’ शब्द का उपयोग किया है।

अधिनियम की धारा 3 मोटर वाहनों पर कर लगाने से संबंधित है। शीर्ष अदालत ने 29 अगस्त को दिए अपने फैसले में कहा, “यदि किसी मोटर वाहन का उपयोग ‘सार्वजनिक स्थान’ पर नहीं किया जाता है तो संबंधित व्यक्ति को सार्वजनिक बुनियादी ढांचे से लाभ नहीं मिल रहा है; इसलिए उस पर ऐसी अवधि के लिए मोटर वाहन कर का बोझ नहीं डाला जाना चाहिए।” शीर्ष अदालत ने कहा कि इस मामले में अपीलकर्ता कंपनी के मोटर वाहन राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड (आरआईएनएल) परिसर के अंदर उपयोग के लिए सीमित थे, जो एक बंद क्षेत्र है, ऐसे में वाहनों को ‘सार्वजनिक स्थान’ पर इस्तेमाल किए जाने का सवाल ही नहीं उठता।

दिल्ली हाईकोर्ट ने पूर्व पीएफआई अध्यक्ष अबू बकर के स्वास्थ्य पर तिहाड़ से रिपोर्ट मांगी

नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने आतंकवाद विरोधी कानून गैर कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत दर्ज एक मामले में गिरफ्तार प्रतिबंधित पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के पूर्व अध्यक्ष ई. अबूबकर की स्वास्थ्य की स्थिति पर तिहाड़ जेल अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है। न्यायमूर्ति रवींद्र डुडेजा ने 29 अगस्त को अबूबकर द्वारा दायर एक अर्जी पर यह आदेश पारित किया, जिसमें उन्होंने एक निजी अस्पताल में इलाज की अनुमति देने का अनुरोध किया था। वह वर्तमान में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में इलाज करा रहे हैं। संगठन के खिलाफ बड़े पैमाने पर की गई कार्रवाई के दौरान राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने 2022 में अबूबकर को गिरफ्तार किया था। न्यायाधीश ने एनआईए को भी नोटिस जारी किया और 26 नवंबर तक जवाब मांगा, जब मामले की अगली सुनवाई होगी।

आवेदक ने दलील दी कि उसे एम्स में संतोषजनक उपचार नहीं मिल रहा है और कर्मचारियों का व्यवहार उसके प्रति कथित रूप से शत्रुतापूर्ण है। उसने यह भी दलील दी कि वह खर्च वहन करने को तैयार है। एनआईए ने अर्जी का विरोध करते हुए दावा किया कि वह पहले से ही देश के सर्वश्रेष्ठ अस्पताल में इलाज करा रहा है। वकी कील ने पूछा, ”उसे और क्या चाहिए?” उच्चतम न्यायालय ने इस साल की शुरुआत में मेडिकल रिपोर्ट देखने के बाद अबूबकर को इस मामले में चिकित्सा आधार पर जमानत देने से इनकार कर दिया था। उसने यह दलील भी खारिज कर दी कि अगर याचिकाकर्ता को जमानत पर रिहा नहीं किया गया तो उसे नजरबंद रखा जा सकता है। उच्च न्यायालय ने पिछले साल 28 मई को अबूबकर की जमानत याचिका खारिज कर दी थी।

क्या ‘न्यू नॉर्मल’ चीनी आक्रामकता एवं हमारी सरकार की कायरता से परिभाषित किया जाना चाहिए: कांग्रेस

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच रविवार को मुलाकात के बाद कांग्रेस ने केंद्र पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि क्या ”न्यू नॉर्मल” (नयी सामान्य स्थिति) चीन की आक्रामकता और ”सरकार की कायरता” से परिभाषित किया जाना चाहिए। कांग्रेस ने सवाल किया कि क्या प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार का चीन के साथ सुलह पर जोर देना वास्तव में उसकी क्षेत्रीय आक्रामकता को वैध ठहरा रहा है। मोदी ने तियानजिन में चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ अपनी बैठक में कहा कि भारत आपसी विश्वास, सम्मान और संवेदनशीलता के आधार पर चीन के साथ अपने संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

कांग्रेस महासचिव एवं संचार प्रभारी जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ”आज प्रधानमंत्री मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच हुई मुलाकात का आकलन निम्नलिखित संदर्भों में किया जाना चाहिए- जून 2020 में गलवान घाटी में चीनी आक्रामकता के चलते हमारे 20 सबसे बहादुर जवानों ने अपनी जान की कुर्बानी दी। इसके बावजूद, 19 जून 2020 को प्रधानमंत्री मोदी ने चीन को कायराना तरीके से (कुख्यात) क्लीन चिट दे दी।” उन्होंने कहा कि सेना प्रमुख ने लद्दाख में चीन के साथ सीमा पर यथास्थिति की पूर्ण बहाली की मांग की थी। रमेश ने कहा, ”लेकिन इसे हासिल करने में विफल रहने के बावजूद मोदी सरकार ने चीन के साथ सुलह की दिशा में कदम बढ़ाए जिससे चीन की उस क्षेत्र में आक्रामकता को अप्रत्यक्ष रूप से वैधता मिल गई।’

‘ उन्होंने कहा कि चार जुलाई, 2025 को उप-सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राहुल सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के साथ चीन की ‘जुगलबंदी’ पर जोरदार और स्पष्ट रूप से बात की थी। रमेश ने कहा, ”मगर इस अशुभ गठजोड़ पर ठोस प्रतिक्रिया देने के बजाय मोदी सरकार ने इसे नियति मानकर चुपचाप स्वीकार कर लिया और अब चीन को राजकीय दौरों से पुरस्कृत कर रही है।” उन्होंने कहा कि चीन ने यारलुंग त्संगपो पर एक विशाल जलविद्युत परियोजना की घोषणा की है जिसके ”हमारे उत्तर-पूर्वी राज्यों पर बेहद गंभीर प्रभाव पड़ेंगे लेकिन मोदी सरकार की तरफ से इस मुद्दे पर एक शब्द भी नहीं बोला गया।” रमेश ने दावा किया कि चीन से आयात की अनियंत्रित ‘डंपिंग’ जारी है, जिसने हमारी एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु, मध्यम उद्यम) इकाइयों को बुरी तरह प्रभावित किया है। ‘डंपिंग’ का अर्थ होता है कि निर्माता द्वारा किसी उत्पाद को सामान्य मूल्य से कम कीमत पर दूसरे देश को निर्यात करना जिससे उस देश को नुकसान होता है। रमेश ने कहा, ”अन्य देशों की तरह सख्त कदम उठाने के बजाय भारत ने चीनी आयातकों को लगभग खुली छूट दे दी है।” उन्होंने कहा, ”क्या ‘न्यू नॉर्मल’ चीनी आक्रामकता और हमारी सरकार की कायरता से परिभाषित किया जाना चाहिए?

बलात्कार मामले में कलंक अपराधी पर लगना चाहिए, पीड़िता पर नहीं : दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली उच्च न्यायालय ने बलात्कार के आरोपी एक व्यक्ति की इस दलील को ”घृणित” करार दिया कि उसके खिलाफ दुष्कर्म का मुकदमा रद्द करना नाबालिग पीड़िता के हित में होगा, जिसे अन्यथा ”कलंक” का सामना करना पड़ेगा। न्यायमूर्ति गिरीश कठपालिया ने 29 अगस्त को पारित फैसले में कहा कि कलंक गलत कृत्य की शिकार पीड़िता पर नहीं, बल्कि गलत काम करने वाले पर लगना चाहिए। इसी के साथ उन्होंने आरोपी की याचिका खारिज करते हुए उस पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगा दिया। न्यायमूर्ति कठपालिया ने कहा, ”याचिकाकर्ता के वकील की दलील है कि वर्तमान कार्यवाही को रद्द करना अभियोक्ता के हित में होगा, अन्यथा उसे कलंक का सामना करना पड़ेगा। मैं इस दलील को घृणित मानता हूं।

उन्होंने कहा, ”कलंक गलत कृत्य की शिकार पीड़िता पर नहीं, बल्कि गलत काम करने वाले अपराधी पर लगना चाहिए। समाज की मानसिकता में आमूल-चूल बदलाव लाना होगा। कलंक बलात्कार जैसी भयावह पीड़ा झेलने वाली लड़की पर नहीं, बल्कि अपराधी पर लगाना होगा।” उच्च न्यायालय ने आरोपी के खिलाफ बलात्कार की कार्यवाही रद्द करने से इनकार करते हुए उसे दिल्ली उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति के पास 10,000 रुपये जमा कराने का निर्देश दिया। अदालत ने आरोपी के वकील की इस दलील को खारिज कर दिया कि पीड़िता के माता-पिता ने उसके साथ मामला ”सुलझा” लिया है। इसने कहा, ”यह दलील भी पूरी तरह से बेबुनियाद है, क्योंकि याचिकाकर्ता (आरोपी) के कथित कृत्य के कारण नाबालिग लड़की के साथ अन्याय हुआ है और उसे कष्ट झेलना पड़ा है, न कि उसके माता-पिता को।

न्यायमूर्ति कठपालिया ने कहा, ”केवल अभियोजन पक्ष ही आरोपी को माफ कर सकता है, वह भी कुछ विशिष्ट परिस्थितियों में। जैसा कि ऊपर जिक्र किया गया है, अभियोजन पक्ष अब भी नाबालिग लड़की है।” साल 2024 में दर्ज प्राथमिकी के मुताबिक, आरोपी ने लड़की का अश्लील वीडियो बनाकर उसे शारीरिक संबंध बनाने के लिए मजबूर किया। मामले में उस पर यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के प्रावधानों के तहत आरोप लगाए गए हैं।

दिल्ली सरकार 11 जिलों की सीमाओं को एमसीडी जोन के बराबर बनाएगी: मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शनिवार को घोषणा की कि उनकी सरकार राष्ट्रीय राजधानी के 11 जिलों की सीमाओं को एमसीडी जोन के ”समतुल्य” बनाएगी। उनकी इस घोषणा को सुशासन की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। गुप्ता ने कहा कि इस कदम से अधिकारियों के बीच अधिकार क्षेत्र को लेकर स्पष्टता आएगी और सीमा संबंधी मुद्दे दूर होंगे, जिससे सरकार की विकास एवं जन कल्याणकारी पहलों के सुचारू कार्यान्वयन का मार्ग प्रशस्त होगा। उत्तर दिल्ली जिला विकास समिति के अध्यक्ष के कार्यालय का उद्घाटन करते हुए गुप्ता ने कहा कि सरकार 11 जिलों की सीमाओं को दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के 12 जोन के बराबर करने जा रही है, ताकि कामकाज को सुव्यवस्थित किया जा सके और अधिकारियों के बीच उनके अधिकार क्षेत्र से जुड़ी जिम्मेदारियों को लेकर स्पष्टता कायम हो सके।

मुख्यमंत्री ने कहा, ”दिल्ली सरकार ने पहले दिन से ही जिलाधिकारी कार्यालयों को कर्मचारी और वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराकर उन्हें मजबूत बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। दिल्ली में सुशासन प्रदान करने की हमारी योजना में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है।” उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार ने दो स्तरीय ढांचा स्थापित किया है, जिसमें राज्य स्तर पर शीर्ष समिति और 11 जिला विकास समितियां शामिल हैं। गुप्ता ने कहा, ”हमारा लक्ष्य दिल्ली में सुशासन लाना है और सभी 11 जिलों में लघु सचिवालय स्थापित करना है, ताकि लोग बिना किसी झिझक के वहां जा सकें और अपनी समस्याओं का समाधान करा सकें।” जिला विकास समितियों का उद्देश्य निर्णय लेने में विकेंद्रीकरण को प्रोत्साहित करना और एक उत्तरदायी एवं जिम्मेदार प्रशासन उपलब्ध कराना है। इन समितियों में क्षेत्र के निर्वाचित प्रतिनिधि (विधायक और नगर पार्षद), रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन, जिलाधिकारी और विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी शामिल होते हैं।

विपक्ष शासित राज्यों ने जीएसटी दरों में कटौती और स्लैब की संख्या घटाने के प्रस्ताव का समर्थन किया : रमेश

नई दिल्ली। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने शनिवार को कहा कि विपक्ष शासित आठ राज्यों ने माल एवं सेवा कर (जीएसटी) की दरों और स्लैब की संख्या कम करने के प्रस्ताव का समर्थन किया है, लेकिन उनकी कुछ मांगें भी हैं। केंद्र ने प्रस्ताव दिया है कि जीएसटी को पांच प्रतिशत और 18 प्रतिशत दर वाली दो स्तरीय कर संरचना बनाया जाए। इसके अलावा अहितकर और विलासिता वाली कुछ चुनिंदा वस्तुओं के लिए 40 प्रतिशत की दर प्रस्तावित की गई है। रमेश ने एक्स पर पोस्ट किया, “विपक्ष शासित आठ राज्यों (कर्नाटक, केरल, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, झारखंड) ने बड़े पैमाने पर उपभोग की वस्तुओं के लिए जीएसटी दरों में कटौती और जीएसटी स्लैब की संख्या कम करने के प्रस्ताव का समर्थन किया है। हालांकि, उन्होंने इसके साथ कुछ महत्वपूर्ण मांगें भी रखी हैं।

कांग्रेस नेता ने कहा कि विपक्ष शासित राज्यों की एक मांग यह भी कहा कि एक ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जो सुनिश्चित करे कि दरों में कटौती का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंच सके। उन्होंने कहा, “वर्षों तक सभी राज्यों को मुआवज़ा दिया जाए, जिसमें 2024/25 को आधार वर्ष माना जाए, क्योंकि दरों में कटौती से राज्यों की राजस्व आय पर प्रतिकूल असर पड़ना तय है।” रमेश के अनुसार, विपक्ष शासित राज्यों की मांग है कि ‘सिन गुड्स’ और विलासिता वस्तुओं पर प्रस्तावित 40 प्रतिशत से ऊपर अतिरिक्त शुल्क लगाए जाएं और उससे होने वाली पूरी आय राज्यों को हस्तांतरित की जाए क्योंकि वर्तमान में केंद्र सरकार अपनी कुल आय का लगभग 17-18 प्रतिशत विभिन्न उपकरों से प्राप्त करती है, जिन्हें राज्यों के साथ साझा नहीं किया जाता। उन्होंने कहा, “इन मांगों को पूर्णतया उचित माना जा रहा है, और इन्हें हाल ही में केंद्रीय वित्त मंत्रालय के राष्ट्रीय लोक वित्त एवं नीति संस्थान द्वारा प्रकाशित शोध-पत्रों का भी समर्थन प्राप्त है।

भाजपा देश को घुसपैठियों से मुक्त करने के अपने वादे को पूरा करेगी : अमित शाह

गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)देश को घुसपैठियों से मुक्त करने का अपना वादा पूरा करेगी। शाह ने असम के पहले गैर-कांग्रेसी मुख्यमंत्री गोलाप बोरबोरा की जन्म शताब्दी पर गुवाहाटी में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा स्वतंत्रता दिवस के भाषण में घोषित केंद्र का उच्च स्तरीय जनसांख्यिकी मिशन देश के जनसांख्यिकीय स्वरूप का अध्ययन करने और घुसपैठियों की पहचान करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। उन्होंने कहा, ”हमने असम से वादा किया था, लेकिन हम 10 वर्षों में इसे पूरा नहीं कर पाए। लेकिन हम अपना वादा निभाएंगे और असम तथा पूरे देश को अवैध विदेशियों से मुक्त बनाएंगे।” शाह ने कहा,”मैं उन लोगों में से हूं जो मानते हैं कि हमारे देश में एक भी घुसपैठिया नहीं रहना चाहिए।

केंद्रीय गृहमंत्री ने याद किया कि कैसे मार्च 1978 से सितंबर 1979 तक राज्य में जनता पार्टी की सरकार का नेतृत्व करने वाले बोरबोरा ने मंगलदाई लोकसभा सीट के लिए उपचुनाव की आवश्यकता पड़ने पर मतदाता सूची को शुद्ध करने का अभियान चलाया था। उन्होंने कहा, ”कम्प्यूटरीकृत मतदाता सूची नहीं होने के बावजूद बोरबोरा सरकार ने 36,780 अवैध विदेशियों के नामों का पता लगाया और मतदाता सूची के इस शुद्धिकरण को असम आंदोलन की शुरुआत माना जा सकता है।” अमित शाह ने कहा, ” निर्वाचन आयोग अब विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के जरिए मतदाता सूची की सफाई कर रहा है, लेकिन कुछ दल इसका विरोध कर रहे हैं। यह आज की राजनीति में नैतिक पतन को दर्शाता है।” उन्होंने दावा किया कि यदि बोरबोरा जीवित होते तो वह एसआईआर की प्रक्रिया का विरोध करने वाले इन दलों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते।

शाह ने घुसपैठियों के खिलाफ कार्रवाई, विशेषकर अतिक्रमण हटाने के लिए राज्य सरकार की सराहना की। केंद्रीय गृह मंत्री ने कट्टर समाजवादी नेता बोरबोरा को सम्मानित करने के लिए मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा और उनकी सरकार की सराहना की, जिनका भाजपा से कोई संबंध नहीं था। शाह ने कहा कि सभी के योगदान को मान्यता देना मोदी सरकार की विशेषता है। उन्होंने कहा,”प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा गुजरात में सरदार पटेल की प्रतिमा बनवाए जाने तक उनके योगदान को भुला दिया गया था। नेताजी (सुभाष चंद्र बोस) का कर्तव्य पथ पर प्रतिमा स्थापित किये जाने से पहले दिल्ली में उनका कोई स्मारक नहीं था।” केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि गोलाप बोरबोरा का कार्यकाल भले ही छोटा था, लेकिन उन्होंने असम के पहले गैर-कांग्रेसी मुख्यमंत्री के रूप में अमिट छाप छोड़ी। उन्होंने कहा, ”दसवीं कक्षा तक मुफ्त शिक्षा, 10 बीघा तक की जमीन के लिए लगान माफी, गुवाहाटी में पासपोर्ट कार्यालय खोलना और राज्य में बैंकिंग और रेलवे भर्ती बोर्ड की स्थापना उनकी (बोरबोरा) सरकार के उल्लेखनीय फैसलों में से हैं।

क्या केंद्र अवैध प्रवासियों को रोकने के लिए अमेरिका की तरह सीमा पर दीवार बनाना चाहता है? : सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को केंद्र से पूछा कि क्या वह अवैध प्रवासियों को देश में प्रवेश करने से रोकने के लिए अमेरिका की तरह सीमा पर दीवार बनाना चाहता है। शीर्ष अदालत ने कहा कि बांग्ला और पंजाबी भाषी भारतीयों की पड़ोसी देशों के साथ साझा ”सांस्कृतिक और भाषाई विरासत” है और वे एक ही भाषा बोलते हैं लेकिन सीमाओं द्वारा विभाजित हैं। न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने केंद्र से कहा कि वह अवैध प्रवासियों को खासकर बांग्लादेश में वापस भेजने में सरकारों द्वारा अपनाई गई मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) के बारे में उसे अवगत कराए। शीर्ष अदालत ने इस मामले में गुजरात सरकार को भी पक्षकार बनाया है। केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पश्चिम बंगाल प्रवासी कल्याण बोर्ड द्वारा दायर याचिका पर आपत्ति जताई, जिसमें बांग्लादेशी नागरिक होने के संदेह में बांग्ला भाषी प्रवासी श्रमिकों को हिरासत में लेने का आरोप लगाया गया है और कहा कि कोई भी पीड़ित पक्ष अदालत के समक्ष उपस्थित नहीं हुआ। उन्होंने कहा, ”इस अदालत को इन संगठनों और संघों द्वारा दायर याचिकाओं पर विचार नहीं करना चाहिए, जिन्हें कुछ राज्य सरकारों का समर्थन प्राप्त हो सकता है।

अदालत के समक्ष कोई पीड़ित पक्ष नहीं है। हम जानते हैं कि कुछ राज्य सरकारें अवैध प्रवासियों के बल पर कैसे फूलती-फलती हैं। जनसांख्यिकीय परिवर्तन एक गंभीर मुद्दा बन गया है।” पीठ ने मेहता से कहा कि पीड़ित लोग संसाधनों के अभाव में शायद उच्चतम न्यायालय तक पहुंचने में असमर्थ हैं। मेहता ने याचिकाकर्ता बोर्ड और अन्य गैर सरकारी संगठनों की ओर से पेश हुए वकील प्रशांत भूषण का जिक्र करते हुए कहा कि ”जन हितैषी व्यक्तियों” को अदालत का दरवाजा खटखटाने में उनकी मदद करनी चाहिए और साथ ही अमेरिका में लोगों की मदद करनी चाहिए, जहां अवैध आव्रजन का मुद्दा बड़ा है। न्यायमूर्ति बागची ने बाद में मेहता से पूछा, ”क्या आप अवैध शरणार्थियों को भारत में प्रवेश करने से रोकने के लिए अमेरिका की तरह सीमा पर दीवार बनाना चाहते हैं?” इस पर मेहता ने कहा, ”बिल्कुल नहीं, लेकिन कोई व्यक्तिगत शिकायतकर्ता नहीं है। भारत सरकार याचिका में लगाए गए अस्पष्ट आरोपों का जवाब कैसे दे सकती है। कोई व्यक्ति आकर कहे कि मुझे बाहर निकाला जा रहा है। हम यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहे हैं कि शरणार्थी हमारे संसाधनों पर कब्जा न कर लें।

हम मीडिया में आयी खबरों पर भरोसा नहीं कर सकते। ऐसे एजेंट हैं जो देश में अवैध प्रवेश में मदद करते हैं।” न्यायमूर्ति बागची ने तब मेहता से कहा, ”राष्ट्रीय सुरक्षा, राष्ट्र की अखंडता और जैसा कि आपने कहा, हमारे संसाधनों के संरक्षण के प्रश्न हैं। साथ ही, यह याद रखने की जरूरत है कि हमारी साझा विरासत है और (पश्चिम) बंगाल और पंजाब में भाषा एक ही है और सीमाएं देश को विभाजित करती हैं। हम चाहते हैं कि केंद्र इस मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट करे।” भूषण ने आरोप लगाया कि बांग्ला भाषी लोगों को उठाकर जबरदस्ती बांग्लादेश में भेजा जा रहा है। इससे पहले सुनवाई के दौरान भूषण ने पीठ को बताया कि 14 अगस्त को न्यायालय द्वारा नौ राज्यों को नोटिस जारी किए जाने के बावजूद जवाब दाखिल नहीं किए गए।

उन्होंने बांग्लादेश में हिरासत में ली गई एक गर्भवती महिला के परिवार के सदस्यों द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की ओर इशारा किया और कहा कि कलकत्ता उच्च न्यायालय ने मामले को स्थगित कर दिया है, क्योंकि मामला यहां लंबित है। पीठ ने उच्च न्यायालय से मामले पर शीघ्र सुनवाई करने का आग्रह किया और स्पष्ट किया कि इन कार्यवाहियों का लंबित रहना उच्च न्यायालय द्वारा बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर निर्णय लेने में बाधा नहीं बनेगा। शीर्ष अदालत ने 14 अगस्त को कथित बांग्लादेशी नागरिकों की हिरासत के संबंध में जनहित याचिका पर कोई अंतरिम आदेश पारित करने से इनकार कर दिया है। जनहित याचिका में कहा गया है, ”यह याचिका प्रवासी श्रमिकों की ऐसी हिरासत की वैधता को चुनौती देती है, विशेष रूप से गृह मंत्रालय के दो मई 2025 के पत्र के आलोक में, जो संदिग्ध अवैध प्रवासियों के अंतर-राज्यीय सत्यापन और हिरासत को अधिकृत करता है।

‘वोटर अधिकार यात्रा’ को मिले जनसमर्थन से घबराकर राहुल के बारे में झूठ फैला रहे हैं शाह, कांग्रेस का गृहमंत्री पर पलटवार

नई दिल्ली। कांग्रेस ने शुक्रवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर पलटवार करते हुए कहा कि बिहार में ‘वोटर अधिकार यात्रा’ को मिल रहे जनसमर्थन से घबराकर वह राहुल गांधी के बारे में झूठ फैला रहे हैं। शाह ने असम में कहा कि बिहार में कांग्रेस नेता राहुल गांधी को उनकी ‘वोटर अधिकार यात्रा’ के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी दिवंगत मां के लिए कहे गए ‘अपशब्दों’ के लिए माफी मांगनी चाहिए। इसको लेकर रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”केंद्रीय गृह मंत्री, दुर्भावनापूर्ण तरीके से बदनाम करने और ध्यान भटकाने की कला में माहिर माने जाते हैं।

बिहार में कांग्रेस की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ को मिल रहे जबरदस्त जनसमर्थन से घबराए, असहज और बौखलाए गृह मंत्री अब राहुल गांधी और अन्य नेताओं के बारे में झूठ फैलाने में लगे हुए हैं।” दरअसल, एक वीडियो सामने आया था जिसमें एक व्यक्ति दरभंगा में यात्रा के दौरान बनाए गए मंच से प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल करता हुआ दिखाई दे रहा है। इसी स्थान से राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा और राजद नेता तेजस्वी यादव मोटरसाइकिल से मुजफ्फरपुर के लिए रवाना हुए थे।