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भारत में वायु प्रदूषण का संकट सरकार की नीतिगत विफलता का परिणाम है : कांग्रेस

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार पर वायु प्रदूषण से निपटने में ‘खराब नीति-निर्माण’ का आरोप लगाते हुए कांग्रेस ने रविवार को मांग की कि आगामी केंद्रीय बजट में इस ‘गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट’ से निपटने के लिए देश के स्थानीय निकायों, राज्य सरकारों और केंद्र को संसाधन संपन्न बनाने का मार्ग प्रशस्त किया जाना चाहिए। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि एक अध्ययन से पता चला है कि देश में होने वाली सभी मौतों में से 7.2 प्रतिशत वायु प्रदूषण से जुड़ी हैं और हर साल सिर्फ 10 शहरों में लगभग 34,000 लोगों की मौत इससे होती है। उन्होंने एक बयान में कहा कि दिल्ली में ‘सेंटर फॉर साइंस एंड एनवॉयरमेंट’ द्वारा किए गए एक नए अध्ययन में राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) का मूल्यांकन किया गया है और इस सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट को पैदा करने वाली नीतिगत अव्यवस्था को उजागर किया है।

रमेश ने कहा, ”एनसीएपी का वर्तमान बजट लगभग 10,500 करोड़ रुपये है – जो 131 शहरों में फैला हुआ है। इसमें 15वें वित्त आयोग का अनुदान भी शामिल है। इसलिए इस कार्यक्रम के लिए बहुत कम धन उपलब्ध है – और फिर भी, इस अल्प राशि में से केवल 64 फीसदी धन का ही इस्तेमाल किया गया है।” उन्होंने आरोप लगाया कि ”खराब नीति-निर्माण” ने उपलब्ध संसाधनों को गलत दिशा में ले जाने का काम किया है। कांग्रेस नेता ने कहा कि एनसीएपी का प्रदर्शन मूल्यांकन और हस्तक्षेप – पीएम 10 (10 माइक्रोमीटर या उससे कम व्यास वाले कणों) पर अधिक केंद्रित है, बजाय पीएम 2.5 (2.5 माइक्रोमीटर या उससे कम व्यास के कण) के, जो कहीं अधिक खतरनाक होते हैं। रमेश ने बताया कि उपयोग किए गए कोष का 64 प्रतिशत हिस्सा सड़क की धूल को कम करने पर खर्च किया गया, जबकि उद्योगों (कोष का 0.61 फीसदी), वाहनों (कोष का 12.63 प्रतिशत) और बायोमास जलाने (कोष का 14-51 फीसदी) से होने वाले दहन-संबंधी उत्सर्जन को नियंत्रित करने पर इतनी राशित खर्च नहीं की गई। उन्होंने कहा कि ये उत्सर्जन मानव स्वास्थ्य के लिए कहीं अधिक खतरनाक हैं।

उन्होंने कहा कि एनसीएपी के अंतर्गत आने वाले 131 शहरों में से अधिकतर के पास वायु प्रदूषण संबंधी कोई आंकड़े नहीं हैं। रमेश ने कहा, कि जिन 46 शहरों के पास आंकड़े हैं, उनमें से केवल आठ शहर ही एनसीएपी के निम्न लक्ष्य को प्राप्त कर पाए हैं, जबकि 22 शहरों में वायु प्रदूषण की स्थिति और भी बदतर हो गयी है। कांग्रेस महासचिव ने कहा, ”सरकार को आगे बढ़ने के लिए स्पष्ट कदम उठाने चाहिए। वायु प्रदूषण (नियंत्रण और रोकथाम) अधिनियम 1981 में अस्तित्व में आया, और राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानक (एनएएक्यूएस) को नवंबर 2009 में लागू किया गया। हालांकि, पिछले दशक में, वायु प्रदूषण के सार्वजनिक स्वास्थ्य परिणाम अस्वस्थता और मृत्यु दर के संबंध में बहुत स्पष्ट हो गए हैं।” उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि वायु प्रदूषण (नियंत्रण और रोकथाम) अधिनियम और एनएएक्यूएस पर पुनर्विचार किया जाए और उन्हें पूरी तरह से नया स्वरूप दिया जाए। उन्होंने कहा, ”हमारे शहरों को कम से कम 10-20 गुना अधिक धन की आवश्यकता है – एनसीएपी को 25,000 करोड़ रुपये का कार्यक्रम बनाया जाना चाहिए। एनसीएपी को प्रदर्शन के लिए पीएम 2.5 के स्तर को मापने का पैमाना बनाना चाहिए।

एनसीएपी को उत्सर्जन के मुख्य स्रोतों पर नजर रखना चाहिये जिसमें ठोस ईंधन का जलना, वाहनों से होने वाला उत्सर्जन और औद्योगिक उत्सर्जन शामिल हैं।” उन्होंने तर्क दिया, ”एनसीएपी को कानूनी समर्थन, एक प्रवर्तन तंत्र और हर भारतीय शहर के लिए गंभीर डेटा निगरानी क्षमता दी जानी चाहिए।” उन्होंने कहा, “कोयला बिजली संयंत्रों के लिए वायु प्रदूषण मानदंड तुरंत लागू किए जाने चाहिए।” केंद्रीय पर्यावरण मंत्री रह चुके रमेश ने मांग की कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण की स्वतंत्रता बहाल की जानी चाहिए और पिछले 10 वर्षों में किए गए ”जनविरोधी पर्यावरण कानून संशोधनों” को वापस लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ”आगामी केंद्रीय बजट में देश के स्थानीय निकायों, राज्य सरकारों और केंद्र सरकार को इस गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट से निपटने के लिए संसाधन और उपकरण उपलब्ध कराने का मार्ग प्रशस्त किया जाना चाहिए।” अपने बयान साझा करते हुये रमेश ने ‘एक्स’ पर कहा, ”भारत का वायु प्रदूषण संकट नीतिगत विफलता का परिणाम है।

आप सांसद संजय सिंह ने भाजपा पर लगाया केजरीवाल की सेहत से ‘खिलवाड़’ करने का आरोप

आम आदमी पार्टी (आप) के राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तिहाड़ जेल में बंद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के स्वास्थ्य के साथ ”खिलवाड़” करने का रविवार को आरोप लगाया। सिंह ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि केजरीवाल की जांच रिपोर्ट से पता चलता है कि उन्हें कभी भी कुछ भी हो सकता है। सिंह ने कहा, ”भाजपा केजरीवाल के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। पहले वे कह रहे थे कि वह (केजरीवाल) मिठाई खा रहे हैं और शर्करा का स्तर बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अब उनका (भाजपा) कहना है कि उन्होंने (केजरीवाल) खाना कम कर दिया है। कोई ऐसा क्यों करेगा और अपनी जान जोखिम में क्यों डालेगा।” उन्होंने कहा, ”केजरीवाल को जान से मारने की साजिश रची गई है।’

आम आदमी पार्टी (आप) ने शनिवार को उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना के उस पत्र की आलोचना की, जिसमें कथित तौर पर कहा गया है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ”जानबूझकर” खुद को बीमार कर रहे हैं। पार्टी ने भाजपा पर केजरीवाल की ”हत्या की साजिश” रचने का आरोप लगाया। उपराज्यपाल सक्सेना ने आरोप लगाया है कि न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल में बंद मुख्यमंत्री केजरीवाल उन्हें दी जा रही भोजन की चिकित्सकीय खुराक और दवाएं संभवत: जानबूझकर नहीं ले रहे। उपराज्यपाल ने मुख्य सचिव नरेश कुमार को लिखे पत्र में केजरीवाल के स्वास्थ्य की स्थिति के बारे में जेल अधीक्षक की रिपोर्ट का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री द्वारा ”जानबूझकर कम कैलोरी लिए जाने” के कई उदाहरण हैं, जबकि उन्हें घर का बना खाना पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराया जा रहा है। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि केजरीवाल ने सात जुलाई को रात्रि भोजन से पहले इंसुलिन लेने से इनकार कर दिया था।

दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव ”हाइब्रिड” सुनवाई के लिए 387 करोड़ रुपये शीघ्र मंजूर करें: हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव को राष्ट्रीय राजधानी में 691 अधीनस्थ अदालतों में ‘हाइब्रिड’ सुनवाई को सुगम बनाने तथा इस परियोजना को प्राथमिकता के आधार पर लागू करने के वास्ते 387 करोड़ रुपये शीघ्र मंजूर करने का निर्देश दिया है। कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश मनमोहन और न्यायमूर्ति मनमीत पी एस अरोड़ा की पीठ ने जिला अदालतों में ‘हाइब्रिड’ सुनवाई के लिए जरूरी अवसंरचना से संबंधित एक याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि सभी 691 अदालतों के वास्ते एक व्यापक निविदा जारी की जाए। हाइब्रिड सुनवाई का तात्पर्य अदालत कक्षों में प्रत्यक्ष रूप से और ऑन लाइन माध्यम से सुनवाई है। पीठ ने कहा, ” नतीजतन यह अदालत दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव को सभी 691 अदालतों के संबंध में 387.03 करोड़ रुपये की राशि के लिए 19 अप्रैल, 2024 के प्रारंभिक अनुमान के अनुसार वित्तीय मंजूरी देने के मामले में तेजी से कदम उठाने का निर्देश देती है। यह स्पष्ट किया गया है कि प्रायोगिक अदालतों सहित सभी 691 अदालतों के लिए एक व्यापक निविदा जारी की जाएगी।

उच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार को शुरू में प्रति जिले दो प्रायोगिक अदालतों के बजाय प्रति अदालत परिसर में दो प्रायोगिक अदालतें स्थापित करने की अनुमति दी, जिसका निर्णय रजिस्ट्रार जनरल द्वारा किया जाएगा। उच्च न्यायालय में दिल्ली सरकार का पक्ष अतिरिक्त स्थायी वकील अनुज अग्रवाल ने रखा। सभी अन्य अदालतों में इस परियोजना को लागू करने से पहले उसके कामकाज का मूल्यांकन करने के लिए ये ‘प्रायोगिक’ अदालत स्थापित की जाएंगी। उच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार के कानून विभाग की नवीनतम यथास्थिति रिपोर्ट पर गौर किया जिसमें खुलासा किया गया है कि इस मामले में नीतिगत फैसला जुड़ा है और इसपर मंत्रिपरिषद की मंजूरी की जरूरत है।

उच्च न्यायालय ने कहा, ”चूंकि ‘हाइब्रिड’ सुनवाई से जुड़ा व्यय 500 करोड़ रुपये से कम है और दिल्ली सरकार दिल्ली उच्च न्यायालय में हाइब्रिड सुनवाई की नीति पहले ही लागू कर जा चुकी है, ऐसे में इस अदालत का मत है कि यहां (कारोबार विनिमय नियमावली) का उपबंध नौ लागू नहीं होता है और मंत्रिमंडल की अनिवार्य मंजूरी की आवश्यकता नहीं है। इसके अलावा, इस मामले में कोई देरी नहीं होनी चाहिए क्योंकि तकनीक बहुत तेजी से अप्रचलित हो जाती है। उच्च न्यायालय का यह आदेश वकील अनिल कुमार हाजेलय की याचिका पर आया है। याचिकाकर्ता ने 2021 में कोविड महामारी के दौरान याचिका दायर कर जिला अदालतों में ‘हाइब्रिड’ सुनवाई समेत कई अनुरोध किये थे। इस मामले की अगली सुनवाई 30 सितंबर को होगी।

सोनी के इस्तीफे और ‘घोटाले’ का क्या संबंध, एनटीए प्रमुख क्यों बचे हुए हैं: कांग्रेस

कांग्रेस ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के अध्यक्ष मनोज सोनी के इस्तीफे के बाद शनिवार को दावा किया कि ऐसे कई लोग हैं जिन्होंने व्यवस्था को दूषित किया है। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि सोनी के इस्तीफे को एक महीने तक छिपाकर क्यों रखा गया और क्या इतने सारे घोटालों और इस्तीफ़े के बीच कोई संबंध है? पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह सवाल किया कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के प्रमुख प्रदीप कुमार जोशी क्यों बचे हुए हैं? उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट रूप से लग रहा था कि यूपीएससी के मौजूदा विवाद को देखते हुए सोनी को बाहर किया जाएगा। यूपीएससी के अध्यक्ष मनोज सोनी ने ‘निजी कारणों’ का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। आधिकारिक सूत्रों ने शनिवार को यह जानकारी दी। सोनी का कार्यकाल मई 2029 में समाप्त होना था। खरगे ने ‘एक्स’ पर सरदार वल्लभभाई पटेल को उद्धृत करते हुए दावा किया, भाजपा-आरएसएस व्यवस्थित रूप से भारत के संवैधानिक निकायों पर संस्थागत कब्ज़ा करने में लगी हुई हैं, जिससे इन संस्थाओं की प्रतिष्ठा, शुचिता और स्वायत्तता को नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि यूपीएससी को परेशान करने वाले कई घोटाले राष्ट्रीय चिंता का कारण हैं।

खरगे का कहना है, ”प्रधानमंत्री मोदी और उनके कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्री को सफाई देनी होगी। अयोग्य व्यक्तियों द्वारा फर्जी जाति और चिकित्सा प्रमाण पत्र बनाने के कई मामलों से ऐसा प्रतीत होता है कि उन्होंने ‘फुलप्रूफ’ प्रणाली को धोखा दिया है। उन्होंने दावा किया कि यह एससी, एसटी, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस उम्मीदवारों सहित लाखों उम्मीदवारों की वास्तविक आकांक्षाओं का सीधा अपमान है, जो सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी में कड़ी मेहनत करते हैं, आधी रात को पसीना बहाते हैं। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, यह परेशान करने वाली बात है कि कैसे यूपीएससी अध्यक्ष ने अपना कार्यकाल समाप्त होने से पांच साल पहले ही इस्तीफा दे दिया। उन्होंने सवाल किया, उनका इस्तीफा एक महीने तक गुप्त क्यों रखा गया? क्या इतने सारे घोटालों और इस्तीफ़े के बीच कोई संबंध है? खरगे ने दावा किया कि प्रधानमंत्री के पसंदीदा व्यक्ति को गुजरात से लाया गया और पदोन्नत करके यूपीएससी का अध्यक्ष बनाया गया। उन्होंने कहा, इसकी उच्चतम स्तर पर गहन जांच की जानी चाहिए ताकि भविष्य में यूपीएससी में धोखाधड़ी के ऐसे मामले न हों।

रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, 2014 के बाद से सभी संवैधानिक निकायों की पवित्रता, प्रतिष्ठा, स्वायत्तता और पेशेवर दृष्टिकोण को बुरी तरह से नुकसान पहुंचाया गया है। लेकिन समय-समय पर स्वयंभू नॉन-बायोलॉजिकल प्रधानमंत्री को भी कहने के लिए मजबूर होना पड़ता है कि अब बहुत हो गया। उन्होंने कहा, नरेन्द्र मोदी 2017 में गुजरात से अपने पसंदीदा ‘शिक्षाविदों’ में से एक को यूपीएससी सदस्य के रूप में लाए और उन्हें 2023 में छह साल के कार्यकाल के लिए अध्यक्ष बनाया। लेकिन इस तथाकथित प्रतिष्ठित सज्जन ने अब अपना कार्यकाल समाप्त होने से पांच साल पहले ही इस्ती़फा दे दिया है। रमेश का कहना है, कारण चाहे जो भी बताए जाएं, यह स्पष्ट रूप से लग रहा था कि यूपीएससी के मौजूदा विवाद को देखते हुए उन्हें बाहर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसे कई और व्यक्तियों ने व्यवस्था को दूषित किया है। रमेश ने कहा कि एनटीए के अध्यक्ष अब तक बचे क्यों हैं? सूत्रों ने कहा कि सोनी के इस्तीफे का परिवीक्षाधीन आईएएस (भारतीय प्रशासनिक सेवा) अधिकारी पूजा खेडकर का मामला सामने आने के बाद ”संघ लोक सेवा आयोग पर उठ रहे सवालों से कोई लेना-देना नहीं है।

जेल में ‘जानबूझकर कम कैलोरी ले रहे’ हैं केजरीवाल: दिल्ली के उपराज्यपाल

दिल्ली के उपराज्यपाल वी के सक्सेना ने आरोप लगाया है कि न्यायिक हिरासत के तहत तिहाड़ जेल में बंद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल उन्हें दी जा रही भोजन की चिकित्सकीय खुराक और दवाएं संभवत: जानबूझकर नहीं ले रहे। उपराज्यपाल ने मुख्य सचिव नरेश कुमार को लिखे पत्र में केजरीवाल के स्वास्थ्य की स्थिति के बारे में जेल अधीक्षक की रिपोर्ट का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री द्वारा ”जानबूझकर कम कैलोरी लिए जाने” के कई उदाहरण हैं, जबकि उन्हें घर का बना खाना पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराया जा रहा है। इस मामले पर आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार ने तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। उपराज्यपाल कार्यालय ने कहा कि सक्सेना ने जेल प्राधिकारियों को सुझाव दिया है कि वे मुख्यमंत्री को निर्धारित आहार के अलावा दवा और इंसुलिन की तय खुराक लेने की सलाह दे सकते हैं, क्योंकि केजरीवाल ‘टाइप-2’ मधुमेह से पीड़ित हैं।

आम आदमी पार्टी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और उसकी अगुवाई वाली केंद्र सरकार पर जेल में बंद केजरीवाल के स्वास्थ्य को स्थायी नुकसान पहुंचाने की ”साजिश” रचने का आरोप लगाया है और दावा किया है कि आप प्रमुख का वजन कम हो गया है तथा उनके रक्त शर्करा स्तर में गिरावट आई है। पार्टी ने यह भी दावा किया कि केजरीवाल कोमा में भी जा सकते हैं और उनके मस्तिष्क को भी क्षति हो सकती है, क्योंकि उनका रक्त शर्करा स्तर एक रात में पांच बार 50 मिलीग्राम/डीएल तक गिर गया था। उपराज्यपाल द्वारा मुख्य सचिव को लिखे गए पत्र के अनुसार, आहार निगरानी चार्ट से पता चलता है कि छह जून से 13 जुलाई के बीच मुख्यमंत्री ने दिन में तीन बार आहार के लिए निर्धारित पूरी खुराक का सेवन नहीं किया। पत्र में कहा गया है, ”रिपोर्ट में वजन में कमी (आत्मसमर्पण की तिथि दो जून, 2024 को वजन 63.5 किलोग्राम था लेकिन अब 61.5 किलोग्राम रह गया है) का भी संकेत मिलता है। प्रथम दृष्टया, इसका कारण कम कैलोरी सेवन प्रतीत होता है।” इसमें कहा गया है कि ऐसा प्रतीत होता है कि 18 जून को उन्हें इंसुलिन नहीं दिया गया था या जेल प्राधिकारियों ने रिपोर्ट में इसका उल्लेख नहीं किया था।

उपराज्यपाल कार्यालय ने कहा कि अधिकतर दिनों में ‘ग्लूकोमीटर’ जांच की रीडिंग और लगातार ग्लूकोज निगरानी तंत्र (सीजीएमएस) की रीडिंग के बीच भी काफी अंतर हैं। उन्होंने कहा कि दोपहर के भोजन से पहले केजरीवाल की ‘ग्लूकोमीटर रीडिंग’ 104 एमजीएल थी, जबकि 19 जून को दोपहर साढ़े 12 बजे दोपहर के भोजन से पहले ‘सीजीएमएस रीडिंग’ 82 एमजीएल थी। उसने कहा, ”ग्लूकोमीटर जांच रीडिंग और सीजीएमएस रीडिंग के बीच स्पष्ट अंतर को सक्षम चिकित्सा अधिकारियों द्वारा सत्यापित किए जाने की आवश्यकता है।” उपराज्यपाल कार्यालय के अनुसार, मुख्यमंत्री ने छह जुलाई को तीनों समय निर्धारित आहार नहीं लिया और उन्हें नाश्ते से पहले पांच यूनिट इंसुलिन, दोपहर के भोजन से पहले चार यूनिट और रात के खाने से पहले दो यूनिट इंसुलिन दी गईं। जेल रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया कि सात जुलाई को फिर से निर्धारित खुराक नहीं ली गई और उस दिन नाश्ते से पहले पांच यूनिट और दोपहर के भोजन से पहले चार यूनिट इंसुलिन दी गईं तथा ”मुख्यमंत्री ने रात के खाने से पहले इंसुलिन लेने ने इनकार कर दिया।

यूपीएससी अध्यक्ष का इस्तीफा, एनटीए प्रमुख क्यों बचे हुए हैं : कांग्रेस

कांग्रेस ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के अध्यक्ष मनोज सोनी के इस्तीफे के बाद शुक्रवार को दावा किया कि ऐसे कई लोग हैं, जिन्होंने व्यवस्था को दूषित किया है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने सवाल किया कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के प्रमुख प्रदीप कुमार जोशी बचे क्यों हैं? उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट रूप से लग रहा था कि यूपीएससी के मौजूदा विवाद को देखते हुए सोनी को बाहर कर दिया जाएगा। आधिकारिक सूत्रों ने शनिवार को बताया कि यूपीएससी अध्यक्ष मनोज सोनी ने ”निजी कारणों” का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनका कार्यकाल मई 2029 में समाप्त होना था। रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “2014 के बाद से सभी संवैधानिक निकायों की पवित्रता, प्रतिष्ठा, स्वायत्तता और पेशेवर दृष्टिकोण को बुरी तरह से नुकसान पहुंचाया गया है। लेकिन समय-समय पर स्वयंभू नॉन-बायोलॉजिकल प्रधानमंत्री को भी कहने के लिए मजबूर होना पड़ता है कि अब बहुत हो गया।

उन्होंने लिखा, “नरेन्द्र मोदी 2017 में गुजरात से अपने पसंदीदा ‘शिक्षाविदों’ में से एक को यूपीएससी सदस्य के रूप में ले आए और उन्हें 2023 में छह साल के कार्यकाल के लिए अध्यक्ष बन दिया। लेकिन इस तथाकथित प्रतिष्ठित सज्जन ने अब अपना कार्यकाल समाप्त होने से पांच साल पहले ही इस्तीफा दे दिया है।” रमेश ने कहा, “कारण चाहे जो भी बताए जाएं, यह स्पष्ट रूप से लग रहा था कि यूपीएससी के मौजूदा विवाद को देखते हुए उन्हें बाहर कर दिया जाएगा।” उन्होंने कहा, “ऐसे कई और व्यक्तियों ने व्यवस्था को दूषित किया है। उदाहरण के लिए, एनटीए के अध्यक्ष को ले लीजिए। वह अब तक बचे क्यों हैं?” सूत्रों ने कहा कि सोनी के इस्तीफे का परिवीक्षाधीन आईएएस (भारतीय प्रशासनिक सेवा) अधिकारी पूजा खेडकर का मामला सामने आने के बाद ”संघ लोक सेवा आयोग पर उठ रहे सवालों से कोई लेना-देना नहीं है।

खनन मामले में ईडी की कार्रवाई, कांग्रेस नेता एवं हरियाणा के विधायक पंवार गिरफ्तार

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कांग्रेस नेता एवं हरियाणा के विधायक सुरेंद्र पंवार को ”अवैध” खनन से जुड़े धन शोधन मामले में गिरफ्तार किया है। आधिकारिक सूत्रों ने शनिवार को यह जानकारी दी। सूत्रों ने बताया कि पंवार (55) को गुरुग्राम से शनिवार तड़के हिरासत में लिया गया। उन्होंने बताया कि विधायक को अंबाला में धन शोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) की विशेष अदालत में पेश किया जाएगा, जहां केंद्रीय एजेंसी उन्हें हिरासत में भेजने का अनुरोध करेगी। एजेंसी ने राज्य के यमुनानगर क्षेत्र में ”बड़े पैमाने पर अवैध खनन” के आरोप में पंवार से जुड़े परिसरों पर जनवरी में छापेमारी की थी। इसके बाद पुलिस ने इस मामले में यमुनानगर से इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के पूर्व विधायक दिलबाग सिंह और उनके एक सहयोगी कुलविंदर सिंह को गिरफ्तार किया था।

हरियाणा की 90 सीट के लिए विधानसभा चुनाव इस वर्ष के अंत में होने वाले हैं। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) द्वारा लगाए गए प्रतिबंध के बाद भी यमुनानगर और इसके आसपास के जिलों में पत्थर, बजरी और रेत के कथित अवैध खनन को लेकर हरियाणा पुलिस की ओर से कई प्राथमिकी दर्ज की गई थीं। धन शोधन का यह मामला भी इसी से संबंधित है। केंद्रीय एजेंसी ‘ई-रवाना’ योजना में कथित धोखाधड़ी की भी जांच कर रही है। ‘ई-रवाना’ एक ऑनलाइन पोर्टल है, जिसे हरियाणा सरकार ने रॉयल्टी और कर संग्रह को आसान बनाने तथा खनन क्षेत्रों में कर चोरी को रोकने के लिए 2020 में शुरू किया था। ईडी के अनुसार, यह अनुमान लगाया गया है कि कथित अवैध खनन के जरिये पिछले कुछ वर्षों में लगभग 400-500 करोड़ रुपये का अवैध धन अर्जित किया गया।

प्रधानमंत्री और रेल मंत्री को रेलवे में ”चूक” की जिम्मेदारी लेनी चाहिए: कांग्रेस

कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश के गोंडा में ट्रेन हादसे के बाद बृहस्पतिवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को भारतीय रेल में ”भारी चूक” की सीधी जिम्मेदारी लेनी चाहिए। उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में बृहस्पतिवार को चंडीगढ़ से डिब्रूगढ़ जा रही एक ट्रेन के आठ डिब्बे मोतीगंज तथा झिलाही रेलवे स्टेशनों के बीच पटरी से उतर गए। इस घटना में चार लोगों की मौत हो गई तथा 20 अन्य घायल हो गए। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”उत्तर प्रदेश में चंडीगढ़-डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस का पटरी से उतरना इस बात का एक और उदाहरण है कि कैसे मोदी सरकार ने रेल सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है।

हम शोकसंतप्त परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं और घायलों के जल्द ठीक होने की कामना करते हैं।” उन्होंने कहा कि एक महीने पहले एक मालगाड़ी के सियालदह-अगरतला कंचनजंघा एक्सप्रेस से टकरा जाने से 11 लोगों की जान चली गई थी। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि स्वचालित सिग्नल की विफलता, संचालन के प्रबंधन में कई स्तरों पर खामियां और लोको पायलट तथा ट्रेन प्रबंधक के पास वॉकी-टॉकी जैसे महत्वपूर्ण सुरक्षा उपकरणों की अनुपलब्धता जैसे कुछ कारण जांच रिपोर्ट में टक्कर की वजह बताए गए हैं। खरगे ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनके रेल मंत्री, जो आत्म-प्रचार का कोई मौका नहीं छोड़ते हैं, ऐसे में उन्हें भारतीय रेलवे में हुई भारी चूक की सीधी जिम्मेदारी लेनी चाहिए।

उन्होंने कहा, ”उन्नत सुरक्षा उपायों को सुनिश्चित करने और दुर्घटनाओं को रोकने के लिए भारत भर में सभी मार्गों पर ‘कवच’ प्रणाली को शीघ्रता से स्थापित किया जाना चाहिए।” कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”गोंडा, यूपी में चंडीगढ़-डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस के पटरी से उतर जाने की वजह से कई लोगों की मृत्यु का समाचार बेहद दुखद है। प्रभु दिवंगत आत्माओं को शांति दें। शोकसंतप्त परिजनों के प्रति गहरी संवेदनाएं। मैं ईश्वर से प्रार्थना करती हूं कि घायलों को शीघ्र स्वास्थ्य लाभ मिले। उन्होंने दावा किया, लगातार हो रहे बड़े-बड़े रेल हादसों में सैकड़ों जानें जा चुकी हैं। रेलवे में लाखों पद खाली पड़े हैं। कवच जैसे सिस्टम सरकारी लेटलतीफी का शिकार हैं, लेकिन सरकार की तरफ से कोई जिम्मेदारी ही तय नहीं की जाती। प्रियंका गांधी ने सवाल किया, आखिरकार आम लोगों की सुरक्षा से जुड़े इन महत्वपूर्ण सवालों पर सरकार खामोश क्यों है? रेल दुर्घटनाओं को लेकर किसी की जिम्मेदारी क्यों तय नहीं की जा रही है?

नीट-यूजी फिर कराने के लिए यह ठोस आधार हो कि पूरी परीक्षा की शुचिता प्रभावित हुई है : सुप्रीम कोर्ट

उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी 2024 को नए सिरे से कराने के लिए यह ठोस आधार होना चाहिए कि पूरी परीक्षा की शुचिता प्रभावित हुई है। भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने विवादों में घिरी राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-स्नातक (नीट-यूजी) 2024 से जुड़ी याचिकाओं पर अहम सुनवाई शुरू की। पीठ ने कहा कि इसके ‘सामाजिक प्रभाव’ हैं। न्यायालय ने नीट-यूजी से जुड़ी याचिकाओं से पहले सूचीबद्ध मामलों की सुनवाई स्थगित कर दी और कहा, ”हम आज मामले पर सुनवाई करेंगे। लाखों युवा छात्र इसका इंतजार कर रहे हैं, हमें सुनवाई करने और निर्णय लेने दीजिए।

पीठ ने परीक्षा रद्द करने, पुन: परीक्षा कराने और पांच मई को हुई परीक्षा में कथित अनियमितताओं की अदालत की निगरानी में जांच कराने का अनुरोध कर रहे याचिकाकर्ताओं से यह दिखाने के लिए कहा कि प्रश्न पत्र ”व्यवस्थागत” तरीके से लीक किया गया और उससे पूरी परीक्षा पर असर पड़ा, इसलिए इसे रद्द करना जरूरी है। सीजेआई ने कहा, ”पुन: परीक्षा कराने के लिए यह ठोस आधार होना चहिए कि पूरी परीक्षा की शुचिता पर असर पड़ा है।” इस मामले की जांच के मुद्दे पर पीठ ने कहा, ”सीबीआई जांच कर रही है। सीबीआई ने हमें जो बताया है अगर उसका खुलासा कर दिया जाता है तो इससे जांच पर असर पड़ेगा।” इस मामले की सुनवाई जारी है। उच्चतम न्यायालय 40 से अधिक याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है। इनमें राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की याचिका भी शामिल है, जिसमें उसने, परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर विभिन्न उच्च न्यायालयों में उसके खिलाफ लंबित मामलों को उच्चतम न्यायालय में स्थानांतरित करने का अनुरोध किया है।

उच्चतम न्यायालय ने 11 जुलाई को नीट-यूजी 2024 से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई 18 जुलाई तक टाल दी थी। इन याचिकाओं में नीट-यूजी 2024 के आयोजन में कथित अनियमितताओं एवं कदाचार की जांच करने, परीक्षा रद्द करने और नये सिरे से परीक्षा आयोजित करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। पांच मई को 23.33 लाख से अधिक छात्रों ने 571 शहरों के 4,750 केंद्रों पर नीट-यूजी परीक्षा दी थी। इन शहरों में 14 विदेशी शहर भी शामिल थे। केंद्र और एनटीए ने उच्चतम न्यायालय में दाखिल अपने हलफनामों में कहा था कि बड़े पैमाने पर गोपनीयता के उल्लंघन के किसी भी सबूत के अभाव में परीक्षा को रद्द करना ”प्रतिकूल” होगा और यह लाखों ईमानदार उम्मीदवारों को ”गंभीर रूप से खतरे में” डालेगा। देश भर के सरकारी और निजी संस्थानों में एमबीबीएस, बीडीएस, आयुष और अन्य संबंधित पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए एनटीए द्वारा राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-स्नातक (नीट-यूजी) परीक्षा आयोजित की जाती है।

प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ अक्सर हिंसा भड़काने वाले बयानों का इस्तेमाल किया गया: भाजपा

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बृहस्पतिवार को कांग्रेस पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ अक्सर हिंसा भड़काने वाले बयानों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया और कहा कि भाषणों में राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को निशाना बनाने के लिए ‘हत्या’ और ‘हिंसा’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने एक पूर्व आईपीएस अधिकारी के एक लेख का हवाला देते हुए कहा कि अल्पकालिक राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल की जाने वाली बयानबाजी कई बार हिंसा को उकसाती है। इस क्रम में उन्होंने जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की हत्या और हाल ही में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हत्या के प्रयास का जिक्र किया।

कांग्रेस पर निशाना साधते हुए त्रिवेदी ने कहा कि उसके नेता राहुल गांधी ने संसद में हिंसा और हत्या जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था और चुनाव प्रचार के दौरान मोदी के काफिले पर कुछ फेंके जाने की घटना पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा था कि अब मोदी से कोई नहीं डरता है। उन्होंने कहा कि पंजाब में एक कार्यक्रम में शामिल होने गए प्रधानमंत्री मोदी की सुरक्षा खतरे में पड़ गई थी जबकि उस समय वहां कांग्रेस की सरकार थी। त्रिवेदी ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी जब कश्मीर और मणिपुर जैसे संवेदनशील स्थानों पर गए थे तो उनकी सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। उन्होंने कहा, ”हम साफ शब्दों में कहना चाहेंगे कि मौत और हिंसा जैसे शब्दों का प्रयोग बयानों में नहीं होना चाहिए।

कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने मोदी जी के लिए इस प्रकार की मौत और उस प्रकार की मौत जैसे शब्दों का प्रयोग किया है।” उन्होंने कहा, ”कांग्रेस के नेताओं ने कब्र खुदेगी, मर जा, सर फोड़ देंगे जैसे शब्दों का प्रयोग किया और ये बात आज की नहीं है, ये विगत कई वर्षों से की जा रही है।” त्रिवेदी ने कहा कि ‘मोदी के टुकड़े’ करने की बात करने वाले एक नेता अब कांग्रेस के सांसद हैं और वह कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ही हैं जिन्होंने 2007 में मोदी के खिलाफ ‘मौत का सौदागर’ जैसे शब्द का इस्तेमाल किया था। मोदी उस समय गुजरात के मुख्यमंत्री थे। भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि विपक्ष के नेता के तौर पर गांधी को अपने भाषणों में परिपक्वता दिखानी चाहिए और जो ऐसा नहीं कर रहा है वह राजनीति के लिए उपयुक्त नहीं है। इस संदर्भ में त्रिवेदी ने इशरत जहां मामले का जिक्र करते हुए कहा कि सीबीआई, जो केंद्र सरकार को रिपोर्ट करती है, उसने उस पहले हलफनामे को बदल दिया था जिसमें उसे मोदी को निशाना बनाने के लिए आतंकवादी कहा गया था । इशरत जहां अपने साथियों के साथ एक मुठभेड़ में मारी गई थी।