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गृह मंत्री बताएं कि पूर्वोत्तर के लोगों को राजनीतिक रूप अनाथ क्यों कर दिया गया: कांग्रेस

कांग्रेस ने गृह मंत्री अमित शाह के असम दौरे के बीच शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर प्रदेश के साथ वादाखिलाफी करने का आरोप लगाया और कहा कि उन्हें यह बताना चाहिए कि पूर्वोत्तर के लोगों को ”राजनीतिक रूप से अनाथ” क्यों कर दिया गया है। पार्टी के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने यह आरोप भी लगाया कि ‘जाति, माटी, भेटी’ के नारे के साथ सत्ता में आने के बाद भाजपा ने असम की जनता के साथ विश्वासघात किया। उन्होंने गृह मंत्री से 10 प्रश्न भी किए।

खेड़ा ने कहा, ”सत्ता में 12 साल हो चुके हैं, फिर भी कोच-राजबोंगशी, ताई-अहोम, मोरान, मटक, चुटिया और चाय बागान से जुड़े जनजाति/आदिवासी समुदाय को अभी तक अनुसूचित जनजाति का दर्जा क्यों नहीं मिला? आपकी सरकार ने असम के मूल निवासियों की 1.5 लाख बीघा ज़मीन अपने चहेतों को बेचने की अनुमति क्यों दी? ‘भूमि-बिक्रेता’ हिमंत विश्व शर्मा को खुली छूट क्यों दी गई है?” उन्होंने यह सवाल भी किया कि असम के युवाओं को बाहर जाकर भेदभाव झेलने के लिए मजबूर क्यों होना पड़ता है, असमिया पहचान क्यों कमजोर हो रही है तथा मतदाता सूची से लाखों मूल निवासी मतदाताओं के नाम क्यों गायब हो गए हैं? कांग्रेस नेता ने कहा, ”असम के चाय उत्पादकों के लिए अब तक एमएसपी क्यों नहीं है? क्या आप बड़ी चाय कंपनियों की जेब में हैं? सत्ता में भाजपा के एक दशक बाद भी असम स्वास्थ्य सेवाओं में पीछे क्यों है? क्या आपकी सरकार असम के लोगों की भलाई की परवाह नहीं करती?

खेड़ा ने सवाल किया कि असम के पानी में ज़हर कैसे घुल गया तथा जल की गुणवत्ता सुधारने के लिए सरकार ने क्या ठोस कदम उठाए हैं? उन्होंने कहा, ”आप ‘जाति, माटी, भेटी’ के नारे के साथ आए थे, फिर जाति को कमजोर किया, माटी को बेच दिया और भेटी से विश्वासघात क्यों किया? असम और पूरे पूर्वोत्तर के लोग राजनीतिक रूप से अनाथ क्यों हो गए हैं?” असम में ‘भेटी’ शब्द का उपयोग घर या मातृभूमि के लिए किया जाता है। कांग्रेस ने यह भी कहा, ”आपकी विदेश नीति की विफलताओं ने बांग्लादेश को चीन के और करीब कर दिया है, जिससे असम के लिए नए सुरक्षा और मानवीय संकट पैदा हो रहे हैं। क्यों?

बापू एक व्यक्ति नहीं सोच हैं, ‘अहंकारी सत्ता’ ने इसे मिटाने की असफल कोशिश की: राहुल

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर उन्हें नमन किया और कहा कि बापू एक व्यक्ति नहीं, बल्कि सोच हैं जो कभी मिट नहीं सकती क्योंकि गांधी भारत की आत्मा में अमर हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस सोच को कभी अंग्रेजी साम्राज्य ने, कभी नफ़रत की विचारधारा ने और कभी अहंकारी सत्ता ने मिटाने की असफल कोशिश की। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “महात्मा गांधी एक व्यक्ति नहीं, एक सोच हैं – वह सोच जिसे कभी एक साम्राज्य ने, कभी नफ़रत की विचारधारा ने और कभी अहंकारी सत्ता ने मिटाने की असफल कोशिश की। मगर राष्ट्रपिता ने हमें आज़ादी के साथ यह मूलमंत्र दिया कि सत्ता की ताक़त से बड़ी सत्य की शक्ति होती है – और हिंसा व भय से बड़े अहिंसा और साहस।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह सोच मिट नहीं सकती, क्योंकि गांधी भारत की आत्मा में अमर हैं। राहुल गांधी ने कहा, “बापू को उनके शहीदी दिवस पर विनम्र श्रद्धांजलि।” कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सरदार वल्लभभाई पटेल और श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बीच 1948 में हुए पत्राचार का उल्लेख करते हुए ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “महात्मा गांधी की हत्या से दो दिन पहले पंडित जवाहरलाल नेहरू ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी को एक पत्र लिखा था। कुछ महीनों बाद, 18 जुलाई 1948 को, सरदार पटेल ने भी श्यामा प्रसाद मुखर्जी को पत्र लिखा।” उन्होंने कहा, “इन दोनों पत्रों में स्वयं को राष्ट्रवाद का स्वघोषित संरक्षक बताने वालों पर बेहद गंभीर आरोप हैं।

यह सोचकर हैरानी होती है कि उसी विचारधारा से जुड़े एक लोकसभा सदस्य (अभिजीत गंगोपाध्याय), जिन्हें स्वयं प्रधानमंत्री का आशीर्वाद मिला है, ने यह कहा कि वह गांधी और गोडसे के बीच चयन नहीं कर सकते। उनकी यह मानसिकता बहुत कुछ स्पष्ट कर देती है।” उन्होंने महात्मा गांधी की हत्या के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के राष्ट्र के नाम संबोधन से जुड़ा एक लिंक भी साझा किया। नाथूराम गोडसे ने 30 जनवरी, 1948 को नयी दिल्ली में एक प्रार्थना सभा के दौरान महात्मा गांधी की गोली मारकर हत्या कर दी थी।

महिलाओं को निरंतर सशक्त कर रही है दिल्ली सरकार – रेखा गुप्ता

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने महिलाओं की सुरक्षा और गरिमा, उनका आर्थिक सशक्तिकरण तथा निर्णय एवं नेतृत्व में उनकी सहभागिता जैसी तीन प्रमुख प्राथमिकताओं पर सामूहिक रूप से कार्य करने का आह्वान किया है। रेखा गुप्ता ने गुरुवार को यहां राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) द्वारा आयोजित ‘शक्ति संवाद: दो दिवसीय क्षमता निर्माण एवं प्रशक्षिण’ कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के उद्देश्य लीगल अवेयरनेस, ग्रीवेंस रिड्रेसल, पॉलिसी कंसल्टेशन और क्षमता निर्माण की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास देश की करोड़ों बेटियों में साहस और आत्मविश्वास जगाने का माध्यम बनेंगे।

उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा और गरिमा, उनका आर्थिक सशक्तिकरण और निर्णय व नेतृत्व में उनकी सहभागिता जैसी तीन प्रमुख प्राथमिकताओं पर सामूहिक रूप से कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने दिल्ली सरकार द्वारा महिलाओं के लिए उठाए गए ठोस कदमों का उल्लेख करते हुए बताया कि महिलाओं को नाइट शिफ्ट में कार्य करने की अनुमति दी गई है, बशर्ते सुरक्षा मानकों का पालन हो। कामकाजी महिलाओं, विशेषकर श्रमिक बहनों के बच्चों के लिए 500 ‘पालना केंद्र’ स्थापित किए गए हैं, ताकि वे निश्चित होकर काम कर सकें। आर्थिक सशक्तिकरण के लिए महिलाओं को 10 करोड़ रुपये तक का बिना गारंटी वाला लोन उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है, जिससे वे अपना बिज़नेस शुरू कर सकें। सुरक्षा के क्षेत्र में 10,000 अत्याधुनिक कैमरे और एक लाख स्मार्ट सेंसर्ड एलईडी लाइटें लगाई जा रही हैं।

न्याय की त्वरित उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 53 नए न्यायिक पदों को स्वीकृति देकर फास्ट ट्रैक विशेष अदालतों के गठन का मार्ग प्रशस्त किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘शक्ति संवाद’ केवल थीम नहीं, बल्कि महिलाओं की सामूहिक शक्ति और आपसी संवाद से भविष्य का मार्ग तय करने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन के अनुरूप भारत आज महिला सशक्तिकरण से आगे बढ़कर वुमन-लेड गवर्नेंस और वुमन-लेड डिसीजन मेकिंग के दौर में प्रवेश कर चुका है। गणतंत्र दिवस परेड में, सशस्त्रबलों में महिलाओं की नेतृत्वकारी भूमिका, साहसिक प्रदर्शनों, राष्ट्रपति के रूप में आदिवासी परिवार से देश के सर्वोच्च पद तक पहुंची महिला की यात्रा और संसद में महिला नेतृत्व, ये सभी उदाहरण भारत में महिलाओं की बढ़ती निर्णायक भूमिका को दर्शाते हैं।

उन्होंने ‘बेटी बचाओ’ से ‘बेटी पढ़ाओ’ और अब ‘बेटी बढ़ाओ’ तक के सामाजिक परिवर्तन का उल्लेख करते हुए कहा कि आज देश उस चरण में है जहां बेटियों के सपनों और आकांक्षाओं को आगे बढ़ाने के लिए अवसरों का विस्तार आवश्यक है। उन्होंने कहा कि महिला आयोग वह शक्ति और भरोसे का केंद्र है, जहां पीड़ित महिला सबसे पहले सहायता की उम्मीद करती है और यह हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है कि उस तक समय पर पहुंचकर न्याय, संबल और सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री ने देश के दूरदराज क्षेत्रों खासकर उत्तर-पूर्वी राज्यों से आई महिला आयोग अध्यक्षों के समर्पण और जज्बे की सराहना की और महिला आयोग के 34 वर्षों के संघर्षपूर्ण और प्रेरक सफर को नमन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज महिलाएं केवल सुझाव देने तक सीमित नहीं, बल्कि निर्णय लेने और उन्हें लागू करने की जिम्मेदारी भी निभा रही हैं और यही सशक्तिकरण का वास्तविक अर्थ है।

सुप्रीम कोर्ट ने जातिगत भेदभाव की परिभाषा से संबंधित यूजीसी के नियम पर रोक लगाई

उच्चतम न्यायालय ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के हालिया नियम के खिलाफ दायर कई याचिकाओं पर बृहस्पतिवार को सुनवाई करते हुए इस पर रोक लगा दी। इन याचिकाओं में दलील दी गई थी कि आयोग ने जाति-आधारित भेदभाव की गैर-समावेशी परिभाषा अपनाई है और कुछ श्रेणियों को संस्थागत संरक्षण से बाहर रखा है। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जे. बागची की पीठ ने विनियमन को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर केंद्र और यूजीसी को नोटिस जारी किए।

उच्च शिक्षण संस्थानों में भेदभाव संबंधी शिकायतों की जांच करने और समानता को बढ़ावा देने के लिए सभी संस्थानों द्वारा ”समानता समितियां” गठित करने को अनिवार्य बनाने संबंधी नए नियम 13 जनवरी को अधिसूचित किए गए थे। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देना) विनियम, 2026 में यह अनिवार्य किया गया है कि इन समितियों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) समुदाय से तथा दिव्यांग एवं महिला सदस्य शामिल होने चाहिए। नया विनियम यूजीसी (उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देना) विनियम, 2012 का स्थान लेने के लिए अधिसूचित किया गया था। 2012 के नियम मुख्य रूप से परामर्श वाली प्रकृति के थे। इन याचिकाओं में इस विनियम को इस आधार पर चुनौती दी गई कि जाति-आधारित भेदभाव को सिर्फ अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के सदस्यों के खिलाफ भेदभाव के रूप में ही परिभाषित किया गया है।

याचिकाओं में कहा गया है कि ”जाति-आधारित भेदभाव” के दायरे को केवल अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग तक सीमित करके यूजीसी ने प्रभावी रूप से ”सामान्य” या गैर-आरक्षित श्रेणियों से संबंधित व्यक्तियों को संस्थागत संरक्षण और शिकायत निवारण से वंचित कर दिया है जिन्हें उनकी जातिगत पहचान के आधार पर उत्पीड़न या पूर्वाग्रह का सामना करना पड़ सकता है। इन नियमों के खिलाफ देश में विभिन्न स्थानों पर विरोध प्रदर्शन हुए जिसमें छात्र समूहों और संगठनों ने इन्हें तत्काल वापस लेने की मांग की।

‘द बैड्स ऑफ बॉलीवुड’ के खिलाफ याचिका पर सुनवाई करना हमारे न्याय क्षेत्र के बाहर: हाईकोर्ट

दिल्ली उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को फैसला सुनाया कि शाहरुख खान के स्वामित्व वाली रेड चिलीज एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड द्वारा निर्मित ‘द बैड्स ऑफ बॉलीवुड’ सीरीज के खिलाफ आईआरएस अधिकारी समीर वानखेड़े द्वारा दायर मानहानि के मुकदमे की सुनवाई करना उसके न्याय क्षेत्र के दायरे में नहीं आता है। मुकदमे पर सुनवाई करने से इनकार करते हुए न्यायमूर्ति पुरुषैन्द्र कुमार कौरव ने कहा कि वानखेड़े इस मामले पर अधिकार क्षेत्र रखने वाली अदालत के समक्ष अपनी याचिका दायर कर सकते हैं।

अदालत ने कहा, ”इस वाद पर सुनवाई करना इस न्यायालय के न्याय क्षेत्र के दायरे में नहीं आता। इसलिए इसे वादी को वापस लौटाया जा रहा है ताकि अगर वह चाहें तो इसे किसी सक्षम न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर सकें।” वानखेड़े के अनुसार, वेब सीरीज में ‘मानहानिकारक सामग्री’ उनसे व्यक्तिगत दुश्मनी निकालने और 2021 के मादक पदार्थ तस्करी मामले में शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान की गिरफ्तारी का बदला लेने के इरादे से डाली गई थी। वानखेड़े ने आरोप लगाया कि आर्यन खान द्वारा लिखित और निर्देशित यह वेब सीरीज उन्हें निशाना बनाने और बदनाम करने के लिए रची गई थी।

वानखेड़े ने रेड चिलीज और नेटफ्लिक्स पर मानहानि का मुकदमा दायर करते हुए दो करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की है, जिसे वह कैंसर रोगियों के लिए टाटा मेमोरियल कैंसर अस्पताल को दान करना चाहते हैं। वानखेड़े ने अपने मुकदमे में दावा किया कि ”सत्यमेव जयते” राष्ट्रीय प्रतीक का हिस्सा है और सीरीज में एक पात्र ”सत्यमेव जयते” का नारा लगाने के बाद अश्लील इशारा करते दिखता है। याचिका में कहा गया है कि यह कृत्य राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 के प्रावधानों का गंभीर और संवेदनशील उल्लंघन है, जिसके लिए कानून के तहत दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान है।

प्रधानमंत्री ने पाखंड से भरा हुआ ‘देश के नाम संदेश’ दिया: कांग्रेस

कांग्रेस ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संसद के हर सत्र की तरह इस बार भी पाखंड से भरा “देश के नाम संदेश” दिया है। बजट सत्र की शुरुआत में संसद भवन परिसर में अपने पहले पारंपरिक संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश लंबे समय से लंबित समस्याओं से बाहर निकल रहा है और दीर्घकालिक समाधान की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि अब समय व्यवधान खड़े करने का नहीं, बल्कि समाधान खोजने का है।

प्रधानमंत्री के बयान के बाद महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “वह (प्रधानमंत्री) राष्ट्रीय मुद्दों पर विपक्ष को विश्वास में लेने के लिए न तो सर्वदलीय बैठकों को बुलाएंगे और न ही उनकी अध्यक्षता करेंगे। वह आख़िरी समय में विधेयक पेश कराएंगे और आवश्यक विधायी जांच-पड़ताल के बिना उन्हें संसद में बुलडोजर से पास करवा लेंगे।” उन्होंने कहा, ”वह संसद में बैठकर विपक्षी नेताओं की चिंताओं का जवाब देने के बजाय दोनों सदनों में चुनावी रैली जैसे भाषण देंगे। हर सत्र की शुरुआत से पहले वह संसद को पृष्ठभूमि बनाकर अपना हमेशा की तरह पाखंड से भरा हुआ ‘देश के नाम संदेश’ देंगे।” उन्होंने कटाक्ष किया, ”आज का प्रदर्शन उसी सिलसिले की एक कड़ी है।

भारत-ईयू एफटीए साझा समृद्धि का खाका, दुनिया में लाएगा स्थिरता: प्रधानमंत्री मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौता वैश्विक भलाई के लिए साझा समृद्धि का एक खाका है। उन्होंने कहा कि यह समझौता ऐसे समय में स्थिरता देगा, जब दुनिया व्यवस्था उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है। मोदी भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) की वार्ता संपन्न होने के बाद यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के साथ एक संयुक्त प्रेस वार्ता को संबोधित कर रहे थे। प्रधानमंत्री ने कहा, ”यह केवल एक व्यापारिक समझौता नहीं है। यह साझा समृद्धि के लिए एक नया खाका है।” उन्होंने आगे कहा कि भारत ने अपने इतिहास का सबसे बड़ा मुक्त व्यापार समझौता संपन्न किया है। वैश्विक वातावरण में उथल-पुथल का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा, ”भारत-ईयू विश्व व्यवस्था को स्थिरता प्रदान करेंगे…।

भारत-ईयू सहयोग वैश्विक भलाई के लिए एक साझेदारी है।” प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत-ईयू एफटीए समुद्री क्षेत्र और साइबर सुरक्षा में सहयोग बढ़ाने में मदद करेगा। कोस्टा ने कहा कि भारत-ईयू एफटीए दो अरब लोगों के बाजार के लिए अब तक का सबसे महत्वाकांक्षी समझौता है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत-ईयू शिखर सम्मेलन दुनिया को एक स्पष्ट संदेश देता है कि भारत और यूरोपीय संघ भरोसेमंद भागीदारों के रूप में साथ खड़े हैं।

कोस्टा ने यह भी कहा कि ”हम यूक्रेन में संवाद और कूटनीति के माध्यम से शांति कायम करने में मदद के लिए आप (मोदी) पर भरोसा करते हैं।” वॉन डेर लेयेन ने कहा कि भारत-यूरोप साझेदारी उस समय रणनीतिक निर्भरता को कम करेगी, जब वैश्विक व्यापार का तेजी से राजनीतिकरण और हथियार के रूप में उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा, ”हम तेजी से असुरक्षित होती दुनिया में अपने लोगों के लिए सुरक्षा सुनिश्चित कर रहे हैं।” लेयेन ने कहा कि भारत का उदय हुआ है और यूरोप इससे वास्तव में खुश है।

देश को फिर से राजा-महाराजाओं के जमाने में धकेला जा रहा है: राहुल गांधी

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी (मनरेगा) के मुद्दे पर मंगलवार को नरेन्द्र मोदी सरकार पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि देश को फिर से राजा-महाराजाओं के उस जमाने में धकेला जा रहा है, जहां सारी ताकत और संपत्ति गिनती के लोगों के पास होती थी। उन्होंने मनरेगा मजदूरों के साथ हालिया बातचीत का वीडियो ‘एक्स’ पर साझा किया और दावा किया कि मोदी सरकार मजदूरों को गुलाम बनाने वाली सरकार है।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने कहा, ”मोदी जी का मनरेगा को बर्बाद करने का मकसद क्या है? मजदूरों से दिहाड़ी के मोल-भाव का हक छीन लेना, पंचायतों की शक्ति छीन कर उनके हाथ बांधना, राज्यों से अधिकार छीन कर दिल्ली में केंद्रित करना, देश को फिर से राजा-महाराजाओं के जमाने में धकेलना, जहां सारी ताकत और संपत्ति गिनती के लोगों के पास हो।” राहुल गांधी के अनुसार, देश के करोड़ों श्रमिक एक आवाज में कह रहे हैं कि “मनरेगा ने हमारी जिंदगी बदली।” उन्होंने दावा किया, ”आज वही श्रमिक कह रहे हैं कि मोदी सरकार मजदूरों को गुलाम बनाने वाली सरकार है।

तेजी से निर्णय लेते हुए प्रौद्योगिकी को लागू करने वाला देश ही आगे रहता है : राजनाथ

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने यह साबित कर दिया है कि स्वदेशी प्रणालियां देश की परिचालन तैयारियों को मजबूत कर रही हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय सोच बन चुकी आत्मनिर्भरता को हासिल करने में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना भी की। सिंह डीआरडीओ के एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में डीआरडीओ के वैज्ञानिक और तकनीकी विशेषज्ञ भी शामिल हुए, जो गणतंत्र दिवस परेड में विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित थे। सिंह ने कहा कि प्रौद्योगिकी तेजी से बदल रही है। उन्होंने कहा, ”आज जो भी तकनीक नयी है, वह चार-पांच साल में अप्रासंगिक हो सकती है। इसलिए, आज के समय में, विशेष रूप से युद्धक्षेत्र में, हमें केवल ‘सर्वश्रेष्ठ की उत्तरजीविता’ के सिद्धांत पर ध्यान देने के बजाय ‘सबसे तेज और आगे रहने वालों के सफल होने’ के सिद्धांत को भी ध्यान में रखकर आगे बढ़ना चाहिए।

रक्षा मंत्री ने कहा, ”जो देश तेजी से सोचता है, निर्णय लेता है और प्रौद्योगिकी को लागू करता है, वही आगे रहता है।” उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान युद्धक्षेत्र में डीआरडीओ की तकनीक का प्रभावी ढंग से उपयोग किया गया और स्वदेशीकरण के प्रयासों के आधार पर रक्षा क्षेत्र में तेजी से हो रहे बदलावों में यह संगठन महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। सिंह ने आज के प्रौद्योगिकी युग में अग्रणी बने रहने के लिए अनुसंधान एवं विकास पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता पर बल दिया और डीआरडीओ के वैज्ञानिकों से नवीन और त्वरित सोच अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने जोखिम लेने से नहीं डरने की अपील भी की। सिंह ने डीआरडीओ से उन क्षेत्रों से आगे बढ़ने का आग्रह किया, जहां निजी क्षेत्र पहले ही अपनी क्षमताएं विकसित कर चुका है।

उन्होंने सुझाव दिया कि संगठन के भीतर एक अलग प्रकोष्ठ का गठन किया जाए जो उन क्षेत्रों में जोखिम उठाए, जहां सफलता की संभावना कम लगती है। हालांकि, उन्होंने कहा कि यदि सफलता प्राप्त होती है, तो यह ऐतिहासिक होगी। रक्षा मंत्री ने कहा कि डीआरडीओ आमतौर पर डिजाइन और ‘प्रोटोटाइप’ पर ध्यान केंद्रित करता है, जबकि उत्पादन उद्योगों की भूमिका है, और इस अंतर को पाटना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मॉडलों के अनुरूप सह-विकास की रणनीति अपनाई जा सकती है, जिसमें उद्योग को शुरुआती चरणों से लेकर डिजाइन और उत्पादन तक सक्रिय रूप से शामिल किया जाता है। रक्षा मंत्री ने डीआरडीओ से सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के उपक्रमों के साथ गहन सहयोग स्थापित करने का आह्वान करते हुए कहा कि अब पारंपरिक क्षेत्रों से आगे बढ़ने का समय आ गया है।

उन्होंने तेजस जैसे हल्के लड़ाकू विमान का उदाहरण देते हुए बताया कि यह डीआरडीओ और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के बीच ज्ञान साझा करने की मिसाल है और एक बड़ी उपलब्धि के रूप में उभरा है। उन्होंने कहा कि ऐसी कई और उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं, लेकिन इसके लिए डीआरडीओ का अकादमिक जगत और अन्य क्षेत्रों के साथ मिलकर सहयोग करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सरकार का समर्थन तभी सार्थक होगा जब डीआरडीओ एकाधिकारवादी अनुसंधान एवं विकास मॉडल से हटकर एक सहयोगात्मक व्यवस्था की ओर बढ़े। रक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार के आत्मनिर्भरता प्रयासों के कारण आज रक्षा निर्यात बढ़कर लगभग 24,000 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। वर्ष 2014 में यह 1,000 करोड़ रुपये से भी कम था। उन्होंने इसे और बढ़ाने की वकालत की। उन्होंने कहा कि देश ने 2029-30 तक 50,000 करोड़ रुपये के रक्षा निर्यात का लक्ष्य निर्धारित किया है।

उन्होंने कहा कि डीआरडीओ को अपने सिस्टम के डिजाइन चरण से ही निर्यात बाजारों पर विचार करना चाहिए, विशेष रूप से ड्रोन, रडार, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली और गोला-बारूद पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि निर्यात पर ध्यान केंद्रित करने से लागत की वसूली होती है, वैश्विक विश्वसनीयता बढ़ती है और रणनीतिक साझेदारी मजबूत होती है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि डीआरडीओ 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इस कार्यक्रम में रक्षा मंत्री ने डीआरडीओ पुरस्कार योजना 2024 के विजेताओं को पुरस्कार भी वितरित किए। इस मौके पर ”द अनप्रेसिडेंटेड सक्‍सेस स्‍टोरी ऑफ द फर्स्‍ट इंडिजिनियस सुपरसोनिक मल्‍टी-टारगेट सरफेस-टू-एयर मिसाइल सिस्‍टम-आकाश” नामक पुस्कत का विमोचन भी किया गया।

मानहानि मामला: सुप्रीम कोर्ट 21 अप्रैल तक स्थगित की आतिशी, केजरीवाल की याचिका

उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को आम आदमी पार्टी (आप) के प्रमुख अरविंद केजरीवाल और दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी की उस याचिका पर सुनवाई 21 अप्रैल तक के लिए स्थगित कर दी, जिसमें उन्होंने मतदाताओं के नाम हटाने संबंधी कथित टिप्पणियों को लेकर उनके खिलाफ दायर मानहानि के मामले को रद्द करने से इनकार करने वाले आदेश को चुनौती दी है। न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश और एन. के. सिंह की पीठ ने यह कहते हुए मामले की सुनवाई स्थगित कर दी कि इसमें विस्तृत सुनवाई की आवश्यकता है। आम आदमी पार्टी के नेताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने बताया कि पीठ ने कहा था कि इस मामले को नियमित मामलों की सुनवाई वाले दिन(मंगलवार, बुधवार और बृहस्पतिवार) को सुना जाना चाहिये और इसी आधार पर उन्होंने मामले की सुनवाई को स्थगित करने का अनुरोध किया।

केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू ने बताया कि मानहानि का मामला एक राजनीतिक दल से संबंधित है, जिसने शिकायतकर्ता को अपनी ओर से याचिका दायर करने के लिए अधिकृत किया है। उच्चतम न्यायालय ने 30 सितंबर, 2024 को शिकायतकर्ता राजीव बब्बर को नोटिस जारी करते हुए निचली अदालत के समक्ष जारी कार्यवाही पर रोक लगा दी थी। इसने कहा था कि कानूनी सवाल यह है कि क्या शिकायतकर्ता या कोई राजनीतिक दल दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 199 के अंतर्गत ”असंतुष्ट व्यक्तियों” की परिभाषा के दायरे में आएगा। हालांकि, दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा था कि ये आरोप प्रथम दृष्टया ”मानहानिकारक” हैं और भाजपा को बदनाम करने तथा अनुचित राजनीतिक लाभ प्राप्त करने के इरादे से लगाए गए हैं।

उच्च न्यायालय ने आतिशी, केजरीवाल, पूर्व राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार गुप्ता और आम आदमी पार्टी के नेता मनोज कुमार द्वारा निचली अदालत में लंबित मानहानि की कार्यवाही के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया था। इसने कहा कि भारतीय दंड संहिता की धारा 499 (मानहानि) और 500 (मानहानि के लिए दंड) के तहत अपराधों के लिए निचली अदालत द्वारा पारित समन आदेश में किसी हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। इसके बाद, आम आदमी पार्टी के नेताओं ने सत्र न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें मजिस्ट्रेट अदालत के उस फैसले को बरकरार रखा गया था, जिसमें बब्बर की शिकायत पर उन्हें आरोपी के रूप में तलब किया गया था। आम आदमी पार्टी के नेताओं ने मजिस्ट्रेट अदालत के 15 मार्च, 2019 के आदेश और सत्र न्यायालय के 28 जनवरी, 2020 के आदेश को रद्द करने का अनुरोध किया। भाजपा की दिल्ली इकाई की ओर से मानहानि की शिकायत दर्ज कराने वाले बब्बर ने याचिका में कहा कि आम आदमी पार्टी के नेताओं ने मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने का आरोप लगाकर भाजपा की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया, जिसके लिए उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि दिसंबर 2018 में एक संवाददाता सम्मेलन में, आम आदमी पार्टी के नेताओं ने आरोप लगाया था कि भाजपा के निर्देशों पर निर्वाचन आयोग ने बनिया, पूर्वांचली और मुस्लिम समुदायों के 30 लाख मतदाताओं के नाम हटा दिए। केजरीवाल और अन्य आरोपियों ने दावा किया कि निचली अदालत यह समझने में विफल रही कि उनके खिलाफ मानहानि या किसी अन्य प्रकार का कोई अपराध नहीं बनता है।