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क्या ईडी ”न्यायिक इकाई” के तौर पर अदालतों में रिट दायर कर सकती है, सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई

उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को इस मुद्दे पर सुनवाई करने पर सहमति जताई कि क्या प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत एक ‘न्यायिक इकाई’ (ज्यूरिस्टिक पर्सन) के रूप में अपने अधिकारों के प्रवर्तन के लिए उच्च न्यायालयों में रिट याचिका दायर कर सकती है। ‘ज्यूरिस्टिक पर्सन’ वह गैर-इंसानी कानूनी इकाई होती है, जिसे कानून द्वारा मान्यता दी जाती है और जिसे मानव की तरह अधिकार और दायित्व प्राप्त होते हैं। न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने केरल और तमिलनाडु सरकारों द्वारा दायर अपीलों पर ईडी को नोटिस जारी किया। इन अपीलों में केरल उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें ईडी को अनुच्छेद 226 के तहत रिट याचिका दायर करने का अधिकार होने की पुष्टि की गई थी।

अनुच्छेद 226 उच्च न्यायालयों को कुछ रिट जारी करने की शक्ति से संबंधित है। केरल उच्च न्यायालय ने पिछले वर्ष 26 सितंबर को पारित अपने आदेश में एकल न्यायाधीश के उस आदेश को बरकरार रखा था, जिसमें 2020 में राजनयिक माध्यम के जरिए हुए सोना तस्करी मामले में ईडी की जांच से संबंधित न्यायिक जांच पर रोक लगाई गई थी। यह न्यायिक जांच आयोग उन आरोपों के बाद गठित किया गया था, जिनमें कहा गया था कि ईडी अधिकारियों ने आरोपियों पर दबाव डालकर मुख्यमंत्री समेत राजनीतिक नेताओं को सोना तस्करी मामले में फंसाने की कोशिश की। उच्च न्यायालय ने केरल सरकार की उस अपील को खारिज कर दिया था, जिसमें एकल पीठ के अंतरिम स्थगन आदेश को चुनौती दी गई थी। अदालत ने कहा था कि अपील में कोई दम नहीं है और ईडी की याचिका पर सुनवाई कर जांच पर रोक लगाने में एकल पीठ ने कोई त्रुटि नहीं की।

यह मामला सात मई 2021 की राज्य सरकार की अधिसूचना से उत्पन्न हुआ था, जिसमें आयोग जांच अधिनियम, 1952 के तहत ईडी अधिकारियों के खिलाफ न्यायिक जांच का आदेश दिया गया था। आरोप था कि ईडी अधिकारियों ने आरोपियों पर नेताओं को फंसाने के लिए दबाव डाला। ईडी के उप निदेशक ने उच्च न्यायालय का रुख करते हुए यह सवाल उठाया था कि क्या राज्य सरकार को किसी केंद्रीय जांच एजेंसी के खिलाफ जांच का आदेश देने का अधिकार है। एकल पीठ ने यह माना कि ईडी को अधिकार प्राप्त है और 11 अगस्त 2021 को अधिसूचना पर अंतरिम रोक लगा दी, जिसके बाद राज्य सरकार ने इसके खिलाफ अपील दायर की।

अगले साल गुजरात विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी जीत हासिल करेगी: केजरीवाल

आम आदमी पार्टी (आप) के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने गुजरात में अपने 30 साल के शासन के दौरान ”सबकुछ बर्बाद कर दिया” और इसने समाज के हर वर्ग का अपमान किया है। उन्होंने यहां पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि गुजरात कभी देश का सबसे समृद्ध राज्य था लेकिन अब भाजपा शासन में किसान, युवा और गरीब सभी पीड़ित हैं। केजरीवाल ने कहा कि उनकी पार्टी 2027 के गुजरात विधानसभा चुनाव में भाजपा को सत्ता से बाहर कर देगी। उन्होंने कहा, “इन 30 साल में उन्होंने सबकुछ बर्बाद कर दिया और समाज के हर वर्ग का अपमान किया। यह लड़ाई सत्ता की नहीं, गुजरात के सम्मान की, गुजरातियों के आत्मसम्मान की लड़ाई है।” दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि यह किसी एक पार्टी को सत्ता से हटाकर दूसरी को सत्ता में लाने की लड़ाई नहीं है।

केजरीवाल ने सभा को संबोधित करने से पहले 18 जनवरी, 2024 को हरनी झील में हुए नौका हादसे के पीड़ित परिजनों से मुलाकात की। इस हादसे में 12 स्कूली बच्चों और दो शिक्षकों की मौत हो गई थी। उन्होंने कहा, “उन्हें (सत्तारूढ़ भाजपा) आपकी परवाह नहीं, सिर्फ ठेकेदारों की परवाह है। 12 बच्चों की जान चली गई लेकिन किसी को मुआवजा नहीं मिला, किसी को सजा नहीं मिली।” केजरीवाल ने यह भी आरोप लगाया कि इस घटना से जुड़े दो परिवारों की महिलाएं मुख्यमंत्री की बैठक में गई थीं लेकिन पुलिस ने उन्हें वहां से हटा दिया और दो दिन बाद उनके घर गिरा दिए। उन्होंने कहा कि गुजरात का आदिवासी क्षेत्र सबसे पिछड़ा हुआ है और इसके विकास के लिए आवंटित धनराशि को अन्य उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।

केजरीवाल ने आरोप लगाया कि जब अनुसूचित जनजाति आरक्षित क्षेत्र देदियापाड़ा से ‘आप’ विधायक ने सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत नर्मदा जिले में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की रैली पर खर्च के बारे में जानकारी मांगी तो पता चला कि राज्य के आदिवासी कल्याण कोष से 50 करोड़ रुपये खर्च किए गए। उन्होंने दावा किया कि दो करोड़ रुपये समोसे पर, पांच करोड़ रुपये टेंट पर और सात करोड़ रुपये मंच पर खर्च किए गए। केजरीवाल ने सत्ताधारी दल पर हमला करते हुए आरोप लगाया कि आदिवासियों के लिए आवंटित धन की चोरी की जा रही है और सरकार लोगों में केवल भय पैदा कर, उन पर अत्याचार कर तथा अपमानित कर उन्हें नियंत्रण में रख रही है। ‘आप’ प्रमुख ने कहा कि लोग बदलाव चाहते हैं। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि उनकी पार्टी 2027 के गुजरात विधानसभा चुनाव में भाजपा को सत्ता से बेदखल कर देगी। उन्होंने राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस पर भी हमला बोला। केजरीवाल ने आरोप लगाया, “कांग्रेस कुछ भी करने में असमर्थ है क्योंकि पार्टी के लोगों को ही सरकारी ठेके मिलते हैं।

दिल्ली हाईकोर्ट को विधायक राजा भैया की पत्नी की याचिका पर चार महीने में फैसला लेने का निर्देश

उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली उच्च न्यायालय को उत्तर प्रदेश के विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया के खिलाफ घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत दायर उनकी पत्नी की याचिका पर चार महीने में फैसला लेने का सोमवार को निर्देश दिया। न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने यह बताए जाने के बाद भानवी सिंह की याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया कि मामला उच्च न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है। उच्चतम न्यायालय को बताया गया कि उच्च न्यायालय में मामले पर अगली सुनवाई 12 फरवरी को होनी है। पीठ ने कहा, “उस दिन, याचिकाकर्ता के पास इस मामले को जल्द निपटाने का अनुरोध करने की छूट होगी। यह कहने की आवश्यकता नहीं है कि याचिकाकर्ता की पत्नी द्वारा लगाए गए आरोपों के तथ्यों को ध्यान में रखते हुए उस अनुरोध पर विचार किया जाएगा।

उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया कि वह चार महीने का समय दे रहा है, क्योंकि उच्च न्यायालय ने निचली अदालत द्वारा कुंडा के विधायक सिंह को जारी किए गए समन पर रोक लगा दी है। राजा भैया के खिलाफ उनकी पत्नी की शिकायत के बाद कथित घरेलू हिंसा का मामला दर्ज किया गया है। इस संबंध में दिल्ली के सफदरजंग एन्क्लेव थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस के अनुसार, शिकायत में भानवी सिंह ने अपने पति पर शारीरिक व मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाया है। पुलिस ने यह जानकारी भी दी है कि दोनों वर्षों से अलग-अलग रह रहे हैं। इसके अलावा भानवी ने सास समेत ससुराल वालों पर भी उत्पीड़न का आरोप लगाया है।

भाजपा ने राजस्थान में विपक्षी वोट हटवाने का खेल खेला, फॉर्म की फॉरेंसिक जांच हो : कांग्रेस

कांग्रेस ने सोमवार को आरोप लगाया कि राजस्थान में मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के तहत भारतीय जनता पार्टी ने निर्वाचन आयोग के साथ मिलकर उसके समर्थक मतदाताओं के नाम कटवाने और फर्जी नाम जुड़वाने का खेल खेला है जो सीधे तौर पर लोकतंत्र की हत्या है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने यहां संवाददाताओं से बातचीत में यह आरोप भी लगाया कि भाजपा के संगठन महामंत्री बी एल संतोष और गृह मंत्री अमित शाह के हालिया राजस्थान दौरे के बाद यह पूरा खेल शुरू हुआ।

उन्होंने यह भी कहा कि नाम कटवाने के लिए जमा किए गए सभी फॉर्म की फॉरेंसिक जांच होनी चाहिए। डोटासरा ने संवाददाताओं से कहा, “राजस्थान में एसआईआर की प्रक्रिया के बाद जो मसौदा सूची जारी हुई, इसमें 45 लाख लोग अनुपस्थित, स्थानांतरित और मृत की श्रेणी में पाए गए। इसके बाद 15 जनवरी तक आपत्ति मांगी गई। तीन जनवरी तक कोई अफरा-तफरी नहीं थी और सारा सिस्टम सही तरीके से चल रहा था। ” उन्होंने दावा किया, “तीन जनवरी को भाजपा के संगठन महामंत्री बी.एल. संतोष राजस्थान गए, वहां बैठक की और फिर फर्जी तरीके से वोट जोड़ने और वोट काटने का काम शुरू हुआ।

कांग्रेस नेता ने कहा, “मैं निर्वाचन आयोग की वेबसाइट से लिया गया एक डेटा आपसे साझा कर रहा हूं। इसमें बताया गया है कि भाजपा ने 17 दिसंबर से 14 जनवरी तक 937 बीएलए के माध्यम से 211 नाम जोड़ने और 5,694 वोट काटने का आवेदन दिया। वहीं, कांग्रेस पार्टी ने 110 बीएलए के माध्यम से 185 नाम जोड़ने और दो नाम हटाने का आवेदन दिया।” डोटासरा ने कहा, “हमने पहले ही आशंका जताई थी कि भाजपा और निर्वाचन आयोग मिलकर, कांग्रेस की विचारधारा वाले लोगों का नाम काटने के लिए तारीख आगे बढ़ाएंगे। आखिर में हुआ भी यही।” उन्होंने दावा किया, “झुंझुनू में एक दिन में नाम काटने के 13,882 फॉर्म 7 लिए गए, मंडावा में 16,276, उदयपुरवाटी में 1,241 और खेतड़ी में 1,478 फॉर्म 7 लिए गए। वहीं, कुल 1,40,000 फॉर्म तो पंजीकृत भी करवा दिए गए।” उन्होंने दावा किया कि अधिकारियों और बीएलओ पर दबाव डालकर यह खेल खेला गया है।

डोटासरा ने कहा, “यह सीधे तौर पर लोकतंत्र की हत्या है।” जूली ने कहा, “16 जनवरी को भाजपा के 2,133 लोगों ने 291 नाम जोड़ने और 18,896 नाम काटने का आवेदन दिया। सवाल यह है कि अमित शाह जी के दौरे के बाद ऐसा क्या हुआ कि अचानक नाम काटने में तेजी आ गई? ” उन्होंने कहा, “इतना ही नहीं, ये सारे फॉर्म प्रिंटेड हैं, नाम टाइप किये हुए हैं, हस्ताक्षर भी फर्जी तरीके से किए गए और प्रदेश में ऐसे लाखों फॉर्म हैं। जूली ने कहा, “मैं निर्वाचन आयोग और उच्चतम न्यायालय से मांग करता हूं कि राजस्थान में जितने भी फॉर्म आए हैं, उन सबकी फोरेंसिक जांच हो। यह पता लगाया जाए कि ये कहां छपे हैं, कौन इन्हें यहां तक पहुंचा कर गया है, तो पूरा दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।” उन्होंने दावा किया, सारे फॉर्म एक जगह पर छापे गए हैं और वहां से इनको जयपुर पहुंचाया गया है। भाजपा विधायक, प्रत्याशी और 5-6 मंत्रियों को जिम्मा दिया गया। उनके माध्यम से इन फॉर्म को एआरओ ऑफिस पहुंचाया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाने को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की

उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को लखनऊ के एक वकील की याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उसने आरोप लगाया था कि एक ”निरर्थक” जनहित याचिका दायर करने के लिए अक्टूबर 2023 में खुली अदालत में उन्हें 25,000 रुपये का जुर्माना देने का आदेश दिया गया था, लेकिन उन पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था। तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ (जो अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं) की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने 13 अक्टूबर 2023 को वकील अशोक पांडे द्वारा दायर जनहित याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया था कि न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय को बंबई उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में फिर से शपथ दिलायी जाए क्योंकि संविधान के तहत निर्धारित तरीके से शपथ नहीं ली गयी थी।

न्यायमूर्ति उपाध्याय अब दिल्ली उच्च न्यायालाय के मुख्य न्यायाधीश हैं। पांडे के अनुसार, पीठ ने खुली अदालत में उन पर ”निरर्थक” जनहित याचिका दायर करने के लिए 25,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया था। उन्होंने दावा किया कि बाद में आदेश में जुर्माने के तौर पर पांच लाख रुपये की राशि लिखी हुई थी और अब कलेक्टर उनसे यह राशि वसूलने के लिए उनके खिलाफ कार्रवाई करने का प्रस्ताव दे रहे हैं। भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने पांडे के 2023 के आदेश में संशोधन और इस मामले की जांच के अनुरोध वाली नयी याचिका को खारिज करते हुए कहा, ”हम आदेश का पालन करेंगे और इसमें पांच लाख रुपये का जिक्र है।” सीजेआई ने कहा, ”ये सभी लोकप्रियता हासिल करने के उद्देश्य से दायर की गई याचिकाएं हैं।”

एनडीआरएफ आपदाओं के दौरान राष्ट्र के विश्वास का स्तंभ है: अमित शाह

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह ‘आपदाओं के दौरान राष्ट्र के भरोसे का स्तंभ’ बन गया है। शाह ने बल के स्थापना दिवस पर शुभकामनाएं देते हुए सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ”आपदाओं से निपटने में सक्षम भारत के निर्माण के मोदी सरकार के संकल्प को साकार करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका के माध्यम से एनडीआरएफ आज आपदाओं के दौरान राष्ट्र के विश्वास का स्तंभ बन गया है। उन शहीदों को सलाम, जिन्होंने दूसरों की सुरक्षा के लिए अपना बलिदान दे दिया।

भाजपा धर्म के आधार पर संस्थानों को बना रही है निशाना : कांग्रेस

कांग्रेस ने सरकार पर शिक्षा व्यवस्था को जानबूझकर तबाह करने का गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि अच्छी शिक्षा किसी भी विकसित राष्ट्र की नींव होती है, लेकिन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) शासन में शिक्षा को भी राजनीतिक एजेंडे के तहत निशाना बनाया जा रहा है। कांग्रेस के जम्मू कश्मीर के प्रभारी महासचिव नासिर हुसैन ने शनिवार को यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि भाजपा ने शिक्षा को मजाक बना दिया है। अच्छी शिक्षा हर विकसित राष्ट्र की बुनियाद होती है, लेकिन भाजपा सरकार लगातार इसे तबाह करने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश के बैतूल में अब्दुल नईम ने खुद के 20-22 लाख रुपए खर्च कर, एक स्कूल का निर्माण कराया, ताकि वहां के बच्चों को अच्छी शिक्षा मिल सके। नईम ने अनापत्ति प्रमाण पत्र और लाइसेंस लेकर स्कूल शुरू किया लेकिन भाजपा के इकोसस्टिम ने मदरसा चलाने की अफवाह फैलाई।

जबकि इस गांव में केवल तीन मुसलमान परिवार रहते हैं और बाकी परिवार आदिवासी समुदाय से आते हैं कांग्रेस नेता ने कहा कि जिले के कलेक्टर ने बिना किसी जांच और नोटिस के स्कूल पर बुलडोजर चलवा दिया। इसी तरह जम्मू-कश्मीर में भी एक मेडिकल कॉलेज को बंद कर दिया गया। कर्नाटक के बेलगावी में स्कूल के मुस्लिम हेड मास्टर को हटवाने के लिए कुछ फ्रिंज एलिमेंट पानी की टंकी में जहर मिला देते हैं, जिससे कई बच्चे बीमार हो गए थे लेकिन जब जांच होती है तो 04 आरोपियों को गिरफ्तार किया जाता है उन्होंने कहा कि असम के नलवाड़ी में गत 24 दिसंबर को सेंट मैरी क्रिसमस स्कूल में त्यौहार की सारी तैयारियों को तहस-नहस कर दिया जाता है।

यूपी में भी पहले क्रिसमस की छुट्टी होती थी लेकिन वश्वि हिंदी परिषद जैस संगठनों ने इस बार छुट्टी न देने और सेलब्रिेशन न करने की मांग उठाई, जिसे भाजपा सरकार ने मान लिया। मोदी सरकार में शिक्षा की स्थिति पर सवाल करते हुए उन्होंने कहा कि बैतूल के मामले में क्या कलेक्टर बताएंगे कि उनके ऊपर किनका और कैसा दबाव था और अधिकारी अगर दबाव में आकर एक स्कूल को गिरा दे रहा है तो क्या उनकी ट्रेनिंग मसूरी में हो रही है या नागपुर में हो रही है। माता वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज में अचानक निरीक्षण क्यों किया गया, किसकी शिकायत थी, क्या कॉलेज पर एक्शन पब्लिक डोमेन में जारी दबाव को लेकर किए गए।

कांग्रेस नेता ने पूछा कि क्या हालात इतने गंभीर थे कि पूरे मेडिकल कॉलेज को ही बंद करना पड़ा, क्या एग्जामिनेशन सस्टिम के बारे में जानकारी नहीं ली गई थी। उनका कहना था कि गत सितंबर में मेडिकल कॉलेज को एमबीबीएस कोर्स की अनुमति दी गई थी तो क्या उससे पहले इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी जांच नहीं की गई थी। उनका कहना था कि जैसे ईडी, सीबीआई, आईटी, चुनाव आयोग का दुरुपयोग किया जा रहा है, क्या वैसे ही राष्ट्रीय मेडिकल आयोग का भी दुरुपयोग हो रहा है। उन्होंने कहा कि देश में शक्षिण संस्थानों का खुलेआम भगवाकरण किया जा रहा है। आलोचनात्मक सोच को बढ़ावा देने वाले और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने वाले संस्थानों पर भी कई प्रकार के आक्रमण किए जा रहे हैं। जामिया, एएमयू जैसे कई संस्थानों का बजट घटा दिया गया है और जेएनयू को कोई अतिरिक्त बजट नहीं दिया गया है। नए सेंटर खुल रहे हैं, नए छात्र आ रहे हैं लेकिन फंड नहीं दिया जा रहा। हालात ये हैं कि आज अच्छे छात्र देश छोड़ रहे हैं और लगातार प्रतिभा पलायन हो रहा है। भाजपा सरकार पूरी शिक्षा व्यवस्था को तबाह करने पर तुली है। राज्यों में हर साल स्कूल बंद हो रहे हैं। सरकारी शिक्षकों की भर्ती नहीं की जा रही है।

इंदौर में लोग दूषित पानी पीकर मर रहे हैं, यह है सरकार का ‘शहरी मॉडल’: राहुल गांधी

लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से उल्टी-दस्त के प्रकोप के कारण कई लोगों की मौत होने को लेकर सरकार पर हमला करते हुए शनिवार को कहा कि देश के सबसे स्वच्छ शहर में लोग दूषित ”पानी पीकर मर रहे” हैं और यह पेयजल त्रासदी ”सरकार की नाकामी का परिणाम” है। गांधी ने भागीरथपुरा में दूषित जल पीने से उल्टी-दस्त के प्रकोप के कारण एक निजी अस्पताल में भर्ती चार मरीजों से मिलकर उनका हाल पूछा और उनके परिजनों से भी मुलाकात की। इस दौरान उनके साथ कांग्रेस की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष जीतू पटवारी और विधानसभा में विपक्ष के नेता उमंग सिंघार भी थे। कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष बाद में भागीरथपुरा पहुंचे और उल्टी-दस्त के प्रकोप के कारण मारे गए लोगों के परिवारों से मुलाकात कर उनके प्रति शोक संवेदनाएं व्यक्त कीं।

गांधी ने इन परिवारों के साथ मुलाकात के बाद संवाददाताओं से कहा, “यह कहा जाता था कि देश को स्मार्ट शहर दिए जाएंगे। इंदौर एक नये मॉडल का स्मार्ट शहर है जिसमें पीने का साफ पानी तक नहीं है। लोगों को डराया जा रहा है।” उन्होंने कहा, “इस शहर में लोगों को पीने का साफ पानी नहीं मिल सकता है और यहां लोग (दूषित) पानी पीकर मर रहे हैं। यह है शहरी मॉडल। यह केवल इंदौर की बात नहीं है। देश के अलग-अलग शहरों में यही हो रहा है।” उन्होंने कहा कि लोगों को साफ पानी मुहैया कराना और प्रदूषण कम करना सरकार की जिम्मेदारी है लेकिन सरकार ये जिम्मेदारियां नहीं निभा रही है। लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता ने मांग की कि सरकार इंदौर की पेयजल त्रासदी की जिम्मेदारी ले। गांधी ने कहा, “आखिर इंदौर की इस पेयजल त्रासदी के लिए सरकार में कोई तो जिम्मेदार होगा। सरकार को इसकी कोई न कोई जिम्मेदारी तो लेनी चाहिए।

उन्होंने आरोप लगाया कि देश के सबसे स्वच्छ शहर में सरकार की लापरवाही के कारण लोग दूषित पानी पीने से मरे हैं। गांधी ने कहा, “ऐसे में सरकार को उनकी पूरी मदद करनी चाहिए और पीड़ितों को पर्याप्त मुआवजा देना चाहिए।” गांधी के दौरे के मद्देनजर भागीरथपुरा में पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे और जगह-जगह अवरोधक लगाए थे। भागीरथपुरा में दूषित पेयजल से लोगों के बीमार पड़ने का सिलसिला दिसंबर के आखिर में शुरू हुआ था। स्थानीय नागरिकों ने इस प्रकोप में अब तक 24 लोगों के दम तोड़ने का दावा किया है। मृतकों के आंकड़े को लेकर विरोधाभासी दावों के बीच राज्य सरकार ने मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ में बृहस्पतिवार को पेश स्थिति रिपोर्ट में भागीरथपुरा में उल्टी-दस्त प्रकोप के दौरान पांच माह के बालक समेत सात लोगों की मौत का जिक्र किया है। इस बीच, शहर के शासकीय महात्मा गांधी स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय की एक समिति के किए गए ‘डेथ ऑडिट’ की रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि भागीरथपुरा के 15 लोगों की मौत इस प्रकोप से किसी न किसी तरह जुड़ी हो सकती है। प्रशासन ने भागीरथपुरा में उल्टी-दस्त का प्रकोप शुरू होने के बाद जान गंवाने वाले 21 लोगों को दो-दो लाख रुपये का मुआवजा दिया है। अधिकारियों का दावा है कि इनमें से कुछ लोगों की मौत दूसरी बीमारियों और अन्य कारणों से भी हुई है, लेकिन सभी मृतकों के परिवारों को मानवीय आधार पर आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है।

संधियां राष्ट्रीय हित के आधार पर होनी चाहिए, न कि विदेशी सरकारों या निगमों के दबाव में : सुप्रीम कोर्ट

उच्चतम न्यायालय ने कहा कि संधियां राष्ट्रीय हित के आधार पर होनी चाहिए, न कि विदेशी सरकारों या निगमों के दबाव में। न्यायालय ने यह भी कहा कि भारत को अंतरराष्ट्रीय कर समझौते करते समय अपनी कर संप्रभुता की रक्षा करनी चाहिए, निष्पक्षता सुनिश्चित करनी चाहिए और दुरुपयोग को रोकना चाहिए। न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला की ये टिप्पणियां उस फैसले के दौरान आईं, जिसमें शीर्ष अदालत ने घरेलू राजस्व अधिकारियों के उस निर्णय को बरकरार रखा, जिसके अनुसार अमेरिका स्थित निवेशक कंपनी ‘टाइगर ग्लोबल’ द्वारा 2018 में फ्लिपकार्ट से बाहर निकलने पर उत्पन्न पूंजीगत लाभ भारत में कर योग्य है। न्यायमूर्ति पारदीवाला ने एक अलग लेकिन सहमति वाला फैसला लिखा, जिसमें यह स्पष्ट किया गया कि भारत को अंतरराष्ट्रीय कर संधियों के प्रति किस तरह का व्यापक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।

उन्होंने कहा, कर संधियां, अंतरराष्ट्रीय समझौते, प्रोटोकॉल और सुरक्षा उपाय अत्यंत सहभागी, पारदर्शी होने चाहिए और उनमें समय-समय पर समीक्षा की व्यवस्था होनी चाहिए। साथ ही संधि से बाहर निकलने के मजबूत प्रावधानों के साथ पुनः वार्ता की शक्ति भी होनी चाहिए, ताकि अनुचित परिणामों से बचा जा सके, राष्ट्र के रणनीतिक और सुरक्षा हितों की रक्षा हो, कर आधार के क्षरण तथा लोकतांत्रिक नियंत्रण के नुकसान या कमजोर पड़ने को रोका जा सके और संप्रभु के कराधान अधिकार की रक्षा के लिए स्पष्ट प्रावधान शामिल किए जा सकें। न्यायमूर्ति पारदीवाला ने कहा, संधियां राष्ट्रीय हित के आधार पर की जानी चाहिए, न कि विदेशी सरकारों या निगमों के दबाव से।

उच्चतम न्यायालय ने यह सुनिश्चित करने के लिए विस्तृत सुरक्षा उपायों का उल्लेख किया कि कर संधियां देश की आर्थिक संप्रभुता, राजस्व आधार और सार्वजनिक हित की रक्षा करें। न्यायमूर्ति पारदीवाला ने सुझाव दिया कि अंतरराष्ट्रीय कर संधियों पर बातचीत या उनके नवीनीकरण के दौरान भारत को व्यापक सुरक्षा उपाय अपनाने चाहिए जिनमें फर्जी कंपनियों द्वारा संधि के दुरुपयोग को रोकने के लिए लाभ की सीमाओं जैसी धाराओं को शामिल करना और सामान्य कर बचाव निरोधक नियम जैसे घरेलू कानूनों को लागू करने की अनुमति देना शामिल है। उन्होंने कहा कि संधियों में केवल नौकरशाही या कूटनीतिक उद्देश्यों को ही नहीं, बल्कि व्यापक आर्थिक और सार्वजनिक हितों को भी प्रतिबिंबित होना चाहिए। गौरतलब है कि टाइगर ग्लोबल ने 2018 में फ्लिपकार्ट से बाहर निकलने का फैसला किया था, जब वॉलमार्ट इंक ने भारतीय ई-वाणिज्य कंपनी में नियंत्रक हिस्सेदारी हासिल की थी। इसके बाद टाइगर ग्लोबल ने फरवरी 2019 में इस मामले पर निर्णय के लिए आयकर विभाग से अग्रिम प्राधिकरण निर्णय हेतु संपर्क किया था।

निर्वाचन आयोग पर गुमराह करने के राहुल के आरोप पर भाजपा का पलटवार

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शुक्रवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर ‘खानदानी चोर’ वाला तंज कसते हुए आरोप लगाया कि महाराष्ट्र निकाय चुनाव की मतगणना के दौरान इस प्रक्रिया को बदनाम करके वह लोगों को गुमराह कर रहे हैं। यह प्रतिक्रिया गांधी के इस बयान पर आई है कि ”वोट चोरी एक राष्ट्र विरोधी कृत्य है” और निर्वाचन आयोग नागरिकों को गुमराह कर रहा है। राहुल ने महाराष्ट्र नगर निकाय चुनाव में मार्कर पेन में इस्तेमाल होने वाली पक्की स्याही की गुणवत्ता पर विवाद के बीच यह बयान दिया। राहुल गांधी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए, भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ”बहाना ब्रिगेड वापस! गिनती खत्म होने से पहले हार मान रहे हैं?” उन्होंने कहा, ”राहुल वही कर रहे हैं जिसमें वह सबसे अच्छे हैं — बदनाम करना, तोड़-मरोड़कर पेश करना और गलत जानकारी देना।

‘खानदानी चोर’ अब ठाकरे परिवार के दावों को दोहरा रहे हैं।” पूनावाला ने यह भी कहा कि बिहार चुनाव पर राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ के आरोपों का क्या नतीजा निकला। भाजपा ने कई मौकों पर गांधी के ‘वोट चोरी’ के आरोपों को ‘बेबुनियाद’ और ‘अपनी नाकामियों को छिपाने’ की कोशिश बताया है। भाजपा ने राहुल गांधी और विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन के दूसरे नेताओं से यह भी पूछा है कि उन्होंने बिहार चुनाव के नतीजों को न्यायालय में या दूसरे मंचों पर चुनौती क्यों नहीं दी?