दिल्ली आबकारी नीति मामला: कारोबारी अरोड़ा को सरकारी गवाह बनाने संबंधी अर्जी पर निर्णय 14 नवंबर को

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नई दिल्ली। दिल्ली की एक अदालत 14 नवंबर को इस संबंध में फैसला करेगी कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के करीबी सहयोगी एवं कारोबारी दिनेश अरोड़ा को दिल्ली आबकारी नीति मामले में सरकारी गवाह बनाने की अनुमति दी जाए या नहीं। विशेष न्यायाधीश एम के नागपाल साथ ही अरोड़ा की मामले में उन्हें माफी देने और मामले में एक गवाह बनने की अनुमति देने संबंधी याचिका पर दलीलें भी सुनेंगे। सुनवाई के दौरान, आरोपी ने अदालत से कहा कि वह मामले के बारे में स्वेच्छा से सच्चाई का खुलासा करने के लिए तैयार हैं और वह मामले में एक सरकारी गवाह बनना चाहते हैं। अदालत के सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, ”सीबीआई या किसी और की ओर से कोई दबाव या धमकी नहीं है। अरोड़ा के वकील ने बंद कमरे में कार्यवाही के लिए एक अर्जी भी दी और कहा कि यह एक संवेदनशील मामला है और मीडिया को इस प्रारंभिक चरण में बाहर रखा जाना चाहिए।

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने बंद कमरे में सुनवायी के लिए अर्जी का विरोध नहीं किया। अदालत ने इससे पहले जांच एजेंसी द्वारा जमानत याचिका का विरोध नहीं करने के बाद अरोड़ा को अग्रिम जमानत दे दी थी। सीबीआई ने अग्रिम जमानत याचिका के जवाब में कहा था कि अरोड़ा जांच में शामिल हुए और कुछ तथ्यों का खुलासा किया जो जांच के लिए महत्वपूर्ण थे और इसलिए, ”अगर इस अदालत द्वारा अर्जीकर्ता को अग्रिम जमानत दी जाती है तो सीबीआई को कोई आपत्ति नहीं है। गत अगस्त में, सीबीआई ने आबकारी नीति घोटाले में एक मामला दर्ज किया था और मामले में आरोपी बनाये गए आठ व्यक्तियों के खिलाफ ‘लुक आउट सर्कुलर’ (एलओसी) जारी किया था। आरोपियों में सिसोदिया, तत्कालीन आबकारी आयुक्त अरवा गोपी कृष्ण, उपायुक्त आनंद तिवारी और सहायक आयुक्त पंकज भटनागर शामिल हैं।

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