सेवा अधिनियम अधिकारियों को निर्वाचित सरकार के आदेशों की अवहेलना करने का लाइसेंस देता है : सीएम केजरीवाल

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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बुधवार को आरोप लगाया कि दिल्ली के लिए नया सेवा अधिनियम अधिकारियों को निर्वाचित सरकार के आदेशों के खिलाफ ‘खुली बगावत’ करने और मंत्रियों के निर्देशो की अवहेलना करने का लाइसेंस देता है। मुख्यमंत्री की यह तीखी प्रतिक्रिया सेवा मामलों की मंत्री आतिशी के बयान के बाद आई है। आतिशी ने संवाददाता सम्मेलन में दावा किया कि प्रधान सचिव (वित्त) ने माल एवं सेवा कर (जीएसटी) रिफंड से जुड़े मामले में उच्च न्यायालय द्वारा दिल्ली सरकार के खिलाफ दिए गए फैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती देने के लिए वकील नियुक्त करने संबंधी उनके निर्देश को मानने से इनकार कर दिया है।

आतिशी ने अरोप लगाया कि मुख्य सचिव के बाद वित्त सचिव ने भी निर्वाचित सरकार के निर्देश को मानने से इनकार कर दिया है। आतिशी के आरोप का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सेवा मामलों से जुड़ा कानून (जीएनसीटीडी संशोधन अधिनियम-2023) दिल्ली को ‘बर्बाद’ कर देगा। केजरीवाल ने ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में कहा, दिल्ली सेवा अधिनियम अधिकारियों को निर्वाचित सरकार के लिखित आदेशों का खुले तौर पर विरोध करने का लाइसेंस देता हैं। अधिकारियों ने निर्वाचित मंत्रियों के आदेश को अस्वीकार करना शुरू कर दिया है।

क्या कोई राज्य या देश या संस्थान इस तरह से काम कर सकता है? यह कानून दिल्ली को बर्बाद कर देगा और भाजपा यही चाहती है। अधिनियम को यथाशीघ्र निरस्त किया जाना चाहिए। आतिशी ने दावा किया कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (जीएनसीटीडी) संशोधन अधिनियम, 2023 के लागू होने पर अधिकारियों द्वारा ‘बगावत’ की आशंका सच होती दिख रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सेवा अधिनियम का इस्तेमाल करके दिल्ली सरकार के कामकाज को बाधित करने का प्रयास किया जा रहा है।

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