कांग्रेस और आप के लिए धर्मनिरपेक्षता का अर्थ हिंदू धर्म के प्रति घृणा दिखाना : भाजपा नेता

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नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने धर्म के बारे में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (आप) के नेताओं की कुछ विवादास्पद टिप्पणियों को लेकर बुधवार को दोनों दलों पर हमला बोला और कहा कि उनके लिए धर्मनिरपेक्षता का मतलब हिंदू धर्म के प्रति घृणा प्रदर्शित करना है। भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने जी-20 के लोगो में कमल के इस्तेमाल पर सवाल करने के लिए कांग्रेस पर निशाना साधा और कहा कि इसे कांग्रेस सरकार के दौरान ही राष्ट्रीय पुष्प चुना गया था।

उन्होंने जी-20 के लोगो में कमल चिह्न के उपयोग के बारे में कांग्रेस की आपत्ति को हिंदू धर्म का अपमान कहा क्योंकि यह फूल देवी लक्ष्मी और देवी सरस्वती से संबंधित है। भाजपा नेता ने कहा, विपक्षी पार्टी को पता होना चाहिए कि कमल राष्ट्रीय पुष्प है और इसे कांग्रेस सरकार ने चुना था। इसलिए, पार्टी नेताओं की मौजूदा पीढ़ी को अपने पूर्वजों के फैसले का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस की कर्नाटक इकाई के कार्यकारी अध्यक्ष सतीश जारकीहोली की कथित टिप्पणी को लेकर राहुल गांधी से सवाल किया। जारकीहोली ने कथित तौर पर कहा था कि हिंदू शब्द फारसी से आया है और इसका अर्थ अश्लील होता है। उन्होंने छत्तीसगढ़ के राजनंदगांव में सामूहिक धर्मांतरण का भी जिक्र किया जिस कार्यक्रम में कांग्रेस नेता और शहर के मेयर ने कथित तौर पर भाग लिया था।

त्रिवेदी ने भाजपा मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते कहा, राहुल जी अपनी भारत जोड़ो यात्रा के दौरान लोगों के कानों में कौन सा मंत्र फूंक रहे हैं… अगर वोट मिले तो हिंदू भावनाओं को आहत करने में कोई संकोच नहीं करें? उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस ने एक समय हिंदुओं को आतंकवादी कहा था और अब नवीनतम पार्टी (आप) के नेता भी हिंदुओं की भावनाओं को आहत कर रहे हैं। त्रिवेदी ने कहा, धर्मनिरपेक्ष राजनीति के समर्थक ये दोनों (आप और कांग्रेस) हिंदू धर्म और हिंदुओं की भावनाओं के प्रति घृणा और अनादर व्यक्त करते हैं। उनके लिए धर्मनिरपेक्षता का यही अर्थ है। उन्होंने कहा, अब युवा नेता (राहुल गांधी) और बगुला भगत (अरविंद केजरीवाल) का अपनी पार्टी के नेताओं की असंवेदनशील टिप्पणी के बारे में क्या कहना है? यह उनके दोहरे चरित्र को दिखाता है। उन्होंने यह भी सवाल किया कि भारत जोड़ो यात्रा महात्मा गांधी और सरदार वल्लभ भाई पटेल की भूमि- गुजरात क्यों नहीं गई।

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