पुनरीक्षण पर न्यायालय की टिप्पणियों से लोगों को मताधिकार से वंचित होने से बचाया जा सकेगा: कांग्रेस

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नई दिल्ली। कांग्रेस ने कहा कि बिहार में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के विषय पर उच्चतम न्यायालय की टिप्पणियों के चलते राज्य में बड़ी संख्या में मतदाताओं को मताधिकार से वंचित होने से बचाया जा सकेगा। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह भी कहा, ”निर्वाचन आयोग ने ‘स्थगनादेश नहीं मिलने’ को लेकर जो भ्रम फैलाने की कोशिश की, उसकी असलियत भी अब सामने आ चुकी है।” कांग्रेस नेता ने न्यायालय की टिप्पणियों के कुछ अंश ‘एक्स’ पर साझा किए। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने रमेश पर न्यायालय की टिप्पणियों की गलत व्याख्या करने का आरोप लगाया और कहा कि उनके विरुद्ध अवमानना का आरोप लगाया जा सकता है।

रमेश ने पोस्ट किया, ”माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश के आधिकारिक रूप से सामने आने के बाद, अब निर्वाचन आयोग को बिहार में मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया में मतदाता पहचान पत्र, आधार कार्ड और राशन कार्ड को शामिल करना होगा। इससे बड़ी संख्या में मतदाताओं को मताधिकार से वंचित होने से बचाया जा सकेगा।” उन्होंने दावा किया, ”इसके साथ ही यह भी स्पष्ट हो गया है कि “स्थगनादेश नहीं मिलने” की बात कहकर निर्वाचन आयोग जो भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहा था, उसकी असलियत अब सामने आ चुकी है। आदेश के पृष्ठ संख्या सात पर स्पष्ट रूप से लिखा है कि किसी भी याचिकाकर्ता ने कल (बृहस्पिवार को) न्यायालय से स्थगन आदेश की मांग ही नहीं की थी।

रमेश ने कहा कि इस तरह का जानबूझकर भ्रामक ”हेडलाइन मैनेजमेंट” एक संवैधानिक संस्था को शोभा नहीं देता। कांग्रेस नेता पर पलटवार करते हुए भाजपा के आईटी प्रकोष्ठ प्रमुख अमित मालवीय ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”उच्चतम न्यायालय की (टिप्पणियों की) गलत व्याख्या करना बंद करें। न्यायालय ने किसी भी अतिरिक्त दस्तावेज को स्वीकार करने का आदेश नहीं दिया है, (बल्कि) उसने सिर्फ़ इतना कहा है कि वह उन पर विचार कर सकता है।” उनका कहना है, ”न्यायमूर्ति धूलिया ने स्पष्ट रूप से कहा कि निर्वाचन आयोग किसी भी दस्तावेज को अस्वीकार करने के लिए वैध कारण दर्ज करने को लेकर स्वतंत्र है। यह विवेकाधिकार आयोग के पास है।” मालवीय ने कहा, ”जानबूझकर न्यायालय की टिप्पणियों को गलत तरीके से प्रस्तुत करना खतरनाक है। आप पर न्यायालय के उस बयान का हवाला देने के लिए अवमानना का आरोप लगाया जा सकता है, जो उसने कभी कहा ही नहीं।

जरा राहुल गांधी से पूछिए, जिन्हें कुछ समय पहले इसी तरह के अपराध के परिणाम भुगतने पड़े थे।” उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को निर्वाचन आयोग को बिहार में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को जारी रखने की अनुमति देते हुए इसे ”संवैधानिक दायित्व” बताया। न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने इस कवायद के समय को लेकर सवाल भी उठाया और कहा कि बिहार में एसआईआर के दौरान आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र और राशन कार्ड पर दस्तावेज के तौर पर विचार किया जा सकता है।