नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने आतंकवाद विरोधी कानून गैर कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत दर्ज एक मामले में गिरफ्तार प्रतिबंधित पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के पूर्व अध्यक्ष ई. अबूबकर की स्वास्थ्य की स्थिति पर तिहाड़ जेल अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है। न्यायमूर्ति रवींद्र डुडेजा ने 29 अगस्त को अबूबकर द्वारा दायर एक अर्जी पर यह आदेश पारित किया, जिसमें उन्होंने एक निजी अस्पताल में इलाज की अनुमति देने का अनुरोध किया था। वह वर्तमान में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में इलाज करा रहे हैं। संगठन के खिलाफ बड़े पैमाने पर की गई कार्रवाई के दौरान राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने 2022 में अबूबकर को गिरफ्तार किया था। न्यायाधीश ने एनआईए को भी नोटिस जारी किया और 26 नवंबर तक जवाब मांगा, जब मामले की अगली सुनवाई होगी।
आवेदक ने दलील दी कि उसे एम्स में संतोषजनक उपचार नहीं मिल रहा है और कर्मचारियों का व्यवहार उसके प्रति कथित रूप से शत्रुतापूर्ण है। उसने यह भी दलील दी कि वह खर्च वहन करने को तैयार है। एनआईए ने अर्जी का विरोध करते हुए दावा किया कि वह पहले से ही देश के सर्वश्रेष्ठ अस्पताल में इलाज करा रहा है। वकी कील ने पूछा, ”उसे और क्या चाहिए?” उच्चतम न्यायालय ने इस साल की शुरुआत में मेडिकल रिपोर्ट देखने के बाद अबूबकर को इस मामले में चिकित्सा आधार पर जमानत देने से इनकार कर दिया था। उसने यह दलील भी खारिज कर दी कि अगर याचिकाकर्ता को जमानत पर रिहा नहीं किया गया तो उसे नजरबंद रखा जा सकता है। उच्च न्यायालय ने पिछले साल 28 मई को अबूबकर की जमानत याचिका खारिज कर दी थी।