गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)देश को घुसपैठियों से मुक्त करने का अपना वादा पूरा करेगी। शाह ने असम के पहले गैर-कांग्रेसी मुख्यमंत्री गोलाप बोरबोरा की जन्म शताब्दी पर गुवाहाटी में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा स्वतंत्रता दिवस के भाषण में घोषित केंद्र का उच्च स्तरीय जनसांख्यिकी मिशन देश के जनसांख्यिकीय स्वरूप का अध्ययन करने और घुसपैठियों की पहचान करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। उन्होंने कहा, ”हमने असम से वादा किया था, लेकिन हम 10 वर्षों में इसे पूरा नहीं कर पाए। लेकिन हम अपना वादा निभाएंगे और असम तथा पूरे देश को अवैध विदेशियों से मुक्त बनाएंगे।” शाह ने कहा,”मैं उन लोगों में से हूं जो मानते हैं कि हमारे देश में एक भी घुसपैठिया नहीं रहना चाहिए।
केंद्रीय गृहमंत्री ने याद किया कि कैसे मार्च 1978 से सितंबर 1979 तक राज्य में जनता पार्टी की सरकार का नेतृत्व करने वाले बोरबोरा ने मंगलदाई लोकसभा सीट के लिए उपचुनाव की आवश्यकता पड़ने पर मतदाता सूची को शुद्ध करने का अभियान चलाया था। उन्होंने कहा, ”कम्प्यूटरीकृत मतदाता सूची नहीं होने के बावजूद बोरबोरा सरकार ने 36,780 अवैध विदेशियों के नामों का पता लगाया और मतदाता सूची के इस शुद्धिकरण को असम आंदोलन की शुरुआत माना जा सकता है।” अमित शाह ने कहा, ” निर्वाचन आयोग अब विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के जरिए मतदाता सूची की सफाई कर रहा है, लेकिन कुछ दल इसका विरोध कर रहे हैं। यह आज की राजनीति में नैतिक पतन को दर्शाता है।” उन्होंने दावा किया कि यदि बोरबोरा जीवित होते तो वह एसआईआर की प्रक्रिया का विरोध करने वाले इन दलों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते।
शाह ने घुसपैठियों के खिलाफ कार्रवाई, विशेषकर अतिक्रमण हटाने के लिए राज्य सरकार की सराहना की। केंद्रीय गृह मंत्री ने कट्टर समाजवादी नेता बोरबोरा को सम्मानित करने के लिए मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा और उनकी सरकार की सराहना की, जिनका भाजपा से कोई संबंध नहीं था। शाह ने कहा कि सभी के योगदान को मान्यता देना मोदी सरकार की विशेषता है। उन्होंने कहा,”प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा गुजरात में सरदार पटेल की प्रतिमा बनवाए जाने तक उनके योगदान को भुला दिया गया था। नेताजी (सुभाष चंद्र बोस) का कर्तव्य पथ पर प्रतिमा स्थापित किये जाने से पहले दिल्ली में उनका कोई स्मारक नहीं था।” केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि गोलाप बोरबोरा का कार्यकाल भले ही छोटा था, लेकिन उन्होंने असम के पहले गैर-कांग्रेसी मुख्यमंत्री के रूप में अमिट छाप छोड़ी। उन्होंने कहा, ”दसवीं कक्षा तक मुफ्त शिक्षा, 10 बीघा तक की जमीन के लिए लगान माफी, गुवाहाटी में पासपोर्ट कार्यालय खोलना और राज्य में बैंकिंग और रेलवे भर्ती बोर्ड की स्थापना उनकी (बोरबोरा) सरकार के उल्लेखनीय फैसलों में से हैं।