दुनिया की राजनीति का नक्शा बदलने जा रही है इजरायल-हमास की जंग

37
281

अभिषेक उपाध्याय। नई दिल्ली

इजरायल और फिलिस्तीनियों के बीच वर्षों से सुलग रही आग एक बार फिर भड़क उठी है। हमास ने हमला किया है और इजरायल अब हमास के सफाए पर उतर आया है। इजरायल पर हमास के हमले के बाद दोनों पक्षों से मरने वालों की संख्‍या करीब 6000 के पार चली गई है। दशकों पुरानी चली आ रही दुश्‍मनी के बीच 7 अक्टूबर की सुबह हमास ने अचानक फिलिस्‍तीन की ओर से आसमानी हमला शुरू कर दिया, जब इजराइल में लोग गहरी नींद में सो रहे थे। इसके बाद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्‍याहू ने युद्ध की घोषणा कर दी। इजरायल का कहना है कि युद्ध तब तक नहीं खत्‍म होगा, जब तक हमास के मिलिट्री इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर को पूरी तरह नष्‍ट नहीं कर दिया जाता। इस काम में कई महीने लग सकते हैं।

इजरायल पर हमास के हमले ने क्षेत्रीय स्थिरता और बाजारों दोनो को हिलाकर रख दिया है। युद्ध के चलते मिडिल-ईस्‍ट में तनाव बढ़ने के खतरे के बीच तेल की कीमतें बढ़ गई हैं। इजरायल की घटनाएं तेल आपूर्ति के लिए तत्काल खतरा तो पैदा नहीं करती हैं, लेकिन इस संघर्ष के महायुद्ध में बदलने का खतरा बना हुआ है। समर्थन और विरोध की राजनीति के बीच अमेरिका और ईरान आपस में उलझ सकते हैं। अगर ये हुआ तो परिणाम खासे भयानक हो सकते हैं। जानकार सूत्रों की माने तो ईरानी सुरक्षा अधिकारियों ने महीनों तक लगातार कई बैठकों के बाद हमास को इजरायल पर हमले की योजना बनाने में मदद की। ये बताता है कि कैसे इस युद्ध का दायरा तेजी से आगे बढ़ सकता है।

ये युद्ध कब और कहां पर खत्म होगा, ये कहना बड़ा मुश्किल है। इससे पूरा का पूरा मिडिल ईस्ट अस्थिरता की गिरफ्त में आ गया है। एक सच्चाई अरब देशों और इजरायल के आपसी रिश्तों की भी है। अरब देशों और इजरायल को जिस तरह अमेरिका करीब लाने की कोशिश में था, इस हमले से उसे भी खासी चोट लगी है। अमेरिका की कोशिश रही है कि मध्य-पूर्व में स्थायी शांति के लिए इसराइल और सऊदी अरब के बीच रिश्ते सामान्य हो जाएं। वो बीते कई सालों से सऊदी अरब और यूएई समेत मध्य-पूर्व में अरब मुल्कों के साथ इसराइल से रिश्ते कायम करने की कोशिश में है। इस कोशिश में 2020 में यूएई, बहरीन, मोरक्को और सूडान ने इसराइल के साथ रिश्ते सामान्य (अब्राहम अकॉर्ड्स) किए थे। डोनाल्ड ट्रंप की कोशिशों से हुए इस शांति समझौते को ‘सदी का समझौता’ कहा गया था। अमेरिका इसमें सऊदी अरब को भी लाने की कोशिश में था, मगर ये हो न सका।

जुलाई 2022 को अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन सऊदी अरब के आधिकारिक दौरे पर गए। उन्होंने एक बार फिर से कोशिश शुरू की मगर बात फिर से ठहर गई। इस बीच गाजा में चल रहे भीषण युद्ध के बीच सऊदी अरब के प्रिंस मोहम्‍मद बिन सलमान ने अमेरिका को बड़ा संकेत दिया है। उन्होंने कहा है कि इजरायल के साथ रिश्‍ते सामान्‍य करने की प्रक्रिया गाजा में हमास से युद्ध समाप्‍त होने के बाद फिर से शुरू हो सकती है। दरअसल, सऊदी प्रिंस और अमेरिकी राष्‍ट्रपति जो बाइडन के बीच फोन पर बातचीत हुई है। इसके बाद वाइट हाउस ने यह बयान दिया है।

बाइडन और प्रिंस दोनों ही ने गाजा में मानवीय मदद देने का भी स्‍वागत किया। दोनों ने इस बात पर सहमति जताई कि इस संघर्ष के अन्‍य क्षेत्रों में नहीं भड़कने के लिए व्‍यापक राजनयिक प्रयास की जरूरत है। बाइडन ने एक बार फिर से सऊदी प्रिंस से वादा किया कि इस इलाके में अमेरिका के किसी भी सहयोगी देश पर आतंकी हमला होता है तो वह रक्षा करने में मदद करेंगे। सऊदी प्रिंस ने पिछले दिनों ईरान के शीर्ष नेतृत्‍व से भी बात की है। सऊदी अरब को ईरान के खाड़ी देशों में बढ़ते असर का डर सता रहा है। यही वजह है कि वह अमेरिका से सुरक्षा कवच की मांग कर रहा है। इजरायल और अमेरिका दोनों ही ईरान को लेकर आक्रामक हैं। यही वजह है कि अमेरिका इजरायल और सऊदी अरब को साथ-साथ लाना चाहता है।

इस बीच भारत का इस पूरे मामले पर बेहद ही मानवीय दृष्टिकोण रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि इजरायल में आतंकवादी हमलों की खबर से गहरा सदमा लगा है. हमारी संवेदनाएं और प्रार्थनाएं निर्दोष पीड़ितों और उनके परिवारों के साथ हैं. हम इस कठिन समय में इजरायल के साथ एकजुटता से खड़े हैं। उन्होंने साथ ही साथ फिलिस्तीन को मानवीय मदद भी भेजी है। भारत ने पूरी तरह स्पष्ट किया है कि किसी किस्म का आतंकवाद भारत बर्दाश्त नहीं करेगा। और जिस तरह का ये अटैक हुआ है, एक नॉन स्टेट एक्टर टेरर ग्रुप हमास जिसको टेटर ग्रुप की लिस्ट में डाला जाता है, ने इस अटैक की जिम्मेदारी ली है, इसे किसी भी सूरत में न्यायसंगत नही ठहराया जा सकता।

इस सबका एक बड़ा पहलू इंडिया यूरोप मिडिल ईस्ट इकोनामिक कारिडोर भी है। हाल में दिल्ली में जो G20 शिखर सम्मेलन हुआ उसमें इंडिया, मिडिल-ईस्ट इकॉनमिक कॉरिडोर का एलान किया गया था। उसमें इजरायल भी शामिल है। इससे पहले आई टू, यू टू एग्रीमेंट हुआ था या इजरायल, यूएई और यूनाइटेड स्टेट कॉरिडोर। अमेरिका ने भी इस कारिडोर को हमास के हमले की एक वजह करार दिया है। अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा है कि इजराइल-हमास के बीच जंग की एक वजह भारत-मिडिल ईस्ट इकोनॉमिक कॉरिडोर भी हो सकता है। बाइडेन ने यह बात ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज के साथ मीटिंग के बाद कही। उन्होंने कहा- यह सिर्फ मेरा अनुमान है, इसे साबित करने के लिए मेरे पास कोई प्रूफ नहीं है। बड़ी बात है कि एक ही हफ्ते में यह दूसरी बार है जब बाइडेन ने हमास के हमले के पीछे इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप के इकोनॉमिक कॉरिडोर को एक अहम वजह बताया है। इस कॉरिडोर की घोषणा भारत में G20 समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी। यानि भारत एक ऐसी वजह बन चुका है जिस पर पूरी दुनिया की निगाहें हैं। भारत पर इजरायल की भी निगाह है और फिलिस्तीन की भी। संक्षेप में अगर समझें तो इजरायल फिलिस्तीन की जंग पूरी दुनिया का नक्शा बदलने जा रही है।

37 COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here