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भारत में पूंजी केवल बढ़ती नहीं, बल्कि कई गुना बढ़ती है: प्रधानमंत्री मोदी

तोक्यो। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि भारत और जापान मिलकर स्थिरता, वृद्धि और समृद्धि के लिए एशियाई सदी को आकार देंगे। मोदी ने यहां आयोजित भारत-जापान आर्थिक मंच को संबोधित करते हुए कहा कि जापान की उत्कृष्टता एवं भारत की व्यापकता एक आदर्श साझेदारी और पारस्परिक वृद्धि का निर्माण कर सकती है। प्रधानमंत्री आज सुबह दो दिवसीय यात्रा पर जापान की राजधानी तोक्यो पहुंचे। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापार और शुल्क नीतियों को लेकर अमेरिका के साथ भारत के संबंधों में तनाव है। भारत को एक आकर्षक निवेश गंतव्य के रूप में पेश करते हुए मोदी ने कहा कि देश में राजनीतिक एवं आर्थिक स्थिरता के साथ-साथ नीतिगत निर्णयों में पारदर्शिता के साथ भरोसेमंद होना है। उन्होंने कहा कि भारत में पूंजी केवल बढ़ती ही नहीं, बल्कि कई गुना बढ़ती है।

मोदी ने कहा, ” भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है और बहुत जल्द यह तीसरी सबसे बड़ी वैश्विक अर्थव्यवस्था बन जाएगा।” प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने कृत्रिम मेधा (एआई), सेमीकंडक्टर, क्वांटम कंप्यूटिंग, जैव प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष सहित कई प्रमुख क्षेत्रों में साहसिक एवं महत्वाकांक्षी पहल की हैं। उन्होंने कहा कि जापान की प्रौद्योगिकी और भारत की प्रतिभा मिलकर इस सदी की प्रौद्योगिक क्रांति का नेतृत्व कर सकती है। मोदी ने कहा कि भारत और जापान… मोटर वाहन क्षेत्र जैसी सफल साझेदारी अब रोबोटिक्स, सेमीकंडक्टर, जहाज विनिर्माण और परमाणु ऊर्जा के क्षेत्रों में भी बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत की विकास यात्रा में जापान सदैव एक महत्वपूर्ण साझेदार रहा है। मेट्रो से लेकर विनिर्माण तक, सेमीकंडक्टर से लेकर स्टार्टअप तक हर क्षेत्र में भारत-जापान साझेदारी आपसी विश्वास का प्रतीक बनी है।

मोदी ने कहा कि भारत ‘ग्लोबल साउथ’ में जापानी कंपनियों को एक आधार प्रदान करता है। भारत और जापान ‘ग्लोबल साउथ’ खासकर अफ्रीका के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। ‘ग्लोबल साउथ’ शब्द का इस्तेमाल आम तौर पर आर्थिक रूप से कम विकसित और विकासशील देशों के लिए किया जाता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की राजनीतिक और आर्थिक स्थिरता के साथ ही नीतियों में पारदर्शिता ने इसे विशेष रूप से हरित ऊर्जा, विनिर्माण और प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में एक आकर्षक निवेश स्थल बना दिया है। उन्होंने कहा कि जापानी कंपनियों ने भारत में 40 अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया है, जिसमें पिछले दो वर्षों में 13 अरब डॉलर का निवेश शामिल है। मोदी ने पिछले 11 वर्षों में देश में हुए उल्लेखनीय बदलावों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा, ”आज हमारे पास राजनीतिक और आर्थिक स्थिरता है, और स्पष्ट एवं भरोसेमंद नीतियां हैं। भारत अब दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है, और बहुत जल्द, यह दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा।”

प्रधानमंत्री ने कहा, ”भारत वैश्विक वृद्धि में 18 प्रतिशत का योगदान दे रहा है। देश के पूंजी बाजार अच्छा प्रतिफल दे रहे हैं, और हमारे पास एक मजबूत बैंकिंग क्षेत्र है। मुद्रास्फीति और ब्याज दरें कम हैं, और विदेशी मुद्रा भंडार लगभग 700 अरब अमेरिकी डॉलर है।” मोदी ने विनिर्माण, प्रौद्योगिकी और नवाचार, हरित ऊर्जा, अगली पीढ़ी के बुनियादी ढांचे, कौशल विकास और लोगों के बीच संबंधों को दोनों पक्षों के बीच सहयोग का मुख्य केंद्र बताया। मोदी ने कहा, ”भारत और जापान की साझेदारी रणनीतिक और स्मार्ट है। आर्थिक तर्क से प्रेरित होकर, हमने साझा हितों को साझा समृद्धि में बदल दिया है।” जापान को एक ‘तकनीकी महाशक्ति’ और भारत को एक ‘प्रतिभा महाशक्ति’ बताते हुए, उन्होंने कहा कि दोनों देश कृत्रिम मेधा, सेमीकंडक्टर, क्वांटम कंप्यूटिंग, जैव प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष समेत इस सदी की प्रौद्योगिकी क्रांति का नेतृत्व कर सकते हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जापान हमेशा से भारत की विकास यात्रा में एक प्रमुख भागीदार रहा है, चाहे वह मेट्रो नेटवर्क हो, विनिर्माण हो, सेमीकंडक्टर हो या स्टार्टअप। उन्होंने कहा, ”जापान की प्राद्योगिकी और भारत की प्रतिभा मिलकर इस सदी की तकनीकी क्रांति का नेतृत्व कर सकते हैं।” मोदी ने स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में संभावित सहयोग के बारे में भी विस्तार से बताया। उन्होंने कहा, ”भारत 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा की ओर तेजी से बढ़ रहा है। हमारा लक्ष्य 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा का है। सौर सेल से लेकर हरित हाइड्रोजन तक साझेदारी के अपार अवसर हैं।” उन्होंने कहा कि भारत और जापान के बीच एक संयुक्त ऋण व्यवस्था पर समझौता हुआ है और इसका उपयोग स्वच्छ और हरित भविष्य के निर्माण में सहयोग के लिए किया जा सकता है। प्रधानमंत्री ने अगली पीढ़ी के बुनियादी ढांचे पर भी बात की, जिस पर दोनों देश काम कर सकते हैं। उन्होंने कहा, ”पिछले दशक में, भारत ने अगली पीढ़ी के परिवहन और लॉजिस्टिक बुनियादी ढांचे में अभूतपूर्व प्रगति की है। हमारे बंदरगाहों की क्षमता दोगुनी हो गई है।

160 से ज्यादा हवाई अड्डे हैं। एक हजार किलोमीटर लंबी मेट्रो लाइनें बनाई गई हैं। जापान के सहयोग से मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल पर भी काम चल रहा है।” मोदी ने कहा, ”जापान की उत्कृष्टता और भारत का पैमाना एक आदर्श साझेदारी का निर्माण कर सकते हैं।” प्रधानमंत्री ने कहा कि कौशल विकास के क्षेत्र में भारत के कुशल श्रमिकों में वैश्विक जरूरतों को पूरा करने की क्षमता है। उन्होंने कहा, ”जापान भी इससे लाभान्वित हो सकता है। आप भारतीय प्रतिभाओं को जापानी भाषा और कौशल में प्रशिक्षित कर सकते हैं, और साथ मिलकर जापान के लिए कार्यबल तैयार कर सकते हैं। एक साझा कार्यबल साझा समृद्धि की ओर ले जाएगा।” प्रधानमंत्री ने अपनी सरकार के विभिन्न सुधार उपायों का भी उल्लेख किया और कहा कि उनका जोर ‘सुधार, प्रदर्शन और परिवर्तन’ पर रहा है। उन्होंने कहा, ”2017 में हमने ‘एक राष्ट्र-एक कर’ लागू किया था और अब हम इसमें नए और बड़े सुधार करने जा रहे हैं। कुछ सप्ताह पहले, हमारी संसद ने नई और सरलीकृत आयकर संहिता को भी मंजूरी दी है।” मोदी ने कहा कि उनकी सरकार के सुधार सिर्फ कर प्रणाली तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उन्होंने कारोबारी सुगमता पर भी पूरा जोर दिया है।

सरकार निर्यात को बढ़ावा देने के लिए जल्द ही कई कदम उठाएगी: पीयूष गोयल

नई दिल्ली। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को कहा कि सरकार देश के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए घरेलू एवं वैश्विक पहुंच बढ़ाने को लेकर जल्द ही कई कदम उठाएगी। उन्होंने निर्यातकों को व्यापार के मोर्चे पर किसी देश की एकतरफा कार्रवाई के कारण उत्पन्न मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं से निपटने के लिए हरसंभव मदद का आश्वासन भी दिया। अमेरिका ने 27 अगस्त से भारतीय सामानों पर 50 प्रतिशत का भारी शुल्क लगा दिया है। इस उच्च शुल्क से कपड़ा, चमड़ा, जूते और झींगा जैसे कुछ श्रम-प्रधान क्षेत्रों के निर्यात पर असर पड़ने की आशंका है। गोयल ने उद्योग जगत के एक कार्यक्रम में कहा, ” सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि आप सभी को किसी एकतरफा कार्रवाई से उत्पन्न वर्तमान स्थिति को संभालने में किसी भी तनाव या कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।”

उन्होंने उद्योग जगत से उन क्षेत्रों का पता लगाने का भी आग्रह किया जो इन शुल्क से प्रभावित हो सकते हैं और जिन्हें वैकल्पिक बाजारों की आवश्यकता है। मंत्री ने कहा, ” हम वाणिज्य मंत्रालय में, अपने दूतावासों के माध्यम से दुनिया के अन्य हिस्सों तक पहुंच रहे हैं ताकि उन अन्य अवसरों की तलाश की जा सके जिनका हम लाभ उठा सकते हैं। हम घरेलू खपत को बढ़ावा देने पर भी विचार कर रहे हैं…” उन्होंने कहा, ” आप जल्द ही अगले सप्ताह जीएसटी परिषद की बैठक देखेंगे… ताकि इन बदलावों का प्रभाव आप सभी को बहुत जल्दी महसूस हो सके और इससे पूरे घरेलू विनिर्माण क्षेत्र में मांग को तेजी से बढ़ावा मिल सके।” केंद्र ने माल एवं सेवा कर (जीएसटी) दरों को युक्तिसंगत बनाने पर गठित मंत्रिसमूह (जीओएम) के समक्ष पांच प्रतिशत और 18 प्रतिशत की दो-स्तरीय जीएसटी संरचना के साथ-साथ कुछ चुनिंदा वस्तुओं पर 40 प्रतिशत की विशेष दर का प्रस्ताव रखा है।

गोयल ने कहा कि सरकार निर्यात में विविधता लाने के लिए भारतीय दूतावासों सहित सभी संबंधित पक्षों के साथ परामर्श कर रही है। उन्होंने कहा, ” मैं आप सभी को आश्वस्त कर सकता हूं कि आने वाले दिनों में सरकार प्रत्येक क्षेत्र को सहायता देने के लिए विभिन्न कदम उठाएगी। इससे घरेलू पहुंच का विस्तार होगा तथा विश्वभर के अन्य बाजारों में पूरक अवसरों की तलाश होगी जिससे हमारी वैश्विक पहुंच बढ़ेगी। परिणामस्वरूप इस वर्ष हमारा निर्यात पिछले वर्ष के निर्यात से अधिक रहेगा।” मंत्री ने कहा, ” यह वर्ष हमारे आत्मविश्वास को परिभाषित करेगा।” वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का वस्तु एवं सेवा निर्यात 825 अरब अमेरिकी डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया। उन्होंने कहा कि वैश्विक बाजार में भारत का निर्यात हिस्सा कम है, इसलिए हमें व्यापार के मोर्चे पर वैश्विक अनिश्चितताओं के बारे में बहुत अधिक चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। गोयल ने कहा कि अगर कोई देश भारत के साथ अच्छा व्यापार समझौता करना चाहता है तो ”हम उसके लिए हमेशा तैयार हैं।”

उन्होंने कहा कि लेकिन अगर कोई हमारे साथ भेदभाव करने की कोशिश करता है तो… मुझे लगता है कि भारत की 140 करोड़ की आबादी में आत्मविश्वास और आत्मसम्मान है। इसे ध्यान में रखते हुए हम कभी झुकेंगे नहीं, न ही कभी कमजोर होंगे, हम साथ मिलकर आगे बढ़ते रहेंगे…” गोयल ने कहा, ” हम नए बाजारों का रुख करेंगे… मैं पूरे विश्वास के साथ कह सकता हूं कि इस साल हमारा निर्यात पिछले साल से अधिक रहेगा।” मंत्री ने कहा कि देश ने अतीत में कोविड-19 वैश्विक महामारी और परमाणु प्रतिबंधों जैसे संकटों का सफलतापूर्वक सामना किया है। निर्माण क्षेत्र के लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया में लगभग 10 लाख मकानों की मांग है। उन्होंने भारतीय व्यवसायों, श्रमिकों एवं विशेषज्ञों को इस अवसर का लाभ उठाने के लिए आमंत्रित किया और कहा कि ऑस्ट्रेलिया भारत से वित्तीय सहयोग, प्रौद्योगिकी विशेषज्ञता और कार्यबल समर्थन के लिए तैयार है।

दलितों, पिछड़ों और अति पिछड़ों के अधिकार छीनना चाहती है भाजपा, बिहार मे बोले राहुल गांधी

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने बृहस्पतिवार को दावा किया कि बिहार की मतदाता सूचियों से गरीब और वंचित वर्ग के करीब 65 लाख लोगों के नाम हटा दिए गए हैं, क्योंकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) दलितों, पिछड़ों और अति पिछड़ों के अधिकार छीनना चाहती है। अपनी ‘वोटर अधिकार यात्रा’ के तहत सीतामढ़ी में एक सभा को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि महाराष्ट्र की तरह बिहार में भी फर्जी मतदाताओं के नाम जोड़ने की कोशिश की जाएगी, लेकिन यहां की जनता और विपक्ष ‘वोट चोरी’ नहीं होने देंगे। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने अपनी ‘वोटर अधिकार यात्रा’ के 12वें दिन की शुरुआत से पहले सीतामढ़ी के प्रसिद्ध जानकी देवी मंदिर में पूजा-अर्चना की। राहुल गांधी ने सभा में कहा, ”अगर वोट चला जाएगा तो हिंदुस्‍तान के गरीब लोगों के पास कुछ नहीं रहेगा। यह शुरुआत वोट से हो रही है, वोट के बाद राशन कार्ड जाएगा, राशन कार्ड के बाद जमीन जाएगी, जमीन के बाद सारे के सारे अधिकार जाएंगे।”

उन्होंने दावा किया कि हिंदुस्‍तान का पूरा धन अदाणी-अंबानी को पकड़ाया जा रहा है। राहुल गांधी ने फिर से यह दावा किया कि महाराष्ट्र और हरियाणा में विधानसभा चुनाव में ‘वोट चोरी’ की गई। उन्होंने कहा, ”बिहार में 65 लाख लोगों के नाम मतदाता सूची से काटे गए हैं। यह मत सोचिए कि सिर्फ नाम काट रहे हैं, यह जोड़ेंगे भी। फर्जी मतदाताओं के नाम जोड़ेंगे। उसी तरह से नाम जोड़ा जाएगा जैसे लोकसभा चुनाव में महाराष्ट्र में एक करोड़ फर्जी मतदाता जोड़ दिए गए।” कांग्रेस नेता के अनुसार, महाराष्ट्र में जो भी नए मतदाता जोड़े गए, उनके सारे वोट भाजपा को मिले। उन्होंने एक बार फिर उल्लेख किया कि ”बेंगलुरु की महादेवपुरा विधानसभा सीट पर एक लाख से अधिक फर्जी मतदाताओं के नाम जोड़े गए थे।” राहुल गांधी ने कहा, ”हमने यहां यात्रा शुरू की है ताकि निर्वाचन आयोग को पता लग जाए कि बिहार की जनता होशियार है, सावधान है और भाजपा तथा निर्वाचन आयोग को बिहार में एक भी वोट चोरी नहीं करने देगी।”

उन्होंने संविधान की प्रति दिखाते हुए कहा, ”यह संविधान…मेरे जो दलित भाई हैं आप भूलिए मत, यह संविधान आंबेडकर जी ने देश को दिया है। यह कोई मामूली किताब नहीं है, यह हमारे लिए पवित्र किताब है। यह किताब हिंदुस्तान की किताब है, हमारी सोच की, हमारी विचारधारा की किताब है।” राहुल गांधी ने कहा, ”मैं सारे के सारे दलित भाईयों से कहना चाहता हूं कि आप याद रखिए कि आजादी से पहले आपकी क्या हालत थी, आपको अछूत कहा जाता था, लोग आपको छूते भी नहीं थे, मारा जाता था। जो भी अधिकार आपको मिले हैं, वह संविधान के कारण मिले हैं, संविधान ने आपको अधिकार दिए हैं।” उन्होंने दावा किया कि भाजपा के लोग दलितों, ईबीसी (अति पिछ़ड़ा वर्ग) और पिछड़ों से उनके अधिकार छीनना चाहते हैं। उन्होंने कहा, हमने अभी सिर्फ कर्नाटक का सबूत दिया है। हम आने वाले समय में लोकसभा चुनाव का सबूत देंगे, हरियाणा विधानसभा चुनाव का सबूत देंगे, बाकी प्रदेशों के चुनाव का सबूत देंगे और यह साबित कर देंगे कि भाजपा- आरएसएस वोट चोरी करके चुनाव जीतते हैं। कांग्रेस नेता ने कहा, बिहारियों की जो राजनीतिक समझ है, उसका कोई मुकाबला नहीं। बहुत सीखने को मिला है।

‘वोटर अधिकार यात्रा’ एक ‘तीर्थ यात्रा’ है, बिहार ‘वोट चोरों’ को सबसे पहले सजा देगा, बिहार में बोली कांग्रेस

कांग्रेस ने बृहस्पतिवार को ‘वोटर अधिकार यात्रा’ को एक ‘तीर्थ यात्रा’ करार दिया और दावा किया कि बिहार के लोग ‘वोट चोरों’ को सबसे पहले सजा देंगे और फिर देश के दूसरे राज्य भी उन्हें सजा देंगे। पार्टी के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने संवाददाताओं से बातचीत में यह भी बताया कि ‘वोटर अधिकार यात्रा’ का समापन एक सितंबर को पटना में ”विशाल पैदल मार्च” से होगा। पहले के कार्यक्रम के मुताबिक, इस यात्रा का समापन गांधी मैदान में ‘वोटर अधिकार रैली’ से होना था। खेड़ा ने कहा, ”वोटर अधिकार यात्रा का समापन पटना में एक सितंबर, 2025 को एक विशाल पैदल मार्च के साथ होगा। यह मार्च सुबह 11 बजे गांधी मैदान की गांधी प्रतिमा से शुरू होकर आंबेडकर जी की प्रतिमा पर समाप्त होगा। यह समापन ‘वोट चोरी’ के खिलाफ एक ऐसे आंदोलन का आरंभ होगा, जो पूरे देश में फैल चुका है।”

उन्होंने यात्रा के असर का उल्लेख करते हुए कहा, ”मैं इसे तीर्थ यात्रा मानता हूं क्योंकि एक पावन कार्य है कि वोट को चोरी से बचाने लिए महागठबंधन के मेहनत कर रहे हैं।” कांग्रेस नेता ने इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव का हवाला दिया और कहा कि ‘वोट चोरी’ अब नहीं चलेगी और ‘वोट चोरी’ की सबसे पहले सजा बिहार देगा। खेड़ा का कहना था, ”बिहार जो सजा देने वाला है, वो सजा पूरा हिंदुस्तान देने वाला है।” राष्ट्रीय जनता दल के सांसद संजय यादव ने कहा, ”बिहार के युवा रेलवे और सेना में नौकरी पाते थे, लेकिन भाजपा सरकार ने सारी नौकरियों पर ताला मार दिया। बिहार आज भाजपा-जद(यू) से 20 साल का हिसाब मांग रहा है।” उन्होंने दावा किया, ”बिहार में भ्रष्टाचार चरम पर है। गरीब को सताया जा रहा है। जिंदा लोगों को मुर्दा बताया जा रहा है। कुत्ता, बिल्ली, (डोनाल्ड) ट्रंप का प्रमाण पत्र बनाया जा रहा है। राजग की महाभ्रष्ट सरकार बिहार को सिर्फ कष्ट ही दे रही है।

बोर्ड से परीक्षा पुनर्मूल्यांकन की डॉक्टर की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को ‘डिप्लोमेट नेशनल बोर्ड’ परीक्षा में पुनर्मूल्यांकन की मांग करने वाली एक डॉक्टर की याचिका पर राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड से जवाब मांगा। न्यायमूर्ति विकास महाजन ने दिल्ली के गंगाराम अस्पताल में डिप्लोमेट नेशनल बोर्ड (डीएनबी) की प्रशिक्षु डॉक्टर द्वारा दायर याचिका पर राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड (एनबीई) और केंद्र को नोटिस जारी किया। अदालत ने एनबीई के वकील को निर्देश प्राप्त करने को कहा और मामले की अगली सुनवाई 29 अगस्त को करना तय किया। याचिकाकर्ता ने 14 अगस्त के नोटिस और सूचना बुलेटिन के खंड 5.3 में शर्त को ‘मनमाना’ बताते हुए उसे चुनौती दी है। इस शर्त में केवल दुर्लभ मामलों में पुनर्मूल्यांकन की अनुमति है, जब मूल्यांकनकर्ता ने किसी उत्तर पर गलत तरीके से यह टिप्पणी की हो कि उसे ‘हल करने का प्रयास नहीं किया गया’।

अधिवक्ता तन्वी दुबे के माध्यम से याचिकाकर्ता ने कहा कि ऐसी शर्त किसी भी अन्य परिस्थिति में पुनर्मूल्यांकन को रोकती है, जिसमें वर्तमान स्थिति भी शामिल है जिसमें मूल्यांकन ‘मनमाने ढंग से और लापरवाहीपूर्ण और अनुचित तरीके से किया गया और याचिकाकर्ता के वास्तविक और अपेक्षित अंकों में काफी अंतर है”। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि उसकी उत्तर पुस्तिकाओं में स्पष्ट रूप से विसंगति दिखाई दे रही थी, हालांकि, पारदर्शिता सुनिश्चित करने का कोई पैमाना नहीं था क्योंकि पुनर्मूल्यांकन का विकल्प उपलब्ध नहीं था। याचिका में कहा गया है कि केवल बिना हल किए गए प्रश्नों के मामले में पुनर्मूल्यांकन की अनुमति देने वाला खंड ‘पूरी तरह से दोषपूर्ण’ है क्योंकि इसने याचिकाकर्ता के लिए अपनी उत्तर कुंजी में किसी भी विसंगति के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने की पूरी गुंजाइश ही समाप्त कर दी।

भारत में उत्कृष्ट प्रतिभा है, फुटबॉल की बेहतरी के लिए अतिरिक्त प्रयास किए जाएंगे: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत में ‘उत्कृष्ट प्रतिभा’ है और वह खेल की बेहतरी के लिए अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) के संविधान मसौदे को अंतिम रूप देने के लिए ‘अतिरिक्त प्रयास’ करेगा। न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा, ”हम चाहते हैं कि चीजें आगे बढ़ें। यह एक असाधारण पल है। हम सभी सहयोग कर रहे हैं। भारत में उत्कृष्ट प्रतिभा है। हम सभी मिलकर काम करेंगे। हम अतिरिक्त प्रयास करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि चीजें व्यवस्थित हों। कुछ कोच कह रहे थे कि भारत में युवा स्तर पर प्रतिभा दुनिया में कहीं भी उपलब्ध प्रतिभा के बराबर है। हम कुछ भी नहीं रोक सकते।

सुनवाई के दौरान एआईएफएफ ने पीठ को सर्वोत्तम वैश्विक प्रथाओं के अनुरूप इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) के संचालन के लिए एक वाणिज्यिक भागीदार के चयन हेतु ‘खुली, प्रतिस्पर्धी और पारदर्शी निविदा प्रक्रिया’ आयोजित करने की जानकारी दी। उच्चतम न्यायालय एक सितंबर को एआईएफएफ के प्रस्ताव पर विभिन्न पक्षों की दलीलें सुनेगा। न्यायमित्र और वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने फीफा द्वारा एआईएफएफ को भेजे गए एक पत्र का हवाला दिया जिसमें 30 अक्टूबर की समय सीमा तय की गई है ताकि व्यवस्था को दुरुस्त किया जा सके और ‘भारत के उच्चतम न्यायालय से संशोधित एआईएफएफ संविधान को मंजूरी देने और एआईएफएफ संविधान का फीफा और एएफसी के नियमों और विनियमों के अनिवार्य प्रावधानों के साथ पूर्ण संरेखण सुनिश्चित करने के लिए एक निश्चित आदेश प्राप्त किया जा सके’।

शंकरनारायणन ने कहा कि फीफा देश की उच्चतम न्यायालय को शर्तें नहीं थोप सकता। पीठ ने कहा कि फीफा का पत्र अप्रासंगिक है और इस पर कोई ध्यान देने से इनकार कर दिया। उच्चतम न्यायालय ने इससे पहले एआईएफएफ और फुटबॉल स्पोर्ट्स डेवलपमेंट लिमिटेड (एफएसडीएल) को ‘मास्टर राइट्स’ समझौते के नवीनीकरण से संबंधित मुद्दे को सुलझाने के लिए कहा था जिसने आईएसएल का आगामी सत्र अभी तक शुरू नहीं किया जा सका है।

दो दिवसीय दौरे पर असम आएंगे गृहमंत्री अमित शाह, भाजपा संगठन की तैयारियों का जायजा लेंगे

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह असम के दो दिवसीय दौरे पर बृहस्पतिवार को यहां पहुंचेंगे। इस दौरान वह राज्य भाजपा की कोर कमेटी की बैठक में शामिल होंगे और अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों से संबंधित मुद्दों पर चर्चा करेंगे। शाह पहले 29 अगस्त को एक दिन के लिए राज्य का दौरा करने वाले थे। शाह ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ”दो दिवसीय दौरे पर असम के लिए रवाना हो रहा हूं। आज गुवाहाटी में भाजपा की कोर कमेटी की बैठक की अध्यक्षता करूंगा। कल सुबह क्षेत्र में साइबर सुरक्षा को मजबूत करने के लिए ‘नेशनल साइबर फॉरेंसिक लैब’ और अन्य कई परियोजनाओं की शुरुआत करूंगा।

शाह ने कहा, ”बाद में, मैं ‘राजग पंचायत प्रतिनिधि सम्मेलन’ और पूर्व मुख्यमंत्री गोलाप बोरबोरा जी के जन्म शताब्दी समारोह को संबोधित करूंगा। असम के उत्साही लोगों से मिलने के लिए उत्सुक हूं।” पोस्ट का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने कहा कि असम उनका स्वागत करने के लिए उत्सुक है। शर्मा ने कहा, ”आपके मार्गदर्शन से असम को शांति और विकास के नए आयाम स्थापित करने में मदद मिली है और हमें विश्वास है कि आपकी यह यात्रा लोगों की सेवा करने के हमारे संकल्प को और मजबूत करेगी।” इससे पहले, मुख्यमंत्री ने खानापाड़ा पशु चिकित्सा क्षेत्र में व्यवस्थाओं की समीक्षा की, जहां शुक्रवार को ‘पंचायत सम्मेलन’ आयोजित किया जाएगा। गृह मंत्री अपने आगमन के तुरंत बाद पार्टी मुख्यालय में कोर कमेटी की बैठक में भाग लेंगे, जहां बाद में वह भाजपा सदस्यों के साथ रात्रि भोज करेंगे।

मुख्यमंत्री ने बुधवार को कहा था, ”वह आगामी असम विधानसभा चुनावों की तैयारियों पर चर्चा करेंगे, जो पार्टी के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। गृह मंत्री इस पर विशेष ध्यान देते हैं।” शाह शुक्रवार को राजभवन की नव-निर्मित ब्रह्मपुत्र इकाई का उद्घाटन करेंगे। इसके बाद वह ‘नेशनल साइबर फॉरेंसिक लैब’ का उद्घाटन करेंगे और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी), सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) और असम राइफल्स की विभिन्न परियोजनाओं का लोकार्पण करेंगे। बाद में वह राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के नवनिर्वाचित पंचायत सदस्यों के एक सम्मेलन में भी शामिल होंगे। इस कार्यक्रम के बाद वह ज्योति-बिष्णु सांस्कृतिक परिसर की प्रगति की समीक्षा करेंगे। यह एक सभागार है, जिसकी क्षमता 5,000 लोगों की है। शाम को शाह राज्य के पहले गैर-कांग्रेसी मुख्यमंत्री गोलाप बोरबोरा की जयंती समारोह के शताब्दी वर्ष का उद्घाटन करेंगे। इसके बाद वह नयी दिल्ली के लिए रवाना होंगे।

जन सुनवाई सिर्फ मेरे आवास पर ही नहीं, बल्कि हर विधानसभा क्षेत्र में होगी: सीएम रेखा गुप्ता

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कैंप कार्यालय में उन पर हुए हमले के एक दिन बाद बृहस्पतिवार को कहा कि उनका ‘जन सुनवाई’ कार्यक्रम हर विधानसभा क्षेत्र में आयोजित किया जाएगा और यह केवल उनके आवास तक ही सीमित नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि वह दिल्लीवासियों के हितों के लिए लड़ना कभी बंद नहीं कर सकतीं। गुप्ता ने इस बात पर जोर दिया, “मेरे जीवन का हर क्षण और मेरे शरीर का हर कण दिल्ली के लिए समर्पित है।” उन्होंने कहा, “इन सभी अप्रत्याशित झटकों के बावजूद, मैं दिल्ली को कभी नहीं छोड़ूंगी।” मुख्यमंत्री ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ”अब जनसुनवाई केवल मेरे घर पर ही नहीं, दिल्ली की हर विधानसभा में होगी। आपकी मुख्यमंत्री, आपके द्वार।

अपने पिता की शिक्षाओं को याद करते हुए गुप्ता ने कहा, ”महिलाओं में तकलीफों से लड़ने की दोहरी ताक़त होती है। उन्हें अपने आप को साबित करने के लिए अनगिनत परीक्षाएं देनी पड़ती हैं। मैं भी तैयार हूं।” मुख्यमंत्री ने कहा, “मैं जब कॉलेज में थी, तब पापा ने मुझे कार चलाने के लिए दी। एक दिन बड़ा हादसा हो गया। मैं डर गई और मुझे दोबारा कार को हाथ लगाने से डर लगने लगा। तब पापा ने कहा कि जीवन में दुर्घटनाएं होती रहती हैं, डरकर रुकना नहीं है। आप रास्ते पर चलना नहीं छोड़ सकती।” उन्होंने कहा, “आज उनकी वही सीख फिर याद आ रही है। कल फिर एक दुर्घटना हुई, लेकिन मैं दिल्लीवासियों के हितों के लिए लड़ना कभी नहीं छोड़ सकती।

अगर संवैधानिक पदाधिकारी कर्तव्य न निभाएं, तो क्या अदालतें हाथ पर हाथ धरे रह सकती हैं: सुप्रीम कोर्ट

उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को केंद्र सरकार से पूछा कि अगर संवैधानिक पदाधिकारी अपने कर्तव्यों का निर्वहन न करें या राज्य विधानसभाओं में पारित विधेयकों पर राज्यपाल की ओर से निष्क्रियता दिखाई जाए, तो क्या संवैधानिक अदालतें हाथ पर हाथ धरे रह सकती हैं। प्रधान न्यायाधीश बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पांच-सदस्यीय संविधान पीठ ने यह टिप्पणी उस समय की, जब केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि अगर कुछ राज्यपाल विधानसभा में पारित विधेयकों को लंबित रखते हैं, तो न्यायिक समाधान के बजाय राज्यों को राजनीतिक समाधान तलाशने चाहिए। संविधान पीठ में प्रधान न्यायाधीश के अलावा न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति एएस चंदुरकर भी शामिल हैं। पीठ राष्ट्रपति के उस संदर्भ पर सुनवाई कर रही है, जिसके तहत उन्होंने यह जानने का प्रयास किया है कि क्या अदालतें राज्य विधानसभाओं में पारित विधेयकों पर विचार करने के लिए राज्यपालों और राष्ट्रपति के लिए समय-सीमा निर्धारित कर सकती हैं।

पीठ ने कहा कि अगर कोई गलती हुई है, तो उसका समाधान होना चाहिए। न्यायमूर्ति गवई ने मेहता से सवाल किया, “अगर संवैधानिक पदाधिकारी बिना किसी कारण के अपने कर्तव्यों का निर्वहन नहीं करते हैं, तो क्या एक संवैधानिक न्यायालय हाथ पर हाथ धरे रह सकता है?” मेहता ने कहा कि सभी समस्याओं के लिए अदालतें समाधान नहीं हो सकतीं और लोकतंत्र में बातचीत को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा, “अगर किसी राज्यपाल की ओर से कोई निष्क्रियता दिखाई जा रही है, जो राज्य दर राज्य भिन्न हो सकती है, और अगर कोई असंतुष्ट राज्य इस संबंध में अदालत का रुख करता है, तो क्या ऐसी निष्क्रियता की न्यायिक समीक्षा को पूरी तरह रोका जा सकता है। हमें बताइए, इसका समाधान क्या हो सकता है?” मेहता ने कुछ ‘लचीलापन’ अपनाने का आह्वान करते हुए कहा, “मान लीजिए कि राज्यपाल विधेयक को रोके बैठे हैं, तो ऐसे में कुछ राजनीतिक समाधान हैं, जिन्हें अपनाया जा सकता है।

हर जगह ऐसा नहीं होता कि मुख्यमंत्री सीधे अदालत पहुंच जाएं। कई उदाहरण हैं, जहां बातचीत होती है, मुख्यमंत्री राज्यपाल से मिलते हैं, वह प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति से मिलते हैं और समाधान निकाल लिये जाते हैं।” उन्होंने कहा कि गतिरोध सुलझाने के लिए कई बार टेलीफोन पर बातचीत की गई। मेहता ने कहा, “पिछले कई दशकों से, अगर कोई विवाद उत्पन्न होता है, तो उसे सुलझाने के लिए यही प्रक्रिया अपनाई जाती रही है। प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल, राष्ट्रपति से मिलते हैं और कई बार कोई मध्य मार्ग भी निकाल लिया जाता है।” उन्होंने राज्य सरकार और केंद्र के प्रतिनिधि राज्यपाल के बीच गतिरोध समाप्त करने के लिए दूरदर्शिता और राजनीतिक परिपक्वता अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। मेहता ने दलील दी, “मैं कह रहा हूं कि इस देश की हर समस्या का समाधान अदालत में ही मिले, यह जरूरी नहीं है। देश में कई ऐसी समस्याएं हैं, जिनका समाधान व्यवस्था के भीतर ही तलाशा जाता है।

उन्होंने कहा कि संविधान में कहीं भी राज्यपाल या राष्ट्रपति के लिए विधेयकों पर कार्रवाई करने के वास्ते कोई समय-सीमा निर्धारित नहीं की गई है। इस पर प्रधान न्यायाधीश ने मेहता से कहा, “अगर कुछ गलत हुआ है, तो उसका समाधान भी होना चाहिए। यह अदालत संविधान की संरक्षक है और इसे संविधान की व्याख्या शाब्दिक अर्थ देकर करनी होगी।” न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने प्रधान न्यायाधीश की राय से सहमति जताई। उन्होंने कहा, “अगर व्याख्या की शक्ति सर्वोच्च अदालत में निहित है, तो कानून की व्याख्या का प्रयास न्यायालय को ही करना चाहिए।” मेहता ने कहा कि न्यायसंगतता एक अलग बात है, जबकि संविधान में कुछ जोड़ना अलग बात है। उन्होंने कहा, “संवैधानिक पदाधिकारियों के साथ काम करते समय कुछ लचीलापन होना चाहिए। इस अदालत ने बार-बार विधि अधिकारी या प्रतिनिधि को बुलाया है और फैसले में जिक्र किए बिना ही कुछ काम करने को कहा है।” मेहता ने शीर्ष अदालत से कहा कि संसद को इस बात पर विचार करना चाहिए कि क्या संविधान में कोई संशोधन किया जाना है। उन्होंने कहा, “यह अदालत संसद से विधानसभा में पारित विधेयकों पर फैसला लेने के वास्ते राज्यपाल के लिए समयसीमा तय करने वाला कानून बनाने के लिए कह सकती है, लेकिन ऐसा इस अदालत के फैसले के जरिये नहीं किया जा सकता।

न्यायमूर्ति नरसिम्हा ने कहा, “अगर यह दलील देने के लिए अतिवादी दृष्टिकोण अपनाया जाता है कि आप ऐसा नहीं कर सकते, आप कहते हैं कि हमारे पास ऐसा करने की शक्ति ही नहीं है, तो आप संविधान का पालन कैसे सुनिश्चित करेंगे?” इसके बाद मेहता ने तमिलनाडु के राज्यपाल से जुड़े मामले में आठ अप्रैल के फैसले का जिक्र किया, जिसके कारण राष्ट्रपति का मौजूदा संदर्भ सामने आया है। उन्होंने कहा कि फैसले में कहा गया है कि राष्ट्रपति और राज्यपाल कारण दर्ज करेंगे और अगर वे समय-सीमा का पालन नहीं करते हैं, तो राज्य शीर्ष अदालत या उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकते हैं। मेहता ने कहा, “इसका मतलब यह है कि एक संस्था राष्ट्रपति को एक निश्चित समय-सीमा के भीतर ऐसा करने का निर्देश दे रही है। मैं निर्देशों का सम्मान करता हूं और इसके पीछे कोई औचित्य भी हो सकता है, लेकिन इससे अधिकार क्षेत्र नहीं निर्धारित किया जा सकता।” सुनवाई अभी जारी है। इससे पहले, प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि न्यायिक सक्रियता (ज्यूडिशल एक्टिविज्म) कभी न्यायिक अतिवाद (ज्यूडिशियल टैरेरिज्म) नहीं बननी चाहिए। उन्होंने यह टिप्पणी तब की, जब मेहता ने कहा कि निर्वाचित लोगों के पास काफी अनुभव होता है और उन्हें कभी भी कमतर नहीं आंकना चाहिए। न्यायमूर्ति गवई ने मेहता से कहा, “हमने निर्वाचित लोगों के बारे में कभी कुछ नहीं कहा। मैंने हमेशा कहा है कि न्यायिक सक्रियता कभी न्यायिक अतिवाद नहीं बननी चाहिए। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मई में संविधान के अनुच्छेद 143(1) के तहत हासिल शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए शीर्ष अदालत से यह जानने का प्रयास किया था कि क्या राज्य विधानसभाओं में पारित विधेयकों पर विचार करते समय राष्ट्रपति के लिए विवेकाधिकार का प्रयोग करने के वास्ते न्यायिक आदेशों के जरिये समय-सीमाएं निर्धारित की जा सकती है। शीर्ष अदालत ने आठ अप्रैल को तमिलनाडु विधानसभा में पारित विधेयकों के संबंध में राज्यपाल की शक्तियों पर विचार करते हुए राष्ट्रपति को निर्देश दिया था कि वे राज्यपाल द्वारा विचार के लिए सुरक्षित रखे गए विधेयकों पर संदर्भ प्राप्त होने की तिथि से तीन महीने के भीतर निर्णय लें।

ध्यान भटकाने के लिए गृह मंत्री ने ”वेपन ऑफ मास डिस्ट्रैक्शन” वाले विधेयक पेश किए: कांग्रेस

नई दिल्ली। कांग्रेस ने संसद के मानसून सत्र में गतिरोध बने रहने के लिए बृहस्पतिवार को सरकार को जिम्मेदार ठहराया और दावा किया कि गृह मंत्री अमित शाह ने ”वोट चोरी” जैसे कुछ प्रमुख मुद्दों से ध्यान भटकाने के मकसद से ”वेपन ऑफ मास डिस्ट्रैक्शन” (जनता का ध्यान भटकाने के हथियार) के रूप में तीन विधेयक पेश किए। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के बाद ‘पीटीआई-भाषा’ से यह भी कहा कि विपक्ष के बार-बार मांग करने के बावजूद सरकार अड़ी रही और उसने चुनाव प्रक्रिया को लेकर सदन में चर्चा नहीं कराई। रमेश ने कहा, ”इस सत्र की शुरुआत से ही विपक्ष की मांग थी कि पहलगाम, ऑपरेशन सिंदूर और एसआईआर पर चर्चा हो। इस सत्र की शुरूआत तत्कालीन उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के साथ एक धमाके से हुई।

उन्होंने कहा कि धनखड़ का इस्तीफा एक भूकंप की तरह था जिसकी रिक्टर स्केल पर तीव्रता 10 थी। कांग्रेस नेता ने कहा, ”सरकार ने एसआईआर (मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण) पर चर्चा कराने से इनकार किया, जबकि हमने यहां तक पेशकश की थी कि इसे एसआईआर नहीं कहकर ‘चुनावी सुधार’ या ‘चुनावी प्रक्रिया को मजबूत बनाना’ कह कर चर्चा कराई जाए, लेकिन सरकार नहीं मानी।” उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह द्वारा पेश तीन विधेयकों का हवाला देते हुए कहा कि यह असंवैधानिक है। रमेश ने कहा, ”विधेयकों में बुनियादी रूप से यही कहा गया है कि यदि आप मुख्यमंत्री या मंत्री हैं और आरोप लगने पर गिरफ्तार होने के बाद 30 दिनों के भीतर भाजपा में शामिल नहीं होते हैं तो आप पद से मुक्त हो जाएंगे, लेकिन आप भाजपा में शामिल हो जाएंगे तो आप वाशिंग मशीन में पाक-साफ हो जाएंगे।

उन्होंने कहा, ”यह विधेयक ‘वेपन ऑफ मास डिस्ट्रैक्शन’ विधेयक थे। वोट चोरी, उपराष्ट्रपति पद के लिए विपक्ष के साझा उम्मीदवार और अमेरिका से जुड़े मुद्दे के कारण सरकार विमर्श में पिछड़ गई थी। इसी से ध्यान भटकाने के लिए यह सब किया गया है।” केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष के विरोध और हंगामे के बीच लोकसभा में ‘संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025’, ‘संघ राज्य क्षेत्र शासन (संशोधन) विधेयक, 2025’ और ‘जम्मू कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2025’ पेश किए। बाद में उनके प्रस्ताव पर सदन ने तीनों विधेयकों को संसद की संयुक्त समिति को भेजने का निर्णय लिया। इनमें गंभीर आपराधिक आरोपों में गिरफ्तार किए गए और लगातार 30 दिन हिरासत में रखे गए प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को पद से हटाने के प्रावधान हैं।