Home Blog Page 3

पूर्व मुख्यमंत्री चौटाला के उत्तराधिकारियों की याचिका पर सीबीआई से दिल्ली हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला के कानूनी उत्तराधिकारियों द्वारा दायर उस याचिका पर बृहस्पतिवार को सीबीआई से जवाब मांगा, जिसमें आय से अधिक संपत्ति के मामले में दोषी करार दिये जाने के खिलाफ एक अपील में पक्षकार बनाए जाने का अनुरोध किया गया है। न्यायमूर्ति रविंदर डुडेजा ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को नोटिस जारी किया और मामले की सुनवाई 15 सितंबर के लिए स्थगित कर दी। चौटाला के कानूनी उत्तराधिकारी उस अपील को चुनौती देना चाहते हैं जो उन्होंने (चौटाला) जीवित रहने के दौरान दायर की थी।

याचिका में कहा गया है कि चौटाला का 20 दिसंबर 2024 को हरियाणा के गुरुग्राम में निधन हो गया और उनके चार साल के कारावास को उच्च न्यायालय पहले ही निलंबित कर चुका है। उच्च न्यायालय ने तीन अगस्त 2022 को, चौटाला को अधीनस्थ अदालत द्वारा लगाए गए 50 लाख रुपये के जुर्माने के साथ-साथ एक निजी मुचलका और एक जमानत राशि का भुगतान करने की शर्त पर उनकी सजा निलंबित करते हुए जमानत दी थी। अधीनस्थ अदालत ने 27 मई 2022 को चौटाला को दोषी करार दिया था और उन्हें 1993 से 2006 के दौरान आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के लिए चार साल की जेल की सजा सुनाई। साथ ही, 50 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था।

पूर्व मुख्यमंत्री ने सजा को निलंबित करने का अनुरोध करते हुए उच्च न्यायालय का रुख किया था। सीबीआई ने 2005 के इस मामले में 26 मार्च 2010 को आरोप पत्र दाखिल किया था, जिसमें उन पर 1993 से 2006 के बीच अपनी वैध आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप लगाया गया था। सीबीआई की प्राथमिकी के अनुसार, चौटाला ने 24 जुलाई 1999 से 5 मार्च 2005 तक हरियाणा का मुख्यमंत्री रहने के दौरान अपने परिवार के सदस्यों और अन्य लोगों के साथ मिलीभगत कर अपने नाम पर, परिवार के सदस्यों के नाम पर, आय के ज्ञात वैध स्रोतों से अधिक चल व अचल संपत्ति अर्जित की।

दिल्ली हाईकोर्ट ने डेटा चोरी के आरोप वाली याचिका पर एनालिटिक्स कंपनी से मांगा जवाब

दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक प्रतिद्वंद्वी कंपनी द्वारा दायर याचिका पर एक एनालिटिक्स कंपनी से जवाब मांगा है। याचिका में प्रतिद्वंद्वी कंपनी ने उसके प्राथमिक रियल एस्टेट डेटा की चोरी का आरोप लगाया है। न्यायमूर्ति मनमीत पी.एस. अरोड़ा ने रियल एस्टेट डेटा एनालिटिक्स कंपनी पीई एनालिटिक्स लिमिटेड (प्रॉपइक्विटी) द्वारा दायर याचिका में प्रतिवादी भुगोल एनालिटिक्स प्राइवेट लिमिटेड (सीआरई मैट्रिक्स के रूप में व्यापार) समेत इसके निदेशकों और कुछ कर्मचारियों को सम्मन जारी किया। अदालत ने 24 जुलाई के अपने आदेश में प्रतिवादियों को अपना लिखित बयान दाखिल करने के लिए समय दिया और मामले की सुनवाई 19 सितंबर के लिए स्थगित कर दी।

वादी ने आरोप लगाया है कि प्रतिवादी फर्म द्वारा दिए गए प्राथमिक आवासीय डेटा में स्पष्ट रूप से उनके डेटा से समानताएं पाई गई हैं और ये लगभग एक जैसे आंकड़े हैं। प्रॉपइक्विटी ने आरोप लगाया कि सीआरई मैट्रिक्स कंपनी 2021 से 2024 के बीच प्राथमिक आवासीय डेटा के क्षेत्र में काम भी नहीं कर रही थी, जबकि इसी अवधि के प्राथमिक डेटा मई 2025 में ‘इंडिया हाउसिंग रिपोर्ट’ नाम की एक रिपोर्ट में जारी किए गए थे। इसने आरोप लगाया कि प्रतिवादी फर्म ने अनैतिक तरीके से वादी के कुछ पूर्व कर्मचारियों को अपने यहां काम पर रख लिया। ये कर्मचारी महत्वपूर्ण पदों पर थे और उन्होंने कंपनी की गैर प्रतिस्पर्धा शर्त का उल्लंघन करते हुए इस्तीफा दे दिया तथा प्रतिद्वंद्वी कंपनी में शामिल हो गए। वादी ने कहा, ”उन्होंने (कर्मचारियों) प्रतिवादी कंपनी के साथ मिलकर साजिश रची और वादी के स्वामित्व वाले प्राथमिक आवासीय डेटा के लिए आपसी समझौता किया।” वादी ने प्रतिवादियों द्वारा कथित डेटा चोरी के कारण स्थायी निषेधाज्ञा और आठ करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति की मांग की है। वादी फर्म ने कहा कि उसने साइबर अपराध शाखा गुरुग्राम में पुलिस शिकायत भी दर्ज कराई है और पुलिस ने अपनी जांच शुरू कर दी है।

प्रस्तावित टनकपुर-बागेश्वर रेल परियोजना का सर्वेक्षण पूरा हुआ, डीपीआर तैयार: वैष्णव

नई दिल्ली। उत्तराखंड में 170 किलोमीटर लंबी प्रस्तावित टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन का सर्वेक्षण हो चुका है और इस परियोजना की लागत 48,692 करोड़ रुपये होगी, लेकिन इसमें यातायात कम रहने का अनुमान है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को लोकसभा को यह जानकारी दी। बागेश्वर जिले को रेल संपर्क प्रदान करने से संबंधित प्रश्नों का लिखित उत्तर देते हुए, वैष्णव ने कहा, ”टनकपुर-बागेश्वर नयी लाइन (170 किलोमीटर) के लिए सर्वेक्षण पूरा हो चुका है और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर ली गई है।

उन्होंने कहा, ”डीपीआर के अनुसार, परियोजना की लागत 48,692 करोड़ रुपये आंकी गई है। इस परियोजना में यातायात कम रहने का अनुमान है।” वैष्णव के अनुसार, डीपीआर तैयार होने के बाद, परियोजना को मंजूरी देने के लिए राज्य सरकारों सहित विभिन्न हितधारकों के साथ परामर्श और नीति आयोग, वित्त मंत्रालय आदि से आवश्यक मंजूरी की आवश्यकता होती है। वैष्णव ने कहा, ”चूंकि परियोजनाओं को मंजूरी देना एक सतत और गतिशील प्रक्रिया है, इसलिए सटीक समय-सीमा तय नहीं की जा सकती।’

हमला सिर्फ मुझ पर नहीं, बल्कि दिल्ली की सेवा करने के हमारे संकल्प पर हुआ: मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता

नई दिल्ली। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बुधवार को कहा कि ‘जन सुनवाई’ कार्यक्रम के दौरान उन पर हुआ हमला लोगों की सेवा करने के उनके संकल्प को डिगाने का एक ”कायरतापूर्ण प्रयास” है, लेकिन इससे उनका मनोबल नहीं टूटा है। बुधवार सुबह गुप्ता के कैंप कार्यालय में ‘जन सुनवाई’ के दौरान उन पर हमला किया गया। हमले के बाद अपनी पहली प्रतिक्रिया में गुप्ता ने इस बात पर जोर दिया कि जन सुनवाई कार्यक्रम पहले की तरह जारी रहेगा। मुख्यमंत्री ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ”आज सुबह जन सुनवाई के दौरान मेरे ऊपर हुआ हमला केवल मेरे ऊपर नहीं, बल्कि दिल्ली की सेवा और जनता की भलाई के हमारे संकल्प को डिगाने के लिए किया गया एक कायराना प्रयास है।

उन्होंने कहा, ”स्वाभाविक है कि इस हमले के बाद मैं सदमे में थी, लेकिन अब बेहतर महसूस कर रही हूं। मैं अपने सभी शुभचिंतकों से निवेदन करती हूं कि कृपया मुझसे मिलने के लिए परेशान न हों। मैं बहुत जल्द ही आपके बीच काम करती हुई दिखाई दूंगी।” गुप्ता ने कहा, ”ऐसे हमले मेरे हौसले और जनता की सेवा के संकल्प को कभी तोड़ नहीं सकते। अब मैं पहले से कहीं अधिक ऊर्जा और समर्पण के साथ आपके बीच रहूंगी। जन सुनवाई और जनता की समस्याओं का समाधान पहले की तरह ही गंभीरता और प्रतिबद्धता के साथ जारी रहेगा। आपका विश्वास और समर्थन ही मेरी सबसे बड़ी ताकत है।

आपके अपार स्नेह, आशीर्वाद और शुभकामनाओं के लिए मैं हृदय से आभार व्यक्त करती हूं।” पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, राजकोट (गुजरात) निवासी 41 वर्षीय आरोपी सकरिया राजेशभाई खिमजीभाई को हिरासत में ले लिया गया है और खुफिया ब्यूरो (आईबी) तथा दिल्ली पुलिस की संयुक्त टीम उससे पूछताछ कर रही है।

देश सस्ता हाइड्रोजन बनाकर तेल उत्पादक देशों की बराबरी कर सकता है: नितिन गडकरी

नई दिल्ली। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बुधवार को कहा कि यदि देश में हाइड्रोजन बनाने की लागत को एक डॉलर प्रति किलोग्राम तक लाया जा सका, तो वह ऊर्जा आयातक से वैश्विक निर्यातक बन सकता है। द एनर्जी एंड रिसोर्सेस इंस्टिट्यूट में आयोजित 24वें दरबारी सेठ स्मृति व्याख्यान में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वर्तमान में हाइड्रोजन की लागत लगभग पांच से छह डॉलर प्रति किलोग्राम है, जो पारंपरिक ईंधनों की तुलना में काफी महंगी है। गडकरी ने कहा, ” यदि हम इसे एक डॉलर प्रति किलोग्राम तक लाने में सफल हो जाते हैं, तो भारत मौजूदा तेल उत्पादक देशों के समान स्थिति में पहुंच जाएगा।” उन्होंने कहा कि हाइड्रोजन, ऊर्जा के भविष्य को आकार देने में निर्णायक भूमिका निभाएगा। मंत्री ने कहा कि सबसे बड़ी बाधा हाइड्रोजन ‘फिलिंग स्टेशन’ स्थापित करने और ईंधन के परिवहन के लिए प्रणालियां विकसित करने में है।

उन्होंने कहा, ” इन क्षेत्रों में तत्काल और व्यापक स्तर पर काम करने की आवश्यकता है।” ऊर्जा के लिए कचरे के उपयोग की संभावना के बारे में गडकरी ने कहा कि नगर निगम का ठोस कचरा ही काफी फायदेमंद साबित हो सकता है। उन्होंने कहा, “यदि हम कचरे को अलग करें, उसमें से जैविक पदार्थ निकालकर उसे ‘बायोडाइजेस्टर्स’ में डालें तो उससे मीथेन गैस बनती है। मीथेन को सीएनजी में बदलने के बजाय यदि हम इसका उपयोग ग्रीन हाइड्रोजन बनाने में करें तो केवल देश के नगर निगम के कचरे से ही बेहद सस्ती हाइड्रोजन उत्पन्न हो सकती है।” गडकरी ने कहा कि हाइड्रोजन, जीवाश्म ईंधन का स्थान ले लेगा। उन्होंने कहा, ” यह न केवल परिवहन के लिए महत्वपूर्ण होगा, बल्कि दवा, रसायन और इस्पात के क्षेत्र में भी इसका उपयोग होगा। इससे ट्रेनें चलेंगी, हवाई जहाज उड़ेंगे और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता समाप्त हो जाएगी। ” वैश्विक वाहन बाजार में देश के उदय पर प्रकाश डालते हुए मंत्री ने कहा कि देश हाल ही में जापान को पछाड़कर सातवें स्थान से तीसरे स्थान पर पहुंच गया है।

जीएसटी सुधारों पर राज्यों के साथ आम सहमति बनाने के प्रयास करेगा केंद्रः सीतारमण

नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को कहा कि अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधार भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक कदम हैं और केंद्र सरकार आने वाले हफ्तों में इस पर राज्यों के साथ आम सहमति बनाने का प्रयास करेगी। सीतारमण ने माल एवं सेवा कर (जीएसटी) में सुधारों पर गठित राज्यों के मंत्रियों के समूहों (जीओएम) के साथ मुलाकात में कहा कि जीएसटी सुधारों पर केंद्र का प्रस्ताव संरचनात्मक सुधार, दरों को युक्तिसंगत बनाने और जीवन को आसान बनाने के तीन स्तंभों पर आधारित है। जीएसटी दरों को युक्तिसंगत बनाने, बीमा पर कराधान और क्षतिपूर्ति उपकर पर बने मंत्री समूहों ने जीएसटी प्रणाली में व्यापक सुधारों के प्रस्ताव को लेकर सीतारमण के साथ मुलाकात की। बैठक के दौरान सीतारमण ने इस बात पर ज़ोर दिया कि केंद्र सरकार का यह प्रस्ताव देश के आत्मनिर्भर बनने की यात्रा में अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधारों की शुरुआत करने के दृष्टिकोण से है।

तीनों मंत्री समूह दो दिन तक केंद्र के ‘अगली पीढ़ी’ के जीएसटी सुधारों पर विचार-विमर्श करेंगे, जिसके तहत पांच और 18 प्रतिशत की सिर्फ दो दरें ही प्रस्तावित की गई हैं। इसके अलावा विलासिता एवं नुकसानदेह उत्पादों पर 40 प्रतिशत कर की एक विशेष दर रखी गई है। वित्त मंत्रालय ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट में कहा, ”केंद्र सरकार सहकारी संघवाद की भावना के साथ जीएसटी सुधारों की अगली पीढ़ी को लागू करने के लिए आने वाले हफ्तों में राज्यों के साथ व्यापक सहमति बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।” मौजूदा समय में पांच, 12, 18 और 28 प्रतिशत की दर से जीएसटी लगाया जाता है। खाद्य एवं आवश्यक वस्तुओं पर शून्य या पांच प्रतिशत कर लगता है। वहीं विलासिता एवं अहितकर वस्तुओं पर 28 प्रतिशत की दर से कर लगता है, जिसके ऊपर उपकर भी लगता है। सीतारमण ने मंत्री समूहों को लगभग 20 मिनट संबोधित किया जिसमें उन्होंने केंद्र की तरफ से रखे गए कर सुधार प्रस्ताव पर विस्तार से चर्चा की। इसमें कर दरों में कटौती और कारोबारियों के लिए अनुपालन बोझ को कम करने का प्रस्ताव है।

जीएसटी दर को युक्तिसंगत बनाने के लिए गठित मंत्री समूह को कर स्लैब एवं दरों में बदलाव और कुछ क्षेत्रों में शुल्क उलटफेर की समस्या खत्म करने का दायित्व सौंपा गया है। यह समूह 21 अगस्त को फिर बैठक करेगा। बीमा संबंधी मंत्री समूह स्वास्थ्य एवं जीवन बीमा प्रीमियम पर कर दर घटाने पर विचार कर रहा है जबकि क्षतिपूर्ति उपकर पर बना समूह ऋण भुगतान अवधि के बाद उपकर के भविष्य पर निर्णय लेगा। इन प्रस्तावों पर जीओएम की सहमति मिलने के बाद इन्हें अगले महीने जीएसटी परिषद की बैठक में रखा जाएगा। जीएसटी से संबंधित मामलों में नीतिगत निर्णय लेने का अधिकार जीएसटी परिषद के ही पास है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अपने संबोधन में दिवाली तक जीएसटी सुधार लागू करने की घोषणा की थी। एसबीआई रिसर्च की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दर सुधारों का प्रस्ताव लागू होने पर सरकार को सालाना करीब 85,000 करोड़ रुपये राजस्व का नुकसान हो सकता है। चालू वित्त वर्ष में एक अक्टूबर से प्रस्तावित दरें लागू होने पर नुकसान 45,000 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। रिपोर्ट के मुताबिक, जीएसटी की प्रभावी औसत दर लागू होने के समय के 14.4 प्रतिशत से घटकर सितंबर, 2019 में 11.6 प्रतिशत रह गई और दर सरलीकरण के बाद यह 9.5 प्रतिशत तक आ सकती है।

सीमा पार आतंकवाद समेत दुनिया की मुख्य चुनौतियों के समाधान में भारत अनिवार्य हिस्सा: राष्ट्रपति

नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को कहा कि भारत दुनिया की मुख्य चुनौतियों के समाधान का एक अनिवार्य हिस्सा है-चाहे वह ‘ग्लोबल नॉर्थ’ और ‘ग्लोबल साउथ’ के बीच असमानता से उत्पन्न मुद्दे हों, सीमा पार आतंकवाद के खतरे हों या जलवायु परिवर्तन की चुनौतियां हों। ‘ग्लोबल नॉर्थ’ शब्द का इस्तेमाल आमतौर पर आर्थिक रूप से विकसित और औद्योगिक देशों के लिए किया जाता है, वहीं ‘ग्लोबल साउथ’ का इस्तेमाल आर्थिक रूप से कम संपन्न देशों के संदर्भ में होता है। राष्ट्रपति भवन में भारतीय विदेश सेवा (2024 बैच) के प्रशिक्षु अधिकारियों के एक समूह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने उनसे “वसुधैव कुटुम्बकम” की भावना को अपनाते हुए “राष्ट्रहित सर्वोपरि” को ध्यान में रखने को कहा।

मुर्मू ने कहा कि उनके आसपास की दुनिया भू-राजनीतिक बदलावों, डिजिटल क्रांति, जलवायु परिवर्तन और बहुपक्षवाद के संदर्भ में तेज़ी से बदलाव देख रही है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षु अधिकारी ‘अमृत काल’ में भारतीय विदेश सेवा में शामिल हुए हैं-एक ऐसा समय जब भारत वैश्विक मंच पर एक अग्रणी शक्ति के रूप में अपनी भूमिका निभा रहा है। राष्ट्रपति ने कहा, “आज भारत विश्व की मुख्य चुनौतियों के समाधान का एक अनिवार्य हिस्सा है-चाहे वह ‘ग्लोबल नॉर्थ’ और ‘ग्लोबल साउथ’ के बीच असमानता से उत्पन्न मुद्दे हों, सीमा पार आतंकवाद के खतरे हों या जलवायु परिवर्तन की चुनौतियां हों।” उन्होंने कहा, “हमारी आवाज का महत्व है। हमारे राजनयिकों के रूप में, आप भारत का पहला चेहरा होंगे जिसे दुनिया आपके शब्दों में, आपके कार्यों में और आपके मूल्यों में देखेगी।

राष्ट्रपति ने कहा, “हम वसुधैव कुटुम्बकम की भावना को अपनाते हैं, लेकिन कृपया यह ध्यान रखें – राष्ट्रहित सर्वोपरी हो।” मुर्मू ने कहा कि देश के कूटनीतिक प्रयास “हमारी घरेलू ज़रूरतों और 2047 तक विकसित भारत बनने के हमारे उद्देश्य” के साथ निकटता से जुड़े होने चाहिए। राष्ट्रपति ने उनसे “हमारे सभ्यतागत ज्ञान- शांति, बहुलवाद, अहिंसा और संवाद” के मूल्यों को अपने साथ लेकर चलने का आग्रह किया। मुर्मू ने उनसे देश के 3.3 करोड़ प्रवासी समुदाय के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी याद रखने को कहा, जो भारत की विकास गाथा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा, “विदेश यात्राओं के दौरान भारतीय समुदायों के साथ मेरी बातचीत में, मैं उनकी ऊर्जा और अपने निवास देश और अपनी मातृभूमि, दोनों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता से बहुत प्रभावित हुई हूं। जैसे-जैसे दुनिया उथल-पुथल से गुज़र रही है, यह बेहद जरूरी है कि आप विदेश में खासकर संकट के समय में हमारे नागरिकों की जरूरतों को पूरा करें।

भारत को भविष्य के मिशनों के लिए 40 से 50 अंतरिक्ष यात्रियों को तैयार करने की जरूरत : मोदी

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि भारत को भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों का नेतृत्व करने के लिए 40-50 अंतरिक्ष यात्रियों का एक दल तैयार करना होगा। प्रधानमंत्री ने अंतरिक्ष में 20 दिन बिता कर लौटे शुभांशु शुक्ला से बातचीत के दौरान यह बात कही। शुक्ला एक्सिओम-4 वाणिज्यिक मिशन के जरिये अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र (आईएसएस) की यात्रा करने वाले पहले भारतीय बने। उन्होंने प्रधानमंत्री को बताया कि भारत के गगनयान मिशन को लेकर दुनिया भर में जबरदस्त रुचि है। प्रधानमंत्री के साथ सोमवार शाम को बातचीत में शुक्ला ने एक्सिओम-4 मिशन के तहत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) तक की अपनी अंतरिक्ष यात्रा, सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण स्थितियों के साथ तालमेल और कक्षीय प्रयोगशाला में किए गए प्रयोगों के बारे में अपने अनुभव भी साझा किए। इस बातचीत का वीडियो सोमावार को जारी किया गया।

प्रधानमंत्री ने कहा, ”भारत के भविष्य के मिशनों के लिए 40-50 अंतरिक्ष यात्रियों का एक दल तैयार करने की आवश्यकता है।” उन्होंने कहा कि शुक्ला की अंतरिक्ष यात्रा भविष्य के अंतरिक्ष मिशन की दिशा में पहला कदम है। मोदी ने कहा कि अब तक बहुत कम बच्चों ने अंतरिक्ष यात्री बनने के बारे में सोचा होगा, लेकिन शुक्ला की यात्रा से इस क्षेत्र में अधिक विश्वास पैदा होगा और रुचि पैदा होगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के सामने अब दो बड़े मिशन हैं – भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन और गगनयान, और इन प्रयासों में शुक्ला का अनुभव बहुत मूल्यवान होगा। शुक्ला ने कहा कि दोनों मिशन ने देश के लिए एक बड़ा अवसर प्रस्तुत किया है और चंद्रयान-2 मिशन जैसी असफलताओं के बावजूद अंतरिक्ष क्षेत्र के प्रति सरकार की निरंतर प्रतिबद्धता प्रशंसनीय है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा अंतरिक्ष कार्यक्रम को लगातार बजट उपलब्ध कराने के कारण चंद्रयान-3 को सफलता मिली।

शुक्ला ने कहा कि असफलताओं के बाद भी इस तरह के समर्थन को विश्व स्तर पर अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की क्षमता और स्थिति के प्रतिबिंब के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने कहा, ”भारत नेतृत्वकारी भूमिका निभा सकता है और भारत के नेतृत्व में अन्य देशों की भागीदारी से अंतरिक्ष केंद्र एक शक्तिशाली साधन होगा।” शुक्ला ने प्रधानमंत्री को बताया कि भारत की गगनयान परियोजना दुनिया भर में बहुत रुचि पैदा कर रही है। उन्होंने कहा, ”मेरे साथियों ने हस्ताक्षरित नोट भी मांगे, जिनमें उन्होंने प्रक्षेपण में आमंत्रित किए जाने तथा भारत के अंतरिक्ष यान में यात्रा करने की इच्छा व्यक्त की।” भारत की 2027 में अपना पहला मानव अंतरिक्ष यान भेजने तथा 2035 तक खुद का अंतरिक्ष स्टेशन बनाने की योजना है। भारत की 2040 तक चंद्रमा पर अपना अंतरिक्ष यात्री उतारने की भी योजना है।

दंपति को सुरक्षा प्रदान करने के आदेश को एनसीपीसीआर का चुनौती देना अजीब : सुप्रीम कोर्ट

उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को इस बात पर हैरानी जताई कि राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दे रहा है, जिसमें जान को खतरा होने की आशंका वाले एक मुस्लिम दंपति को सुरक्षा प्रदान की गयी थी। एनसीपीसीआर की याचिका को खारिज करते हुए न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने हैरानी जताई कि आयोग उच्च न्यायालय के 2022 के आदेश से कैसे प्रभावित है, जिसमें कहा गया था कि मुस्लिम लड़की का विवाह मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत आता है। उच्च न्यायालय के आदेश में कहा गया है कि 21 वर्षीय युवक से विवाह करने वाली लड़की की आयु 16 वर्ष से अधिक है।

शीर्ष अदालत ने कहा, “हम यह समझ नहीं पा रहे हैं कि इस तरह के आदेश से एनसीपीसीआर कैसे प्रभावित है। यदि उच्च न्यायालय संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत अपने अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करते हुए दो व्यक्तियों को संरक्षण प्रदान करना चाहता है, तो यह आश्चर्यजनक है कि एनसीपीसीआर ऐसे आदेश को चुनौती दे रहा है।” पीठ ने कहा कि एनसीपीसीआर को आदेश को चुनौती देने का कोई अधिकार नहीं है। पीठ ने पूछा, “दो लोग आए और उन्होंने अदालत से सुरक्षा का अनुरोध किया। अदालत ने सुरक्षा प्रदान की और आप उस आदेश को चुनौती दे रहे हैं?” एनसीपीसीआर के वकील ने कहा कि मामले से जुड़े क़ानूनी सवाल को देखते हुए उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती दी गई।

पीठ ने कहा कि इसमें कानून का कोई सवाल ही नहीं है, लेकिन बच्चों के संरक्षण के लिए गठित एनसीपीसीआर संरक्षण प्रदान करने वाले आदेश को कैसे चुनौती दे सकता है। पीठ ने उसी उच्च न्यायालय के एक अन्य आदेश के खिलाफ एनसीपीसीआर द्वारा दायर एक अलग याचिका को भी खारिज कर दिया। पीठ ने एनसीपीसीआर के वकील से कहा, “इससे बेहतर कोई और मामला उठाइए।” सितंबर 2022 के अपने आदेश में, उच्च न्यायालय ने 16 वर्षीय लड़की को याचिकाकर्ता पति को सौंपने का निर्देश दिया और उल्लेख किया कि दोनों मुस्लिम हैं। उच्च न्यायालय ने एक फैसले का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि मुस्लिम लड़की का विवाह मुसलमानों के पर्सनल लॉ के तहत ही होता है। फैसले के अनुसार, मुस्लिम महिला की यौवनावस्था की आयु 15 वर्ष है और अपनी इच्छा और सहमति से, यौवनावस्था प्राप्त करने के बाद, वह अपनी पसंद के व्यक्ति से विवाह कर सकती है और ऐसा विवाह बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 की धारा 12 के अनुसार अमान्य नहीं होगा।

चुनाव आयोग और भाजपा के बीच साझेदारी, हम एक वोट भी चोरी नहीं होने देंगे : राहुल

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच साझेदारी है और दोनों मिलकर वोट की चोरी कर रहे हैं। अपनी ”वोटर अधिकार यात्रा” के तीसरे दिन राहुल ने यह भी कहा कि महागठबंधन बिहार में एक भी वोट की चोरी नहीं होने देगा। तीसरे दिन की यात्रा गया जी के वजीरगंज से शुरू हुई और नवादा में दाखिल हुई। आज की यात्रा का समापन बरबीघा के श्रीकृष्ण चौक पर सभा के साथ होगा। उन्होंने नवादा के भगत सिंह चौक पर एक सभा को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि चुनाव आयोग और भाजपा के बीच साझेदारी है और ये मिलकर वोट चोरी कर रहे हैं। कांग्रेस नेता ने कहा, ”वोट आपका अधिकार है और यह अधिकार संविधान देता है।

नरेन्द्र मोदी, अमित शाह और चुनाव आयुक्त मिलकर यह अधिकार छीन रहे हैं।” उन्होंने कहा, ”मैं, तेजस्वी यादव और महागठबंधन के बाकी नेता कहना चाहते हैं कि हम बिहार में एक वोट भी चोरी नहीं करने देंगे।” उन्होंने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र, हरियाणा और मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनाव चोरी किए गए हैं। राहुल गांधी ने कहा कि अब बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के नाम पर नए तरीके से वोट की चोरी की जा रही है। उन्होंने कहा, ”हम इन्हें चोरी नहीं करने देंगे।” कांग्रेस नेता ने दावा किया, ”पहले आपका वोटर कार्ड जाएगा, फिर राशनकार्ड जाएगा और फिर आप लोगों की जमीन अदाणी और अंबानी को दी जाएगी। यह देश अदाणी और अंबानी का नहीं है, यह देश किसानों, मजदूरों और छोटे व्यापारियों का है।” उन्होंने सभा में कुछ ऐसे लोगों का खड़ा किया जिनके नाम मतदाता सूची से काटे गए हैं। राहुल ने कहा, ”ऐसे बिहार में लाखों लोग हैं जिन्होंने पहले वोट दिया, अब उनके नाम मतदाता सूची से काट दिए गए हैं।