Delhi News: दिल्ली नगर निगम को लेकर अमित शाह का बड़ा बयान, जानें AAP को लेकर क्या बोले गृहमंत्री

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नई दिल्ली। गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को राज्यसभा में कहा कि दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार दिल्ली नगर निगमों के साथ सौतेली मां जैसा व्यवहार कर रही है जिसके कारण शहर को लगातार हड़तालों का सामना कर पड़ रहा है। गृहमंत्री शाह ने सदन में दिल्ली नगर निगम (संशोधन) विधेयक 2022′ चर्चा के लिए पेश करते हुए कहा कि एक ही में अलग अलग स्थानीय निकाय होने के कारण दिल्ली में नागरिक सुविधाओं की हालत खराब हो गई है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में मौजूदा समय में पांच स्थानीय निकाय कार्य कर रहे हैं। दिल्ली का कुल क्षेत्रफल 1484 वर्ग किलोमीटर का है जिसमें तकरीबन 1400 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र दक्षिणी दिल्ली नगर निगम, उत्तरी दिल्ली नगर निगम और पूर्वी दिल्ली नगर निगम का शासन है। शेष हिस्से पर नई दिल्ली नगरपालिक परिषद और दिल्ली छावनी है।

उन्होंने कहा कि दिल्ली की आप पार्टी की सरकार ने स्थानीय शासन निकायों के साथ उचित व्यवहार नहीं किया जिसके कारण कम से कम दो निकायों के वित्तीय हालत चरमरा गई है। दिल्ली नगर निकायों में लगभग 1.20 लाख कर्मचारी काम करते हैं लेकिन ये अलग अलग नीतियों के तहत काम करते हैं। इससे आपसी तालमेल गडमडा गया है। गृहमंत्री ने कहा कि देश में कई स्थानों पर विरोधी विचारधारा की सरकारें होती है लेकिन उन्हें उनके संवैधानिक अधिकार दिए जाते हैं। लेकिन दिल्ली में आप पार्टी स्थानीय निकायों के साथ सौतेली मां जैसा व्यवहार कर रही है।

अच्छा नहीं रहा है दिल्ली नगर निगम के विभाजन का अनुभव : शाह

गृहमंत्री अमित शाह ने कहा, दिल्ली में स्थानीय निकाय वर्ष 1883 में पंजाब के अधीन बनाया गया। इसके वर्ष 1957 में दिल्ली नगर निगम कानून बना और वर्ष 2012 में इसका तीन हिस्सों में विभाजन कर दिया गया। उन्होंने कहा कि दिल्ली नगर निगम के विभाजन का कोई आधार नहीं था इसलिए यह भली भांति से काम नहीं कर पाया। पिछले 10 सालों में दिल्ली में 250 से ज्यादा हड़ताल हुई हैं जबकि इससे पहले की इसी अवधि में महज दो बार हड़ताल की स्थिति आई थी। गृहमंत्री शाह ने कहा कि दिल्ली नगर निगम के विभाजन का अनुभव अच्छा नहीं रहा है। वित्तीय आधार पर यह पूरी तरह से विफल साबित हुआ है। कर्मचारियों में असंतोष हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी है और देश विदेश पर इसका प्रभाव पड़ता है। राष्ट्रपति, उच्चतम न्यायालय, प्रधानमंत्री कार्यालय और आवास तथा संसद यहीं है। इसलिए दिल्ली में नागरिक सुविधाओं का सुचारु रुप से चलना आवश्यक है। सरकार इसके सुचारु संचालन के लिए ही यह विधेयक लेकर आई है।

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