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मेरे प्रति सार्वजनिक रूप से प्रेम के प्रदर्शन को अक्सर ”पूर्वनियोजित” करार दिया जाता है: मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उनके कार्यक्रम में एक बच्चे द्वारा हाथ से बनाई तस्वीर दिखाने पर टिप्पणी की कि जनता की ओर से प्रेम की ऐसी अभिव्यक्तियों को अक्सर उनके आलोचकों की ओर से ‘नाटक’ या ‘पूर्व नियोजित’ करार दिया जाता है। मोदी ने कहा कि वे देश के विभिन्न स्थानों का जब भी दौरा करते हैं, तब कई बार लोग इसी तरह के तरीकों से उनके प्रति अपना स्नेह या भावनाएं व्यक्त करते हैं। उन्होंने कहा लेकिन बाद में ऐसी रील बनाई जाती हैं जिनमें इस तरह के उदाहरणों को ”पूर्व नियोजित या नाटकीय” करार दिया जाता है। प्रधानमंत्री ने कहा, ” मैं इन सभी अपमानों को सह लेता हूं क्योंकि मैं समझता हूं कि आप मुझसे कितना प्यार करते हैं।

मैं इन बच्चों की भावनाओं को समझता हूं। इसलिए, रील बनाने वालों के अपमान को मैं स्वीकार कर लूंगा, लेकिन अगर किसी बच्चे ने इस तरह की चीज़ बनाने में प्यार और मेहनत लगाई है, तो मैं उस बच्चे का अपमान नहीं कर सकता। मैं उन्हें निराश नहीं कर सकता।” उन्होंने कहा, ”इसलिए, चाहे कितनी भी रील बनाई जाएं, लोगों के प्रति मेरी जिम्मेदारी और उनका मेरे प्रति भाव और भी मजबूत होगा।” मोदी ने अपना चित्र बनाने वाले लड़के से कहा कि वह चित्र के पीछे अपना नाम और पता लिख दे। उन्होंने बच्चे से कहा, ”मैं तुम्हें एक पत्र लिखूंगा।” उन्होंने सुरक्षा में तैनात एसपीजी जवानों से कहा कि वे उस लड़के और एक अन्य बच्चे से चित्र स्वीकार कर लें, जिसने प्रधानमंत्री के लिए कुछ बनाया था। मोदी ने यह टिप्पणी पुथारिकंदम मैदान में पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों की विशाल सभा को संबोधित करते हुए की।

अपनी ‘कमजोरी’ का असर अर्थव्यवस्था पर न पड़ने दें प्रधानमंत्री: राहुल गांधी

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने अमेरिकी शुल्क के कारण भारतीय कपड़ा उद्योग को ”हो रहे नुकसान” को लेकर शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधा और कहा कि उन्हें अपनी ‘कमजोरी’ का असर अर्थव्यवस्था पर और नहीं पड़ने देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका के साथ एक ऐसा व्यापार समझौता होना चाहिए जिसमें भारतीय व्यवसाय और मजदूरों को तवज्जो मिले। राहुल गांधी ने हाल ही में गुरुग्राम के निकट मानेसर में एक कपड़ा फैक्ट्री का दौरा किया और इसका वीडियो उन्होंने शुक्रवार को अपने यूट्यूब चैनल पर अपलोड किया। राहुल ने कहा, ”मोदी जी, आपकी जवाबदेही बनती है, कृपया इस मामले पर ध्यान दीजिए।”

उनका कहना था, ”भारत का कपड़ा उद्योग हमारी अर्थव्यवस्था में रोजगार देने के मामले में दूसरा सबसे बड़ा क्षेत्र है। हमारे कपड़े दुनिया भर में पसंद किए जाते हैं, और हमारे दर्जियों की कारीगरी का सच में कोई मुकाबला नहीं है।” कांग्रेस नेता ने कहा कि अमेरिकी शुल्क के कारण कपड़ा उद्योग बहुत अनिश्चितता का सामना कर रहा है। राहुल गांधी ने दावा किया, ”अमेरिका ने 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया है, यूरोप में कीमतें गिर रही हैं, बांग्लादेश एवं चीन से कड़ा मुकाबला है, हमारे कपड़ा उद्योग और कपड़ा निर्यातक हर तरफ से पिस रहे हैं।” उनका कहना था, ”इसका सीधा असर नौकरियों पर पड़ रहा है, इकाइयां बंद हो रही हैं, खरीद घट रही है और पूरे क्षेत्र में खलबली है।

कांग्रेस नेता ने कहा, ”नरेन्द्र मोदी ने कोई राहत नहीं दी है और न ही टैरिफ के बारे में बात की है, जबकि 4.5 करोड़ से ज़्यादा नौकरियां और लाखों बिज़नेस दांव पर लगे हैं।” उनके मुताबिक, इस क्षेत्र में काम करने वालों को उन्हें बस एक ऐसी सरकार चाहिए जो उन्हें वास्तविक सहयोग दे। राहुल गांधी ने कहा, ”यह बहुत ज़रूरी है कि भारत अमेरिका के साथ एक ऐसा व्यापार समझौता करे जिसमें भारतीय उद्योग और भारतीय मज़दूरों को वरीयता मिले। प्रधानमंत्री मोदी को अपनी कमज़ोरी का असर हमारी अर्थव्यवस्था पर और नहीं पड़ने देना चाहिए।

शंकराचार्य को स्नान से वंचित करना घोर अपराध- आप

आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता औऱ राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने उत्तर प्रदेश सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि वहां की सरकार ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को स्नान से वंचित करके घोर अपराध और पाप किया है। श्री सिंह ने शंकराचार्य से प्रयागराज में शुक्रवार को मुलाकात करने के बाद कहा कि शंकराचार्य को स्नान से वंचित कर उत्तर प्रदेश की सरकार ने घोर अपराध और पाप किया है।

उन्होंने कहा कि उससे भी बड़ी अपमानजनक बात यह है शंकराचार्य से शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगा जा रहा है। उन्होंने कहा कि जो लोग आज तक अपना डिग्री नहीं दिखा पाये वह शंकराचार्य से शंकराचार्य होने का प्रमाण मांग रहे है। उल्लेखनीय है कि मौनी अमावस्या के दिन पुलिस से विवाद के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में माघ मेले में शिविर के बाहर बैठे है। वह 18 जनवरी से ही अपने शिविर के बाहर धरने पर बैठे हुए हैं और मेला प्रशासन से ससम्मान स्नान कराने की मांग कर रहे हैं।

न्यायालय ने बैंकिंग धोखाधड़ी से जुड़ी जनहित याचिका पर अनिल अंबानी,एडीएजी को जारी किए नए नोटिस

उच्चतम न्यायालय ने अनिल अंबानी और अनिल धीरूभाई अंबानी समूह (एडीएजी) को एक जनहित याचिका पर शुक्रवार को नए नोटिस जारी किए। याचिका में कंपनी और उसकी समूह कंपनियों से जुड़े कथित बड़े पैमाने पर बैंकिंग और कॉर्पोरेट धोखाधड़ी की अदालत की निगरानी में जांच का अनुरोध किया गया है। उच्चतम न्यायालय ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को कथित धोखाधड़ी की जांच पर 10 दिन के भीतर सीलबंद लिफाफे में स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश भी दिया। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने इस तथ्य पर ध्यान दिया कि अनिल अंबानी और एडीएजी को याचिकाकर्ता तथा पूर्व केंद्रीय सचिव ई ए एस शर्मा द्वारा दायर जनहित याचिका के नोटिस पहले ही तामील किए जा चुके हैं।

पीठ ने पिछले साल 18 नवंबर को जनहित याचिका पर केंद्र सरकार, सीबीआई, ईडी, अनिल अंबानी और एडीएजी को नोटिस जारी किए थे। न्यायालय ने कहा कि अनिल अंबानी और एडीएजी को पेश होने और मामले में अपना जवाब दाखिल करने का यह आखिरी मौका है। बंबई उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल को अनिल अंबानी और एडीएजी को नोटिस तामील कराने और अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया गया। इसके बाद पीठ ने याचिका पर 10 दिन बाद सुनवाई तय की। पीठ ने इससे पहले याचिकाकर्ता शर्मा की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण द्वारा दिए गए निवेदनों पर ध्यान दिया और दोनों पक्षों से तीन सप्ताह के भीतर जवाब मांगा था। जनहित याचिका पर आगे की सुनवाई तीन सप्ताह बाद के लिए स्थगित कर दी थी।

भूषण ने आरोप लगाया कि जांच एजेंसियां इस बड़े बैंकिंग घोटाले में बैंकों और उनके अधिकारियों की कथित संलिप्तता की जांच नहीं कर रही हैं। उन्होंने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को इस मामले में बैंकों तथा उनके अधिकारियों के खिलाफ जारी जांच की स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश देने का अनुरोध किया था। भूषण ने कहा कि यह मामला ” संभवतः भारत के इतिहास की सबसे बड़ी कॉर्पोरेट धोखाधड़ी” है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्राथमिकी 2025 में दर्ज की गई जबकि धोखाधड़ी 2007-08 से जारी थी।

किसानों ने मजदूरों को रास्ता दिखाया, मनरेगा के लिए एकजुट होना है : राहुल गांधी

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने ‘महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम’ (मनरेगा) की जगह लाए गए ‘विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम’ को लेकर बृहस्पतिवार को भारतीय जनता पार्टी तथा केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला और लोगों का आह्वान किया कि वे सरकार के इस कदम के खिलाफ एकजुट होकर खड़े हों। उन्होंने कांग्रेस के प्रकोष्ठ ‘रचनात्मक कांग्रेस’ द्वारा आयोजित कार्यक्रम ‘मनरेगा बचाओ मोर्चा’ में यह आरोप भी लगाया कि भाजपा ने तीनों ‘काले’ कृषि कानून लाकर किसानों के साथ जो किया था, वही अब वह मनरेगा को खत्म कर मजदूरों के साथ करना चाहती है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने यह भी कहा कि भाजपा एक ऐसा हिंदुस्तान चाहती है जिसमें एक राजा सारे फैसले करे तथा देश के गरीब, अदाणी और अंबानी पर पूरी तरह निर्भर हो जाएं।

राहुल गांधी ने कहा, ”मनरेगा ने गरीबों को अधिकार दिया था। इसके पीछे यह सोच थी कि जिसे भी काम की जरूरत हो, वह सम्मान के साथ काम मांग सके। मनरेगा को पंचायती राज के तहत चलाया जाता था। मनरेगा में लोगों की आवाज थी, उनका अधिकार था- जिसे नरेन्द्र मोदी खत्म करने में लगे हैं।” उन्होंने कहा, ”कुछ साल पहले भाजपा ने ‘तीन काले कृषि कानून’ लाकर किसानों पर आक्रमण किया था लेकिन किसानों और हम सबने नरेन्द्र मोदी पर दबाव डाल कर उसे रोक दिया। अब उसी तरह का हमला मजदूरों पर करने की कोशिश हो रही है।” उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि उन्हें नए अधिनियम का नाम भी नहीं याद है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने दावा किया कि मनरेगा की जगह लाए गए नए कानून के तहत केंद्र सरकार निर्णय लेगी कि किस राज्य को कितना पैसा भेजा जाएगा। उनका कहना था, ”भाजपा शासित राज्य में ज्यादा पैसा जाएगा और विपक्ष शासित राज्य में कम पैसा जाएगा।

केंद्र सरकार ही तय करेगी कि कब कहां काम होगा, किसको कितनी मजदूरी मिलेगी। जो अधिकार मजदूरों को मिलते थे, अब वह ठेकेदारों को मिलेंगे। भाजपा की विचारधारा है कि देश का धन, संपत्ति चुने हुए हाथों में हो और वही लोग इस देश को चलाएं।” राहुल गांधी ने इस बात पर जोर दिया, ”भाजपा चाहती है कि देश से लोकतंत्र, संविधान और ‘एक व्यक्ति-एक वोट’ की परिकल्पना खत्म हो जाए। ये लोग आजादी से पहले वाला हिंदुस्तान फिर से लाना चाहते हैं। भाजपा वाले डरपोक लोग हैं, इन्हें रोकने के लिए हमें एक साथ खड़ा होना होगा।” कांग्रेस नेता ने कहा कि जिस दिन सब एकजुट हो गए, उस दिन मनरेगा फिर से बहाल हो जाएगा।

उच्च रक्तचाप को जीवनशैली की समस्या बताना विकलांगता पेंशन देने से इनकार का पर्याप्त कारण नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा है कि उच्च रक्तचाप को केवल जीवनशैली संबंधी स्वास्थ्य समस्या के रूप में वर्णित करना भारतीय वायुसेना (आईएएफ) के सेवानिवृत्त अधिकारी को विकलांगता पेंशन देने से इनकार करने का पर्याप्त कारण नहीं माना जा सकता। न्यायमूर्ति वी कामेश्वर राव और न्यायमूर्ति मनमीत पीएस अरोड़ा की पीठ ने कहा कि हर व्यक्ति की जीवनशैली अलग-अलग होती है और यह चिकित्सा बोर्ड का दायित्व है कि वह व्यक्ति की विधिवत जांच के बाद अपने निष्कर्षों की उचित वजह बताए। पीठ ने सशस्त्र बल न्यायाधिकरण के उस आदेश को चुनौती देने वाली केंद्र की याचिका को खारिज करते हुए यह आदेश पारित किया, जिसमें कहा गया था कि भारतीय वायुसेना के अधिकारी प्रारंभिक उच्च रक्तचाप के लिए विकलांगता पेंशन के हकदार हैं।

पीठ ने 19 जनवरी को पारित आदेश में कहा, “इस बात पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है कि हर व्यक्ति की जीवनशैली अलग होती है। इसलिए, केवल यह कहना कि बीमारी जीवनशैली से संबंधित विकार है, विकलांगता पेंशन देने से इनकार करने का पर्याप्त कारण नहीं हो सकता, जब तक कि चिकित्सा बोर्ड ने संबंधित व्यक्ति की विधिवत जांच और उससे संबंधित जानकारी दर्ज न कर ली हो।” उसने कहा, “हमारा मानना ​​है कि इस मामले के तथ्यों को देखते हुए, न्यायाधिकरण की ओर से निकाले गए निष्कर्ष को गलत नहीं ठहराया जा सकता। याचिका में कोई दम नहीं है, इसलिए इसे खारिज किया जाता है।” अधिकारी अक्टूबर 1981 में वायुसेना में शामिल हुए थे। वह 37 साल, पांच महीने और चार दिन की सेवा पूरी करने के बाद मार्च 2019 में सेवा मुक्त हुए थे। केंद्र ने उच्च रक्तचाप के लिए विकलांगता पेंशन देने का यह कहते हुए विरोध किया था कि अधिकारी को यह समस्या एक शांतिपूर्ण क्षेत्र में तैनाती के दौरान हुई थी, जिसके कारण न तो सैन्य सेवा से संबंधित थे और न ही सैन्य सेवा से बढ़े थे। उसने दलील दी थी कि चिकित्सा बोर्ड की जांच के मुताबिक, अधिकारी का उच्च रक्तचाप “अज्ञात कारण से/जीवनशैली से संबंधित विकार” था।

निर्वाचन आयोग का नया ऐप जारी, ज्ञानेश कुमार ने भ्रामक सूचनाओं से मुकाबले का हथियार बताया

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बृहस्पतिवार को मतदाताओं, अधिकारियों और राजनीतिक दलों के लिए एक नया डिजिटल ऐप जारी किया और कहा कि यह भ्रामक सूचना का मुकाबला करने का एक हथियार है। उन्होंने यहां एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भाग लेने वाले देशों के चुनाव प्रबंधन निकायों को उनकी भाषाओं में और उनके कानूनों के अनुसार इसी तरह का उपकरण विकसित करने में सहायता की पेशकश की। कुमार ने बताया कि सम्मेलन के दौरान विभिन्न चुनाव प्रबंधन निकायों के प्रमुखों ने भ्रामक सूचना के विषय पर चिंता व्यक्त की थी। उन्होंने ‘ईसीआईनेट’ को गलत सूचनाओं के प्रसार की चुनौती से निपटने के लिए एक औजार करार दिया क्योंकि इस पर चुनाव संबंधी सभी तथ्य उपलब्ध हैं।

‘ईसीआईनेट’ अपने 40 से अधिक मौजूदा मोबाइल और वेब एप्लिकेशन को एकीकृत करेगा तथा सभी चुनाव-संबंधी गतिविधियों के लिए एक एकल मंच प्रदान करेगा। यह नया प्लेटफ़ॉर्म उपयोगकर्ताओं पर कई ऐप डाउनलोड करने, ‘नेविगेट करने’ और विभिन्न लॉगिन याद रखने के बोझ को कम करेगा। इसके अतिरिक्त, ईसीआईनेट उपयोगकर्ताओं को अपने डेस्कटॉप या स्मार्टफोन पर प्रासंगिक चुनावी डेटा तक पहुंचने में भी सक्षम बनाएगा। यह सुनिश्चित करने के लिए कि डेटा यथासंभव सटीक है, ईसीआईनेट पर डेटा केवल निर्वाचन आयोग के अधिकृत अधिकारी द्वारा दर्ज किया जाएगा। संबंधित अधिकारी द्वारा की गयी प्रविष्टि यह सुनिश्चित करेगी कि हितधारकों को उपलब्ध कराया गया डेटा यथासंभव सटीक है। हालांकि, किसी भी टकराव की स्थिति में वैधानिक प्रपत्रों में विधिवत भरा हुआ प्राथमिक डेटा मान्य होगा। ईसीआईनेट, वोटर हेल्पलाइन ऐप, वोटर टर्नआउट ऐप, ‘सीविजिल’, सुविधा, सक्षम और केवाईसी ऐप जैसे मौजूदा ऐप को समाहित कर देगा, जिसके कुल मिलाकर 5.5 करोड़ से अधिक डाउनलोड हो चुके हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने बसंत पंचमी पर भोजशाला में हिंदुओं को दी पूजा की अनुमति; मुस्लिम को नमाज की इजाजत

उच्चतम न्यायालय ने मध्यप्रदेश के धार जिले में स्थित विवादित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद स्थल पर बसंत पंचमी के दिन शुक्रवार को सूर्योदय से सूर्यास्त तक हिंदुओं को पूजा-अर्चना करने, जबकि मुसलमानों को अपराह्न एक बजे से तीन बजे तक नमाज अदा करने की अनुमति दी है। न्यायालय ने बृहस्पतिवार को यह भी निर्देश दिया कि नमाज के लिए आने वाले मुस्लिम समुदाय के लोगों की सूची जिला प्रशासन को दी जाए। हिंदू और मुस्लिम समूहों ने 23 जनवरी शुक्रवार को भोजशाला परिसर में धार्मिक रस्मों के लिए अनुमति मांगी थी। उस दिन बसंत पंचमी के अवसर पर सरस्वती पूजा भी है।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत तथा न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने दोनों पक्षों से परस्पर सम्मान और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए राज्य और जिला प्रशासन के साथ सहयोग करने की अपील की। पीठ ने कहा, ”एएसजी (अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल) और महाधिवक्ता, दोनों ने उचित सुझाव दिया है कि यह जानने के बाद कि कल (शुक्रवार) दोपहर 1 से 3 बजे के बीच नमाज के लिए मुस्लिम समुदाय से कितने लोगों के आने की संभावना है, परिसर के भीतर एक विशेष और अलग स्थान उपलब्ध कराया जाए, ताकि निर्धारित समय पर नमाज अदा की जा सके।” न्यायालय ने कहा, ”इसी प्रकार, पहले की तरह, बसंत पंचमी के अवसर पर पारंपरिक अनुष्ठान के लिए हिंदू समुदाय को एक अलग स्थान उपलब्ध कराया जाए।” पीठ ने जिला प्रशासन को उस स्थान पर कानून व्यवस्था बनाए रखने का निर्देश दिया। शीर्ष अदालत ने कहा, ”कानून व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से जिला प्रशासन आगंतुकों के लिए निशुल्क उपयुक्त पास जारी कर सकता है या किसी भी अप्रिय घटना को टालने और अनुष्ठानों/रस्मों को शांतिपूर्वक संपन्न कराने के लिए अन्य उचित उपाय कर सकता है।

हिंदू समुदाय, भोजशाला को वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम समुदाय इसे कमाल मौला मस्जिद कहता है। यह स्थल भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित 11वीं शताब्दी का स्मारक है। एएसआई द्वारा सात अप्रैल 2003 को की गई एक व्यवस्था के तहत, हिंदू समुदाय के सदस्य मंगलवार को भोजशाला परिसर में पूजा-अर्चना करते हैं, जबकि मुस्लिम समुदाय के सदस्य शुक्रवार को परिसर में नमाज अदा करते हैं। न्यायालय ‘हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस’ द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रहा। याचिका में, बसंत पंचमी पर हिंदुओं को पूजा-अर्चना करने का विशेष अधिकार देने का अनुरोध किया गया था। अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन के मार्फत दायर याचिका पर मंगलवार को तत्काल सुनवाई के लिए उल्लेख किया गया था। जैन ने कहा था कि एएसआई के 2003 के आदेश में शुक्रवार के दिन बसंत पंचमी पड़ने से उत्पन्न होने वाली स्थिति का समाधान नहीं किया गया है। उन्होंने बसंत पंचमी के अवसर पर पूरे दिन हिंदुओं के लिए विशेष, निर्बाध पूजा-अर्चना की अनुमति देने का अनुरोध किया था। सुनवाई के दौरान, जैन ने दलील दी कि सूर्योदय से सूर्यास्त तक पूजा और हवन होंगे और उन्होंने पूरे दिन पूजा करने की अनुमति देने का अनुरोध किया।

वहीं, मस्जिद समिति की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने दलील दी कि शुक्रवार की नमाज दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच होती है और उसके बाद परिसर खाली किया जा सकता है। खुर्शीद ने यह भी कहा कि शुक्रवार को नमाज के लिए आने वाले मुस्लिम समुदाय के सदस्यों की अनुमानित संख्या जिलाधिकारी को उपलब्ध करा दी जाएगी। केंद्र सरकार और एएसआई की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज ने अदालत को आश्वासन दिया कि जिला प्रशासन कानून व्यवस्था का ध्यान रखेगा। उच्च न्यायालय ने मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी द्वारा दायर उस अपील का भी निस्तारण कर दिया, जिसमें परिसर के ”वैज्ञानिक सर्वेक्षण” संबंधी मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के 11 मार्च 2024 के आदेश को चुनौती दी गई थी। उच्चतम न्यायालय ने उच्च न्यायालय को निर्देश दिया कि इस मामले की सुनवाई उच्च न्यायालय के वरिष्ठतम न्यायाधीशों में से किसी एक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ द्वारा की जाए। यह देखते हुए कि एएसआई ने वैज्ञानिक सर्वेक्षण पूरा कर लिया है और अपनी रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में उच्च न्यायालय को सौंप दी है, शीर्ष अदालत ने उच्च न्यायालय को निर्देश दिया कि वह रिपोर्ट को सार्वजनिक करे और संबंधित पक्षों को उपलब्ध कराए, जो इस पर आपत्ति दाखिल कर सकते हैं। पीठ ने कहा कि आपत्तियां दाखिल की जाएं और उसके बाद मामले को अंतिम सुनवाई के लिए लिया जाए। शीर्ष अदालत ने कहा कि जब तक याचिका पर अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, सभी पक्ष घटनास्थल पर यथास्थिति बनाए रखें और वे एएसआई के आदेश का पालन करना जारी रखेंगे।

अनुच्छेद 15(5) पूरी तरह लागू हो, क्रियान्वयन की निगरानी का जिम्मा किसी नियामक को मिले : कांग्रेस

कांग्रेस ने संसद की एक समिति की रिपोर्ट का हवाला देते हुए मंगलवार को कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों में वंचित वर्गों के लिए आरक्षण के प्रावधान वाले अनुच्छेद 15(5) के क्रियान्वयन की निगरानी का दायित्व किसी नियामक को दिया जाना चाहिए। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह भी कहा कि इस अनुच्छेद को पूर्ण रूप से लागू करना चाहिए। अनुच्छेद 15 (5) के तहत निजी और सरकारी सहायता प्राप्त शैक्षणिक संस्थानों में अन्य पिछड़े वर्गों, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण का प्रावधान है। रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025 के तहत देश में उच्च शिक्षा के लिए एक एकल नियामक स्थापित करने का प्रस्ताव है। यह विधेयक 15 दिसंबर 2025 को लोकसभा में पेश किया गया था और अगले ही दिन इसे एक संयुक्त संसदीय समिति को भेज दिया गया।

उन्होंने कहा, “ऐसे किसी नियामक को संविधान के अनुच्छेद 15(5) के क्रियान्वयन की निगरानी का दायित्व दिया जाना चाहिए, जो आज से ठीक बीस वर्ष पहले अस्तित्व में आया हो। अनुच्छेद 15(5) को डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार ने 93वें संविधान संशोधन के माध्यम से जोड़ा था। यह एक ऐतिहासिक क्षण था, जिसने आईआईटी, आईआईएम, केंद्रीय विश्वविद्यालयों और एनआईटी सहित केंद्र द्वारा वित्त-पोषित उच्च शिक्षा संस्थानों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के छात्रों के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण की अनुमति दी।” उनका कहना है कि तब से अब तक ओबीसी समुदाय के लाखों छात्रों ने इस आरक्षण का लाभ उठाया है, जिससे करोड़ों लोगों को आर्थिक और सामाजिक गतिशीलता मिली है। रमेश ने कहा, “अनुच्छेद 15(5) सरकार को यह भी अनुमति देता है कि वह निजी उच्च शिक्षा संस्थानों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और ओबीसी समुदायों के छात्रों के लिए आरक्षण अनिवार्य कर सके। हालांकि, इसे बाद में उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी गई थी।

कांग्रेस नेता ने कहा, “छह मई 2014 को, प्रमति एजुकेशनल एंड कल्चरल ट्रस्ट बनाम भारत संघ मामले में, उच्चतम न्यायालय ने अनुच्छेद 15(5) की वैधता को स्पष्ट रूप से बरकरार रखा और यह साफ किया कि निजी उच्च शिक्षा संस्थानों में भी अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और ओबीसी छात्रों के लिए आरक्षण की अनुमति है। हालांकि, वर्तमान में संसद द्वारा ऐसा कोई कानून पारित नहीं किया गया है जो अनुच्छेद 15(5) को लागू कराए।” उन्होंने उल्लेख किया, “अगस्त 2025 में, शिक्षा पर संसदीय स्थायी समिति ने एक रिपोर्ट प्रस्तुत की थी, जिसमें संसद से निजी उच्च शिक्षा संस्थानों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और ओबीसी समुदायों के लिए आरक्षण अनिवार्य करने वाला कानून पारित करने का आग्रह किया गया था। समिति ने पाया कि निजी शैक्षणिक संस्थानों में इन समुदायों का प्रतिनिधित्व अत्यंत और अस्वीकार्य रूप से कम है।” रमेश ने कहा कि इस ऐतिहासिक अवसर पर, कांग्रेस पार्टी अनुच्छेद 15(5) में निहित सामाजिक न्याय के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराती है और मोदी सरकार से इसे पूर्ण रूप से लागू करने की मांग करती है।

नितिन नवीन पार्टी से संबंधित मामलों में मेरे ”बॉस” हैं : प्रधानमंत्री मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को नितिन नवीन को भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने पर बधाई दी और कहा कि पार्टी से संबंधित मामलों में यह युवा नेता उनका ‘बॉस’ होगा। यहां पार्टी मुख्यालय में एक सभा को संबोधित करते हुए मोदी ने 45 वर्षीय नवीन को एक ”मिलेनियल” बताया, जो उस पीढ़ी से ताल्लुक रखते हैं जिसने भारत में बहुत सारे बदलाव देखे हैं। नवीन को संगठन पर्व के समापन पर पार्टी मुख्यालय में भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित किया गया, जिसमें बूथ स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक के विभिन्न पार्टी पदों के लिए चुनाव हुए। मोदी ने कहा, ”जब बात पार्टी के विषयों की आती है, तब माननीय नितिन नवीन जी…मैं एक कार्यकर्ता हूं और आप मेरे बॉस हैं।

उन्होंने कहा, ”अब माननीय नितिन नवीन जी हम सभी के अध्यक्ष हैं और उनका दायित्व सिर्फ भाजपा को संभालना ही नहीं है बल्कि राजग के सभी साथियों के बीच तालमेल का दायित्व भी उन्हें संभालना है।” प्रधानमंत्री ने कहा कि नवीन उस युग से ताल्लुक रखते हैं जिसमें लोग बचपन में रेडियो पर खबरें सुनते थे और अब कृत्रिम मेधा (एआई) का उपयोग करने में माहिर हैं। मोदी ने कहा, ”नितिन जी में युवा ऊर्जा और भरपूर अनुभव दोनों हैं।” उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी, लाल कृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी के नेतृत्व में भाजपा ने शून्य से शिखर तक का सफर तय किया है।

मोदी ने कहा, ”इस सदी में एम. वेंकैया नायडू और नितिन गडकरी जैसे नेताओं के साथ-साथ हमारे कई वरिष्ठ सहयोगियों ने संगठन का विस्तार किया। राजनाथ जी के नेतृत्व में पहली बार भाजपा ने अपने दम पर पूर्ण बहुमत हासिल किया।” उन्होंने कहा, ”फिर अमित शाह के नेतृत्व में भाजपा ने कई राज्यों में सरकारें बनाईं और केंद्र में लगातार दूसरी बार सत्ता में आई। जेपी नड्डा के नेतृत्व में भाजपा पंचायत से लेकर संसद तक हर स्तर पर मजबूत हुई।