जम्मू कश्मीर में आतंक फैलाने वाले यासीन मलिक को उम्रकैद, कोर्ट ने लगाया 10 लाख रुपये का अर्थदंड

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90 के दशक में जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद का पर्याय रहे जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के सरगना यासीन मलिक को उसके जघन्य अपराधों के लिए 32 साल बाद बुधवार को दिल्ली की एक विशेष अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई। मलिक को आतंकवाद, राजद्रोह और आपराधिक साजिश आदि विभिन्न धाराओं के तहत अलग-अलग अवधि की कारावास की सजा और कई रकम के जुर्माने किए गए हैं, जिनमें 10 लाख रुपये का जुर्माना भी शामिल है। अदालत ने कहा है कि मलिक के कैद की विभन्नि सजायें एकसाथ चलेंगी।

मलिक के खिलाफ राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के मामलों की सुनवाई करने वाली पटियाला हाउस कोर्ट की विशेष अदालत के न्यायाधीश प्रवीण सिंह ने यासीन मलिक को सजा सुनाते हुए स्पष्ट किया कि सभी सजाएं एक साथ चलेंगी और आजीवन कारावास का मतलब जीवन के अंत तक होगा। उन्होंने कहा कि दोषी के अपराध बहुत ही गंभीर प्रकृति के हैं। इन अपराधों का इरादा भारत की अवधारणा के मूल पर प्रहार करना था। इसके साथ ही भारत संघ से जम्मू-कश्मीर को जबरदस्ती अगल करने का इरादा था। एनआईए न्यायाधीश ने कहा कि सजा देने के लिए प्राथमिक विचार यह होना चाहिए कि यह इस तरह के रास्ते पर चलने वाले लोगों को रोके। अदालत के फैसले से पहले जम्मू-कश्मीर में श्रीनगर में तनाव का माहौल था। श्रीनगर के लाल चौक पर दुकानें बंद थीं,पर यातायात चालू था। आतंकवादी सरगना मलिक जनवरी 1990 में कश्मीर में स्क्वाड्रन लीडर रवि खन्ना सहित भारतीय वायुसेना के चार अधिकारियों और जवानों की हत्या के मामले चर्चित हुआ था। उसके खिलाफ 2017 में आतंकवाद और विघटनकारी करतूतों में शामिल होने के आरोपों में मामला दायर किया गया था। इसी वर्ष मार्च में अदालत ने मलिक और अन्य के विरुद्ध गैर कानूनी गतिविधियां निवारक (यूएपीए) अधिनियम की धाराओं के तहत मुकदमा चलाये जाने का आदेश दिया था।

मलिक के वकील उमेश शर्मा ने कहा कि उसके मुवक्किल को आजीवन कारावास की दो सजाओं के अलावा 10 अभियोगों में 10 साल की बामशक्कत कैद की सजायें सुनायी गयी हैं और उन पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। उन्होंने कहा कि सभी सजायें एकसाथ चलेंगी। मलिक के विरुद्ध 10 वर्ष के कारावास और 10 हजार रुपये का जुर्माना एक जुर्माना भारतीय दंडिता संहिता के तहत सुनाई गयी है। इसी तरह सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ना, युद्ध छेड़ने का प्रयास करना या युद्ध छेड़ने को बढ़ावा देने के जुर्म में धारा 121 के तहत उम्रकैद तथा युद्ध छेड़ने की साजिश के आरोप में धारा 121 ए के तहत 10 साल की सजा तथा 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। उसे आतंकवाद के लिए धन जुटाने के आरोप में यूएपीए की धारा 17 के तहत उम्र कैद और 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इसी तरह धारा 20 (आतंकवादी गिरोह या संगठन से नाता रखने) के आरोप में 10 साल की सजा और 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है और धारा 18 (आतंकवाद की साजिश) के तहत 10 साल की सजा और 10 हजार रुपये का जुर्माना किया गया है। उसे यूएपीए की धारा 38 और 39 के तहत पांच साल की सजा पांच हजार रुपये के जुर्माना भी भुगतना पड़ेगा।

मलिक और अन्य के खिलाफ यूएपीए की धारा 16 (आतंकवाद में संलप्तिता), धारा 17 (आतंकवाद के लिए धन जुटाना), धारा 18 (आतंकवाद की साजिश) और धारा 20(आतंकवादी गिरोह या संगठन से नाता) और भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी (आपराधिक षडयंत्र) और 124 ए राजद्रोह के अभियोग लगाए गए थे। मलिक ने 19 मई 2022 को एनआईए के मामलों की सुनवाई करने वाली पटियाला हाउस कोर्ट की विशेष अदालत में अपने जुर्म कबूल किये थे। अदालत ने इस मामले में सजा सुनाने के लिए आज अपराह्न का समय नर्धिारित किया था। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अदालत परिसर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गयी थी और परिसर सुरक्षा कर्मियों के शिविर जैसा लग रहा था। सुरक्षा में पुलिस के अलावा अर्द्धसैनिक बल के दस्ते भी तैनात किये गये थे। परिसर में मलिक को लाये जाने से पहले बम नस्तिारण दस्ते और प्रशक्षिति कुत्तों से जांच करायी गयी थी। न्यायालय कक्ष में विशेष एनआईए न्यायाधीश प्रवीण सिंह के करीब साढ़े पांच से पहुंचने से पहले मलिक को वहां लाया गया था।बुधवार को अदालती कार्रवाई के दौरान एनआईए ने मलिक को मृत्यु दंड दिये जाने की दलील दी थी।मलिक के मामले में फैसला अपराह्न साढ़े तीन बजे सुनाया जाना था लेकिन इसमें घंटे भर से अधिक देरी हुई।

इस बीच, जम्मू-कश्मीर में श्रीनगर में यासीन के घर मैसुमा इलाके में पथराव की छिटपुट घटनाओं की रिपोर्ट आयी हैं। स्क्वाड्रन लीडर खन्ना की पत्नी नर्मिल खन्ना ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वह जेकेएलएफ के इस आतंकवादी को मौत की सजा चाहती हैं। उन्होंने कहा कि वह उनके पति की हत्या के बावजूद 32 साल तक जीवित बचा है। उन्होंने सजा सुनाये जाने से पहले जम्मू में संवाददाताओं से कहा था,ह्ल मैं अपने मामले में चाहूंगी कि ‘मौत के बदले मौत’ की सजा मिले। जहां तक आतंकवादियों को धन पहुंचाने का मामला है तो मलिक को उसमें अदालत जो उचित समझे, सजा दे। अदालत में उपस्थित वकील के अनुसार जेकेएलएफ सरगना मलिक के अधिवक्ता ने कहा कि उसके मुवक्किल ने 28 साल पहले ही हिंसा का रास्ता छोड़ चुका है और तब से किसी हिसंक वारदात में शामिल नहीं रहा है। मलिक के खिलाफ इस मामले में जांच एजेंसी ने मलिक, अलगाववादी कश्मीरी कार्यकर्ता फारुक अहमद डार उर्फ बट्टिा कराटे, नईम खान, मोहम्मद अहमद खांडे, राजा महरुद्दीन कलवाल, बशीर अहमद भट्ट, जहूर अहमद शाह वटाली, शब्बीर अहमद शाह, अब्दुल रशीद शेख और नवल किशोर कपूर को आरोप पत्र में अभियुक्त बनाया था।

इस मामले में इनके अलावा लश्करे तैयबा के संस्थापक हाफिज सईद और हिजबुल मुजाहिदीन के सरगना सैयद सलाउद्दीन को भगोड़ा अभियुक्त घोषित किया गया था।
मलिक ने आरोप पत्र को सुनाये जाने के बाद कहा कि वह अपने विरुद्ध लगाये गये अभियोगों का प्रतिवाद नहीं करेंगे। न्यायाधीश सिंह ने मामले की सुनवाई के बाद मलिक की वत्तिीय स्थिति के बारे में हलफनामा मांगा था और एनआईए से 25 मई रिपोर्ट दाखिल करने को कहा था। अदालत ने कहा था कि इस मामले में 25 मई को सजा सुनायी जायेगी।
मलिक को सजा सुनाये जाने पर पाकस्तिान में तीखी प्रतक्रिया हुई और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ आज की तारीख को काला दिन बताया।

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