क्या है नई दिल्ली अंतरराष्ट्रीय माध्यस्थतम केंद्र संशोधन विधेयक, जिसको लोकसभा ने दी मंजूरी

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लोकसभा ने सोमवार को नई दिल्ली अंतरराष्ट्रीय माध्यस्थतम केंद्र संशोधन विधेयक, 2022 को मंजूरी दे दी जिसमें देश में संस्थानिक मध्यस्थता के लिए एक स्वतंत्र और स्वायत्त व्यवस्था सृजित करने का प्रस्ताव किया गया है। इस विधेयक के माध्यम से मध्यस्थता केंद्र का नाम नई दिल्ली अंतरराष्ट्रीय माध्यस्थतम केंद्र से बदलकर भारत अंतरराष्ट्रीय माध्यस्थतम केंद्र किया जाना है। निचले सदन में विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए विधि एवं न्याय मंत्री किरेन रीजीजू ने कहा कि कभी-कभी एक छोटा संशोधन बड़ा काम कर जाता है, ऐसे में सदस्य यह न समझें कि विधेयक छोटा है।

उन्होंने कहा कि देश में आज 36 मध्यस्थता संस्थान हैं और ये शहरों के नाम पर हैं। दिल्ली में दिल्ली उच्च न्यायालय के तहत पहले से ही दिल्ली माध्यस्थतम केंद्र है। विधि मंत्री ने कहा कि जब हम अंतरराष्ट्रीय स्तर के मध्यस्थता केंद्र की बात करते हैं तब ऐसा नहीं लगना चाहिए कि यह देश में स्थित कोई केंद्र है। ऐसी स्थिति में नाम में बदलाव करने की पहल की गई। उन्होंने कहा कि हमारा देश भी मध्यस्थता का संस्थागत केंद्र बनने की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि भारत एक उभरता हुआ देश है, आर्थिक ताकत के रूप में बढ़ रहा है, ऐसे में आने वाले समय में मध्यस्थता के एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभरेगा।

मंत्री के जवाब के बाद सदन ने नयी दिल्ली अंतरराष्ट्रीय माध्यस्थतम केंद्र संशोधन विधेयक, 2022 को ध्वनिमत से मंजूरी दे दी। निचले सदन में चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस के अमर सिंह ने कहा कि मध्यस्थता को लेकर अनेक व्यावहारिक समस्याएं भी हैं और केवल केंद्र का नाम बदलने से उद्देश्य की पूर्ति नहीं होगी। भाजपा के रमेश बिधूड़ी, तृणमूल कांग्रेस के सौगत राय, द्रमुक के कलानिधि वीरास्वामी और वाईएसआर कांग्रेस के लाउ श्रीकृष्ण आदि ने भी चर्चा में भाग लिया।

इस विधेयक के माध्यम से नयी दिल्ली अंतरराष्ट्रीय माध्यस्थतम केंद्र अधिनियम 2019 में संशोधन करने का प्रस्ताव किया गया है। विधेयक के उद्देश्यों एवं कारणों में कहा गया है कि नयी दिल्ली अंतरराष्ट्रीय माध्यस्थतम केंद्र अधिनियम 2019 के माध्यम से नयी दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय माध्यस्थतम केंद्र स्थापित करने का उपबंध किया गया है। इसके तहत देश में संस्थानिक मध्यस्थता के लिये एक स्वतंत्र और स्वायत्त व्यवस्था सृजित करने का प्रस्ताव किया गया है। अधिनियम की धारा 4 की उपधारा (1) नयी दिल्ली अंतरराष्ट्रीय माध्यस्थतम केंद्र को राष्ट्रीय महत्व की एक संस्था घोषित करती है।

इसके अनुसार फिर भी, यह अनुभव किया गया है कि केंद्र एक राष्ट्रीय महत्व की संस्था होने के बाद भी नगर केंद्रित होने का आभास देता है जबकि यह भारत को संस्थानिक मध्यस्थता एवं अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक मध्यस्थता केंद्र के रूप में स्थापित करने की महत्वाकांक्षा को प्रतिबिंबित करने वाला होना चाहिए। ऐसे में केंद्र के नाम को नयी दिल्ली अंतरराष्ट्रीय माध्यस्थतम केंद्र से भारत अंतरराष्ट्रीय माध्यस्थतम में परिवर्तन करना अनिवार्य समझा गया है जिससे इसकी पहचान राष्ट्रीय महत्व के संस्थान की हो और यह अपने वास्तविक उद्देश्यों को प्रतिबिंबित करे।

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